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रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए रूस करेगा सहयोग, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंद्रेई बेलौसोव से मुलाकात की

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यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच शुक्रवार को होने वाली 23वीं भारत-रूस शिखर वार्ता से पहले हुई है

Last Updated- December 04, 2025 | 11:07 PM IST
Rajnath Singh and Andrey Belousov

द्विपक्षीय सैन्य सहयोग पर आगे की चर्चा के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव से मुलाकात की। दोनों ने यहां सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग पर भारत रूस अंतर-सरकारी आयोग के 22वें सत्र की सह अध्यक्षता की। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच शुक्रवार को होने वाली 23वीं भारत-रूस शिखर वार्ता से पहले हुई है।

रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, सिंह ने बेलौसोव के साथ बैठक में कहा कि भारत स्थानीय उत्पादन और निर्यात दोनों के लिए अपने स्वदेशी रक्षा उद्योग के विकास के लिए दृढ़ है। बयान में कहा गया है कि सिंह ने दोनों देशों के बीच विशिष्ट प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर जोर दिया।

रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक बैठक में बेलौसोव ने कहा कि रूस रक्षा उत्पादन में भारत के आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग देने के लिए तैयार है। अगले दौर की यह बैठक 2026 में रूस में होने की संभावना है। हालांकि पुतिन की गुरुवार-शुक्रवार को भारत यात्रा से पहले कोई बड़ा रक्षा सौदा घोषित नहीं किया गया है और संयुक्त मंच का आ​धिकारिक एजेंडा आ​र्थिक विकास पर ही केंद्रित रहा।

दोनों रक्षा मंत्रियों ने नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों के साथ मुलाकात की। स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के आंकड़ों के अनुसार, 2009 और 2013 के बीच भारत ने अपने रक्षा सामान का 76 प्रतिशत रूस से आयात किया। यह आंकड़ा 2019 और 2023 के बीच घटकर 36 प्रतिशत पर आ गया।

रूसी रक्षा वस्तुओं पर भारत की निर्भरता में काफी कमी आई है, लेकिन यह एस-400 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली जैसे उन्नत सामान खरीदना जारी रखे हुए है।

इन मिसाइलों का उपयोग भारत ने इसी साल मई में पाकिस्तान के खिलाफ अपने चार दिवसीय ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हवाई रक्षा के लिए प्रभावी ढंग से किया था। भारतीय सैन्य सूत्रों ने कहा कि वर्ष 2018 में किए गए 5.43 अरब डॉलर के अनुबंध के मुताबिक पांच खेप में से दो यूक्रेन युद्ध के कारण नहीं आ पाई हैं। अब इनके 2026-27 में आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भारत अभी रूस से और अधिक एस-400 मिसाइलें खरीदने की योजना बना रहा है।

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First Published - December 4, 2025 | 11:04 PM IST

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