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होम लोन लेते वक्त यह गलती न करें, वरना चुकानी पड़ेगी ज्यादा कीमत; एक्सपर्ट से समझें

ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस न केवल सस्ता है बल्कि लचीलापन और पारदर्शिता भी प्रदान करता है, जिससे परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

Last Updated- January 10, 2026 | 9:00 AM IST
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Representative Image

शहरी भारत में होम लोन अब एक अल्पकालिक जरूरत नहीं, बल्कि दशकों तक चलने वाली बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी बन गया है। बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के कारण लोन की राशि और अवधि दोनों बढ़ रही हैं। ऐसे में यदि उधारकर्ता के साथ कोई अनहोनी हो जाए, तो परिवार पर कर्ज का बोझ न आए, इसके लिए होम लोन इंश्योरेंस को वित्तीय योजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

लेकिन यह बीमा कहां से लिया जाए, ऑनलाइन या बैंक के जरिए ऑफलाइन, यह फैसला खर्च और विकल्पों पर सीधा असर डालता है।

ऑनलाइन पॉलिसी बन रही है किफायती विकल्प

Policybazaar.com के आंकड़ों के अनुसार, ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। डिजिटल माध्यम से ली जाने वाली पॉलिसियों में प्रीमियम अपेक्षाकृत कम होता है और ग्राहक को कवरेज, शर्तों और लागत की स्पष्ट जानकारी मिलती है। इससे तुलना करना आसान होता है और जरूरत के मुताबिक पॉलिसी चुनने की आजादी भी मिलती है।

बैंकों से मिलने वाला ऑफलाइन बीमा कैसे होता है

अधिकांश बैंक लोन मंजूरी के समय ही बीमा कवर की पेशकश करते हैं। कई बार यह बीमा लोन के साथ जोड़ दिया जाता है और इसे सामान्य प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस स्थिति में ग्राहक को कीमत और फीचर्स के बारे में सीमित जानकारी मिल पाती है और विकल्पों पर चर्चा का अवसर कम होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होम लोन इंश्योरेंस लेते समय केवल सुविधा को नहीं, बल्कि लागत, पारदर्शिता और लचीलापन भी देखना चाहिए। सही तरीके से चुनी गई पॉलिसी न सिर्फ खर्च कम कर सकती है, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत बनाती है।

महंगे ऑफलाइन होम लोन इंश्योरेंस से क्यों बच रहे हैं ग्राहक?

घर खरीदते समय बैंक या लोन देने वाली संस्थाएं अक्सर होम लोन इंश्योरेंस को अनिवार्य जैसा बना देती हैं। लेकिन जानकारों के मुताबिक, ऑफलाइन होम लोन इंश्योरेंस योजनाएं ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकती हैं।

ऑफलाइन इंश्योरेंस की सबसे बड़ी कमी इसका ऊंचा प्रीमियम है, जिसमें एजेंट कमीशन और प्रशासनिक खर्च जुड़े होते हैं। इसके अलावा, प्रीमियम राशि पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी लगाया जाता है, जिससे कुल लागत और बढ़ जाती है।

इन पॉलिसियों की संरचना काफी कठोर होती है। अगर कोई उधारकर्ता अपना लोन समय से पहले चुका देता है या उसे किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करता है, तब भी कई मामलों में इंश्योरेंस का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इतना ही नहीं, क्लेम की राशि सीधे बैंक या लेंडर को मिलने की शर्त भी आम है, जिससे परिवार को तत्काल वित्तीय सहायता नहीं मिलती।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस व्यवस्था के चलते कई ग्राहक लोन खत्म होने या राशि कम होने के बाद भी बेवजह इंश्योरेंस प्रीमियम चुकाते रहते हैं।

ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस क्यों पड़ता है सस्ता?

इसके उलट, ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस योजनाएं सीधे ग्राहकों को बेची जाती हैं। इसमें किसी एजेंट या बिचौलिए की भूमिका नहीं होती, जिससे वितरण लागत काफी कम हो जाती है। यही कारण है कि कंपनियां इन पॉलिसियों की कीमत अपेक्षाकृत कम रख पाती हैं।

बीमा तुलना प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस प्लान ऑफलाइन विकल्पों की तुलना में लंबी अवधि में काफी सस्ते साबित हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, 30 साल के एक व्यक्ति द्वारा 1 करोड़ रुपये का होम लोन लेने पर, जिसकी ब्याज दर 8 प्रतिशत है, ऑफलाइन इंश्योरेंस पर पूरी अवधि में करीब 6 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है।

वहीं, उसी कवर के लिए ऑनलाइन इंश्योरेंस का खर्च लगभग 1.5 से 1.7 लाख रुपये के आसपास रह सकता है।

इस कीमत अंतर की एक अहम वजह यह भी है कि ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस पर फिलहाल जीएसटी नहीं लगता, जबकि ऑफलाइन योजनाओं पर 18 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि होम लोन लेते समय इंश्योरेंस लेना जरूरी हो सकता है, लेकिन ग्राहक को विकल्पों की तुलना जरूर करनी चाहिए। केवल बैंक की पेशकश पर निर्भर रहने के बजाय ऑनलाइन उपलब्ध योजनाओं की शर्तें, लागत और क्लेम प्रक्रिया समझना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

लचीलापन और ग्राहक को अधिक नियंत्रण

ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस अब सिर्फ कम लागत का विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्राहकों को कहीं अधिक लचीलापन और नियंत्रण भी देता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए खरीदे गए ऐसे बीमा प्लान उधारकर्ताओं की जरूरतों के अनुसार आसानी से ढाले जा सकते हैं।

इन पॉलिसियों में प्रीमियम भुगतान की शर्तों को उधारकर्ता की आय और नकदी प्रवाह के हिसाब से तय किया जा सकता है। अगर होम लोन समय से पहले चुका दिया जाता है, तो पॉलिसी को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बदला या बंद किया जा सकता है। इसके अलावा, बीमा कवर को बकाया लोन राशि के अनुरूप कस्टमाइज करने की सुविधा भी मिलती है, जिससे अनावश्यक अतिरिक्त कवरेज से बचा जा सके।

क्लेम प्रक्रिया में भी बड़ा फर्क

ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस की एक अहम खासियत इसकी क्लेम प्रक्रिया है। इसमें उधारकर्ता यह तय कर सकता है कि बीमा राशि सीधे उसके परिवार को मिले या नहीं। इससे कठिन परिस्थितियों में परिवार को वित्तीय फैसलों पर बेहतर नियंत्रण मिलता है, जबकि पारंपरिक तौर पर यह राशि अक्सर सीधे लोन देने वाले संस्थान को चली जाती है।

जागरूकता अभी भी कम

इतने फायदों के बावजूद ऑनलाइन होम लोन इंश्योरेंस को लेकर जागरूकता अभी सीमित है। बड़ी संख्या में उधारकर्ता अब भी यह नहीं जानते कि वे होम लोन के साथ बीमा लेने के लिए बाध्य नहीं हैं और चाहें तो लोन से अलग, स्वतंत्र रूप से भी लोन प्रोटेक्शन कवर खरीद सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी मिलने पर ग्राहक अपने लिए ज्यादा उपयुक्त और किफायती विकल्प चुन सकेंगे।

First Published - January 10, 2026 | 8:56 AM IST

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