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Crude Oil Price: लाल सागर में हमले के बाद अवरोध के डर से उछला तेल

ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 फीसदी बढ़कर 78.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई

Last Updated- January 02, 2024 | 10:08 PM IST
India's oil demand will be stable till mid-2040, global demand likely to fall after 2035: BP Energy भारत की तेल मांग 2040 के मध्य तक होगी स्थिर, वैश्विक मांग 2035 के बाद गिरने की संभावना: बीपी एनर्जी

Crude Oil Price: तेल की कीमतें नए साल के पहले सत्र में 2 फीसदी से ज्यादा उछल गई, जिसे लाल सागर में कंटेनर वाले जहाज पर ताजा हमले के बाद पश्चिम एशिया में आपूर्ति पर संभावित अवरोध और चीन में मांग की उम्मीद से मजबूती मिली।

ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 फीसदी बढ़कर 78.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। अमेरिका में पश्चिमी टैक्सस इंटरमीडिएट क्रूड भी 2.2 फीसदी उछलकर 73.21 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा।

अर्थशास्त्रियों व विश्लेषकों के बीच रॉयटर्स की तरफ से हुए सर्वे में अनुमान लगाया गया कि ब्रेंट क्रूड इस साल औसतन 82.56 डॉलर प्रति बैरल पर रहेगा, जो साल 2023 के औसत 82.17 डॉलर से थोड़ा ज्यादा है। जिसकी वजह कमजोर वैश्विक वृद्धि से सीमित मांग की संभावना है। भूराजनीतिक तनाव हालांकि कीमत को सहारा दे सकता है।

अमेरिकी हेलिकॉप्टरों ने रविवार को लाल सागर में ईरान समर्थित हूती सेनानियों की तरफ से मर्स्क कंटेनर जहाज पर हुए हमले का जवाब दिया और हूती के तीन जहाजों को डुबोने के साथ 10 आतंकवादियों का सफाया कर दिया। इससे इजरायल-हमास का युद्ध के और व्यापक होने का जोखिम बढ़ गया।

डेनिश कंपनी मर्स्क ने कहा, सप्ताहांत में हुए हमले को देखते हुए वह मंगलवार को फैसला लेगी कि क्या लाल सागर होते हुए स्वेज नहर के जरिये जहाज भेजा जाए या उन्हें अफ्रीका की तरफ से भेजा जाए। इस हमले में कंपनी का जहाज क्षतिग्रस्त हुआ है। कंपनी के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।

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शांघाई के सीएमसी मार्केट्स एनालिस्ट लियॉन ली ने फरवरी की शुरुआत में नए साल की छुट्टियों का संदर्भ देते हुए कहा, तेल की कीमतें लाल सागर में हमले व चीन में त्योहारी सीजन के दौरान उच्च मांग के सीजन के चलते प्रभावित हो सकती हैं। विवाद बढ़ने से तेल के परिवहन की खातिर अहम जलमार्ग बंद हो सकते हैं। शिप ट्रैकिंग के आंकड़े बताते हैं कि पश्चिम एशिया से डीजल व जेट ईंधन और भारत से यूरोप जा रहे कम से कम चार टैंकर लाल सागर को छोड़ अफ्रीका की तरफ बढ़ रहे हैं।

चीन में निवेशकों की तरफ से नए आर्थिक प्रोत्साहन के कदमों की उम्मीद बढ़ी जब विनिर्माण गतिविधियां लगातार तीसरे महीने दिसंबर में घट गईं। सरकारी आंकड़ों से रविवार को यह जानकारी मिली।

आर्थिक वृद्धि के लिए ऐसे किसी प्रोत्साहन से तेल की मांग को मजबूती मिल सकती है और इससे कच्चे तेल की कीमतों को भी सहारा मिल सकता है।

First Published - January 2, 2024 | 10:08 PM IST

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