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खाद में आत्मनिर्भरता की बड़ी छलांग, देश में उर्वरकों की कुल खपत का 73 प्रतिशत घरेलू उत्पादन से

सरकारी बयान के अनुसार, ‘नए उर्वरक संयंत्रों की स्थापना, बंद इकाइयों का पुनरुद्धार और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने से इस क्षेत्र को काफी फायदा हुआ है।’

Last Updated- January 09, 2026 | 10:26 PM IST
fertiliser
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश में उर्वरकों की कुल खपत का 73 प्रतिशत घरेलू उत्पादन से पूरा होता है। सरकार ने आज आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि वर्ष 2025 में उर्वरक का घरेलू उत्पादन अपने सर्वाच्च स्तर पर पहुंच गया है। ऐसी रिपोर्ट बीते दिनों प्रकाशित हुई हैं कि भारत की आयातित उर्वरकों पर निर्भरता बढ़ रही हैं।

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) ने कुछ दिन पहले प्रकाशित आंकड़ों में बताया था कि इस वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में भारत का घरेलू उत्पादन गिरने के कारण यूरिया का आयात दो गुना बढ़कर 71.7 लाख टन हो गया। लिहाजा किसानों की मांग को पूरा करने के लिए विदेशी आपूर्ति पर बढ़ती निर्भरता को उजागर किया था।

दोनों के एप्रोच में महत्त्वपूर्ण अंतर यह है कि एफएआई का तर्क वित्तीय वर्ष पर आधारित हैं जबकि सरकार की गणना कैलेंडर वर्ष के आधार पर है।

सरकार ने बताया कि यूरिया, डाई-अमोनिया फॉस्फेट, एनपीके और सिंगल सुपर-फॉस्फेट (एसएसपी) जैसे उर्वरकों का वर्ष 2021 में घरेलू उत्पादन लगभग 433.2 लाख टन था और यह वर्ष 2022 में बढ़कर 467.8 लाख टन हो गया।

सरकार के बयान के अनुसार वर्ष 2023 में उर्वरकों के घरेलू उत्पादन में भारी उछाल आया और यह बढ़कर 507.9 लाख टन हो गया। यह वर्ष 2024 में फिर बढ़कर 509.5 लाख टन तक पहुंच गया। फिर वर्ष 2025 में 524.6 लाख टन पर पहुंच गया।

सरकारी बयान के अनुसार, ‘नए उर्वरक संयंत्रों की स्थापना, बंद इकाइयों का पुनरुद्धार और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने से इस क्षेत्र को काफी फायदा हुआ है।’

इस बीच एफएआई के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि वर्ष 2024-25 के अप्रैल-नवंबर के दौरान बीते साल की इस अवधि के 32.6 लाख टन से 120.3 प्रतिशत बढ़कर 71.7 लाख टन हो गया।

आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में घरेलू यूरिया उत्पादन 3.7 प्रतिशत घटकर 197.5 लाख टन रह गया। हालांकि यूरिया की कुल बिक्री 2.3 प्रतिशत बढ़कर 254 लाख टन हो गई।

एफएआई के अध्यक्ष एस शंकरसुब्रमण्यन ने कहा था, ‘हमने समन्वित योजना के माध्यम से बिक्री में वृद्धि हासिल की है, लेकिन आयात पर हमारी निर्भरता महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ी। इसके तहत विशेष रूप से यूरिया और डीएपी का आयात बढ़ा। यह हमारे रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के महत्त्व को रेखांकित करता है।’आंकड़ों से पता चला कि अकेले नवंबर में यूरिया का आयात 68.4 प्रतिशत बढ़कर 13.1 लाख टन हो गया।

First Published - January 9, 2026 | 10:26 PM IST

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