facebookmetapixel
Advertisement
ग्लोबल क्राइसिस के बीच PM ने आर्थिक सलाहकारों संग की हाई-लेवल बैठक, संकट के बीच इकोनॉमी बचाने पर चर्चाGoogle ने गुरुग्राम में ली 6.17 लाख वर्ग फुट जगह, 5 साल का किराया जानकर उड़ जाएंगे होश!15 साल के वैभव सूर्यवंशी को आया टीम इंडिया से बुलावा, टूट सकता है सचिन तेंदुलकर का महारिकॉर्ड!सेमीकंडक्टर संकट होगा दूर! FY2035 तक अपनी आधी जरूरतें खुद पूरी करेगा भारत, प्रोडक्शन इसी साल से शुरू1 के बदले मिलेंगे 5 शेयर! IT और AI सेक्टर से जुड़ी नामी कंपनी करने जा रही है स्टॉक स्प्लिट, रिकॉर्ड डेट फिक्सBonus Stocks: अगले हफ्ते बरसेंगे फ्री शेयर, ये 2 कंपनियां देने जा रही हैं बंपर बोनस; नोट कर लें रिकॉर्ड डेटDividend Stocks: कमाई का महामेला! अगल हफ्ते टाटा-अदाणी-इंफोसिस समेत ये 39 कंपनियां देंगी तगड़ा डिविडेंडसरकारी साइबर सुरक्षा को मिलेगा AI का साथ, चुनिंदा एजेंसियों को ‘क्लॉड मिथोस’ का एक्सेस देगी सरकारमहंगाई का यू-टर्न और घटती ग्रोथ: RBI ने माना पश्चिम एशिया संकट से पटरी से उतर रही इकोनॉमीचौथी तिमाही में निजी उपभोग की मांग पस्त, सरकारी खर्चों और पूंजीगत निवेश के भरोसे टिकी GDP

डीपफेक हटाने पर सरकार सख्त, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की समयसीमा घटाई

Advertisement

मंत्रालय ने इन बदलावों को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया एथिक्स संहिता) नियम, 2021 में संशोधनों के रूप में शामिल किया है

Last Updated- February 10, 2026 | 10:42 PM IST
Social Media

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि आगामी 20 फरवरी से सोशल मीडिया और इंटरनेट मध्यवर्ती कंपनियों को दिक्कतदेह सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाना होगा। अब तक इसके लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। मध्यवर्तियों को अपने प्लेटफॉर्म से गैर सहमति वाली अंतरंग तस्वीरों को 24 घंटे के बजाय दो घंटे के भीतर हटाना होगा। मंत्रालय ने इन बदलावों को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया एथिक्स संहिता) नियम, 2021 में संशोधनों के रूप में शामिल किया है।

यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि मंत्रालय को ऐसे फीडबैक मिले थे कि संवेदनशील सामग्री को हटाने के लिए 24 घंटे और 36 घंटे की अवधि बहुत अधिक है जिसके चलते कंटेंट के प्रसार को रोक पाना मुश्किल होगा।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘कंपनियों को अब आपत्तिजनक सामग्री को अधिक तेजी से हटाना होगा।’ मंत्रालय ने मंगलवार को अधिसूचित ताजा संशोधनों में यह भी कहा है कि जो प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके सामग्री बनाने की इजाजत देते हैं उन्हें ऐसी सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना होगा कि यह सामग्री कृत्रिम ढंग से तैयार की गई है। ऐसी सामग्री को स्थायी मेटाडेटा या अन्य पहचान के माध्यमों से जोड़ना होगा ताकि ऐसी सामग्री के मूल स्रोत का पता लगाया जा सके।

कृत्रिम रूप से उत्पन्न जानकारी को परिभाषित करते हुए मंत्रालय ने कहा है कि यह कोई भी ऑडियो, दृश्य या ऑडियो-विजुअल जानकारी हो सकती है, जिसे कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके कृत्रिम या एल्गोरिदम से बनाया, उत्पन्न, संशोधित या परिवर्तित किया गया हो, इस प्रकार कि वह वास्तविक, प्रामाणिक या सत्य प्रतीत हो। मंत्रालय ने एआई का उपयोग करके ‘सद्भावना’ में की गई सामग्री संपादन को इसकी परिभाषा से बाहर रखा है।

नवीनतम अधिसूचित संशोधनों में यह भी कहा गया है कि जैसे ही किसी मध्यस्थ को यह ज्ञात होता है कि उसके साधनों का दुरुपयोग करके ऐसी सामग्री को बनाया, होस्ट या प्रसारित किया जा रहा है, उसे ऐसे कंटेंट को प्लेटफॉर्म पर मौजूद होने से रोकने के लिए ‘उचित’ और ‘उपयुक्त’ तकनीकी उपाय लागू करने होंगे।

दिल्ली की लॉ फर्म इकिगाई लॉ के साझेदार अमन तनेजा ने कहा कि नए संशोधन मसौदे की तुलना में अधिक व्यापक हैं। उन्होंने कहा, ‘इससे अनुपालन का स्तर काफी ऊंचा हो जाता है। बड़े प्लेटफॉर्मों के लिए इन समय सीमाओं को बड़े पैमाने पर पूरा करना परिचालन रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।’

अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधन एआई-जनित डीपफेक्स को विनियमित करने के लिए अधिक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।

Advertisement
First Published - February 10, 2026 | 10:13 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement