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सीमेंट कंपनियों के लाभ पर असर

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Last Updated- December 07, 2022 | 12:04 AM IST

सरकार द्वारा मुद्रास्फीति को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों का असर सीमेंट कंपनियों पर अब दिखने लगा है।


अगर इन कंपनियों के इस तिमाही के प्रदर्शन को देखा जाए तो इस बात की पुष्टि हो जाती है। सरकार ने सीमेंट के दामों को नियंत्रित करने के लिए जो कदम उठाए हैं उसके बावत इन कंपनियों ने 1.5 से 3 फीसदी की कमी की है और इससे अगले तीन महीने में कंपनियों के लाभ पर इस कमी का असर जरुर दिखेगा।

 2006-07 की तुलना में अगर 2007-08 की चौथी तिमाही में सीमेंट निर्माता कंपनियों जैसे एसीसी, अंबुजा सीमेंट, अल्ट्राटेक, जे के लक्ष्मी और प्रिज्म सीमेंट ने अपेक्षाकृत कम मुनाफा बटोरा है।

2006-07 की चौथी तिमाही में पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा लाभ अर्जित किया गया था। अल्ट्राटेक ने इस अवधि में 185.18 प्रतिशत, जे के लक्ष्मी ने 156 प्रतिशत, प्रिज्म सीमेंट ने 127 प्रतिशत, अंबुजा सीमेंट ने 97.98 प्रतिशत और एसीसी ने 54.46 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया था।

2009-08 की चौथी तिमाही में अंबुजा सीमेंट  ने महज 44 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया जबकि एसीसी के मुनाफे में 1.65 प्रतिशत की कमी देखी गई। वैसे अल्ट्राटेक ने कमोबेश अपने लाभ को थोडा नियंत्रित रखा और उसने कुल लाभ में 22 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया। जे के लक्ष्मी और प्रिज्म सीमेंट ने क्रमश: 11 और 16 प्रतिशत का लाभ अर्जित किया।

इस तरह की तुलनात्मक कमी की वजह यह है कि अप्रैल 2007 के बाद से इन कंपनियों को मन माफिक दामों में बढोतरी करने का मौका नहीं मिला। अल्ट्राटेक सीमेंट की विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार की लगातार हस्तक्षेप के कारण दामों पर काफी असर पड़ा। वैसे निर्माण लागत तो बढ़ती गई लेकिन दामों में तदनुरुप बढ़ोतरी नही हुई और इसी वजह से लाभ मार्जिन कम रहा।

पिछले डेढ साल से अधिक समय से सरकार ने सीमेंट की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई तरीके अपनाए। हाल ही में इसके निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया और 250 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बैग को बेचने पर 12 प्रतिशत की एड-वेलोरेम शुल्क लगाने के भी कदम उठाए गए। पिछले साल सरकार ने सीमेंट के आयात को करमुक्त कर दिया था। थोक मूल्य सूचकांक में सीमेंट का भार 1.73 प्रतिशत है।

एसीसी के मुताबिक कच्चे माल और अन्य महत्वपूर्ण कारकों में इस चौथाई में 12 प्रतिशत की बढोतरी हुई है। कोयला, जिप्सम, बिजली, माल ढुलाई आदि सब कुछ में इस अवधि में बढोतरी हुई है। कोयला की कीमतों में तो 31 प्रतिशत की बढोतरी हुई है।

इसके बावजूद सीमेंट कंपनियों ने सीमेंट की कीमतों में मात्र 3 प्रतिशत की बढोतरी की है। इसलिए कंपनियों का लाभ मार्जिन कम हुआ है। सीमेंट उद्योग ने 2007-08 में 1 करोड़ टन उत्पादन की क्षमता रखी थी जो इस साल बढ़कर 1 करोड़ 75 लाख टन से ज्यादा हो गया है।

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First Published - May 19, 2008 | 4:28 AM IST

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