सरकार ने गुरुवार को कहा कि साल 2025 में देश की कुल खाद की खपत का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा हुआ। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह इसलिए हुआ क्योंकि 2025 में खाद का घरेलू उत्पादन सबसे ज्यादा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
कुछ दिन पहले फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने अपने आंकड़े जारी किए थे, जिसमें दिखाया गया कि मौजूदा वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में यूरिया के आयात दोगुने से ज्यादा होकर 7.17 मिलियन टन पहुंच गए, जबकि घरेलू उत्पादन में गिरावट आई, जिससे विदेशी खाद पर निर्भरता बढ़ती दिख रही है।
दोनों के बीच मुख्य अंतर यह है कि FAI ने अपने आंकड़े वित्तीय साल (अप्रैल से मार्च) के आधार पर दिए, जबकि सरकार ने कैलेंडर साल (जनवरी से दिसंबर) के हिसाब से गणना की है।
सरकार के मुताबिक, 2021 में खाद (यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट, NPK और सिंगल सुपर फॉस्फेट) का घरेलू उत्पादन करीब 43.32 मिलियन टन था, जो 2022 में बढ़कर 46.78 मिलियन टन हो गया।
2023 में इसमें तेज उछाल आया और उत्पादन 50.79 मिलियन टन तक पहुंच गया। 2024 में यह 50.95 मिलियन टन रहा और 2025 में 52.46 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
आधिकारिक बयान में कहा गया, “नए खाद संयंत्र लगाना, बंद पड़े यूनिट्स को फिर से चालू करना और देशी उत्पादन को बढ़ावा देना; इन सबने इस सेक्टर को मजबूत बनाया है।”
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FAI के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-नवंबर 2024-25 के दौरान यूरिया आयात 120.3 प्रतिशत बढ़कर 7.17 मिलियन टन हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3.26 मिलियन टन था। इस दौरान घरेलू यूरिया उत्पादन 3.7 प्रतिशत घटकर 19.75 मिलियन टन रह गया। कुल यूरिया की बिक्री 2.3 प्रतिशत बढ़कर 25.40 मिलियन टन हो गई।
FAI चेयरमैन एस. शंकरसुब्रमण्यम ने एक बयान में कहा, “हमने बेहतर प्लानिंग से बिक्री बढ़ाई है, लेकिन यूरिया और DAP जैसी खादों में आयात पर काफी निर्भरता बनी हुई है। इससे साफ है कि सप्लाई चेन को स्मार्ट तरीके से मैनेज करना बहुत जरूरी है।”
नवंबर महीने में ही यूरिया आयात 68.4 प्रतिशत बढ़कर 1.31 मिलियन टन हो गया (पिछले साल नवंबर में 0.78 मिलियन टन था), जबकि यूरिया बिक्री 4.8 प्रतिशत बढ़कर 3.75 मिलियन टन रही।
यह स्थिति एक तरफ सरकार के उस दावे को सामने रखती है, जिसमें घरेलू खाद उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी की बात कही गई है, वहीं दूसरी ओर FAI के आंकड़े यह दिखाते हैं कि खासकर यूरिया जैसी खाद में आयात पर निर्भरता बनी हुई है। दोनों ही पक्ष अपने-अपने समयकाल के आंकड़ों के आधार पर तस्वीर पेश कर रहे हैं, जिससे खाद क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए आंकड़ों को सही संदर्भ में देखना जरूरी हो जाता है।