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आयात पर अमेरिका में कुल 50 प्रतिशत शुल्क से वाहन और पुर्जा उद्योग में चिंता का माहौल

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भारत से 27 प्रतिशत वाहन पुर्जे और 17 प्रतिशत टायर अमेरिका ही जाते हैं।

Last Updated- August 08, 2025 | 11:30 PM IST
Auto parts

भारत से आयात पर अमेरिका में कुल 50 प्रतिशत शुल्क से वाहन और पुर्जा उद्योग में चिंता का माहौल है। भारत से 27 प्रतिशत वाहन पुर्जे और 17 प्रतिशत टायर अमेरिका ही जाते हैं। यह देखते हुए विश्लेषकों ने चेताया है कि शुल्क के कारण विशेष रूप से भारी वाहन मशीनरी और रीप्लेसमेंट टायर (पुराने टायर हटाकर लगाए गए नए टायर) की श्रेणी में वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे एशियाई देशों से साथ कीमत की होड़ में भारत पिछड़ सकता है क्योंकि इन दोनों देशों पर कम आयात शुल्क लगता है।

ईवाई इंडिया में पार्टनर और ऑटोमोटिव टैक्स लीडर सौरभ अग्रवाल ने कहा कि भले ही भारत से 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क से वाहन पुर्जे आदि पर ज्यादा असर नहीं पड़े मगर अमेरिका से पहले लगाए गए शुल्क ने भारतीय निर्यात के लिए होड़ का गणित ही बदल दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय फर्मों को अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (यूएसएमसीए) के तहत मेक्सिको या कनाडा में उत्पादन शुरू करने पर विचार करना चाहिए। हाल ही में ब्रिटेन के साथ हुए व्यापार सौदे का भी लाभ उठाना चाहिए और यूरोपीय संघ के साथ तेजी से समझौते के लिए दबाव बनाना चाहिए।

कलपुर्जा बनाने वाली भारतीय कंपनियों के संगठन एक्मा ने इस शुल्क को वाहन उद्योग के लिए बड़ी चुनौती करार दिया है। लेकिन उसे लगता है कि यह भारतीय निर्यातकों के लिए होड़ बढ़ाने और नए बाजार तलाशने का भी संकेत है। एक्मा की अध्यक्ष श्रद्धा सूरी मारवाह ने कहा कि शुल्क बढ़ने से पता चलता है कि वैश्विक व्यापार किस तेज से बदल रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए कुछ समय की चुनौती भले ही आए मगर मूल्यवर्धन और होड़ की क्षमता बढ़ाने तथा नए बाजार जुड़ने जैसे अच्छे पहलू भी सामने आएंगे।

शुक्रवार को निफ्टी ऑटो इंडेक्स 0.2 प्रतिशत बढ़कर 23,808 अंक पर बंद हुआ। हीरो मोटोकॉर्प 4.2 प्रतिशत वृद्धि के साथ लाभ में सबसे आगे रहा। इसके बाद टीवीएस मोटर 2.1 प्रतिशत और भारत फोर्ज 1.9 प्रतिशत चढ़ा।  बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, मारुति सुजूकी, बॉश और बजाज ऑटो भी चढ़े। मगर एमआरएफ, संवर्धन मदरसन और टाटा मोटर्स सबसे अधिक नुकसान में रहे, जिनके शेयर 1.4 प्रतिशत तक गिर गए।

शुल्क पर उद्योग जगत की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। बजाज ऑटो के कार्यकारी निदेशक राकेश शर्मा ने कहा कि कंपनी का अमेरिका के साथ कारोबार बहुत कम है और वहां होने वाला निर्यात कुल कारोबार के 1 प्रतिशत से भी कम है। बजाज ऑटो केवल केटीएम और ट्रायंफ मोटरसाइकल ही निर्यात करती है। उन्होंने कहा, ‘शुल्क का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि बढ़ती कीमतों के बाद मांग कैसे बदलती है और होड़ करने की क्षमता कैसे बढ़ती है।’

कैरारो इंडिया के प्रबंध निदेशक बालाजी गोपालन कहते हैं, ‘अमेरिका के साथ हमारा कारोबार सिर्फ 6-7 प्रतिशत है। विभिन्न देशों के साथ कारोबार होने के कारण हमारी स्थिति थोड़ी अलग और बेहतर है।’

इक्रा का कहना है कि अभी तक अमेरिकी बाजार पर ही ज्यादा निर्भर रहे वाहन पुर्जा निर्यातक शुल्क के प्रभाव से बचने या उसे कम से कम करने के लिए नए बाजार तलाशेंगे। अभी तक भारतीय टायर निर्यातक चीनी कंपनियों से बेहतर स्थिति में थे मगर कुछ दक्षिण पूर्व एशियाई देशों पर कम शुल्क लगने से अब तस्वीर बदल सकती है।

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First Published - August 8, 2025 | 10:57 PM IST

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