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लेखक : शेखर गुप्ता

अर्थव्यवस्था, आज का अखबार, बाजार, भारत, राजनीति, लेख, वित्त-बीमा, विशेष

मनमोहन सिंह का दूसरा बड़ा और अहम सुधार

पिछले दो-तीन दिन में डॉ. मनमोहन सिंह के बारे में लाखों शब्द लिखे और कहे जा रहे हैं। उनमें से ज्यादातर 1991 में शुरू किए गए सुधारों की ही बात करेंगे। इससे हम समझ सकते हैं कि कैसे उनके प्रशंसक भी उनके जीवन का अक्सर एक ही पहलू देखते हैं। इनमें उनके वे प्रशंसक भी […]

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राष्ट्र की बात: लगातार उभरते मुद्दों पर भागवत की चेतावनी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ‘मंदिर के ऊपर मस्जिद होने’ के दावे बंद करने की बात कह रहे हैं तो शायद उन्हें एहसास हुआ है कि यह मुद्दा काबू से बाहर हुआ तो कानून-व्यवस्था कायम नहीं रह पाएगी ‘अगर कोई कौआ मंदिर के शिखर पर बैठ जाए तो क्या वह गरुड़ बन जाएगा?’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक […]

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राष्ट्र की बात: केवल डीप स्टेट नहीं अमेरिकी विदेश विभाग पर भी है हमला

हमारे राजनीतिक रणनीतिक इतिहास की एक अहम घटना अपेक्षाकृत कम बहस के साथ गुजर गई। यह घटना थी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा अमेरिकी डीप स्टेट पर ही नहीं बल्कि अमेरिकी विदेश विभाग पर भी हमला। जब भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल ने 16 भागों में बंटे एक संदेश के जरिये अमेरिकी डीप स्टेट पर […]

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राष्ट्र की बात: खराब विचारों की वापसी और सुधारकों की कमी

इस सप्ताह के स्तंभ के लिए तीन उपयुक्त मुद्दे सामने थे: गरीबी उन्मूलन का पुराना विचार, स्टील उद्योग की अधिक आयात शुल्क के लिए लॉबीइंग और एडी श्रॉफ जैसे सुधारों के पैरोकार इस समय नहीं हैं इस सप्ताह इस स्तंभ के लिए तीन विषय बिल्कुल समय पर सामने थे। पहला मुद्दा सोशल मीडिया पर वायरल […]

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राष्ट्र की बात: भारत का पाकिस्तान में खेलना उचित नहीं

इस सप्ताह का विषय क्रिकेट नहीं बल्कि भारत के पड़ोस की भू-राजनीति है। यही वजह है कि इसकी शुरुआत क्रिकेट से हुई। भारत के आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान जाने की कोई वजह नहीं है। इस मामले में सभी दबावों को नकारा जाना चाहिए। इसका इकलौता समझदारी भरा हल होगा जगह में बदलाव। यह […]

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राष्ट्र की बात: भारत और उसके बाहर अदाणी समूह का मूल्यांकन

सेबी नए सिरे से जांच शुरू कर सकता है। संसद में शोर होगा और विदेशी पूंजी तक अदाणी की पहुंच असंभव हो जाएगी। इस बार नुकसान कहीं गहरा और लंबा असर डालने वाला होगा। तकरीबन दो साल में अदाणी समूह ने तीन बार बड़ी अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी हैं: पहली बार उसके कर्ज को लेकर, दूसरी […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: दो मोर्चों पर रोकथाम के लिए कुछ सुझाव

दो सप्ताह पहले हमने देश के रक्षा बजट में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और राष्ट्रीय बजट दोनों के प्रतिशत में कमी आने को लेकर कुछ प्रश्न उठाए थे। हमने वादा किया था कि अगले आलेख में हम यह चर्चा करेंगे कि कैसे संसाधन जुटाकर अगले चार सालों में इसे जीडीपी के 1.9 फीसदी से जीडीपी […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप, मोदी, राहुल और चुनाव का फॉर्मूला तीन

चुनावी जीत का फॉर्मूला तीन स्तंभों पर टिका है और सफल प्रचार अभियान को उन पर आधारित होना चाहिए। ट्रंप ने इस पर अमल किया। मोदी ने भी 2014 और 2019 में ऐसा किया मगर 2024 में नहीं। अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप की जीत हमें क्या बताती है कि नेता ऐसा क्या करते हैं कि […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: चीन-भारत सैन्य परिदृश्य बजट बढ़ाने की जरूरत

हम अपनी सेना के बारे में बहुत बातें करते हैं लेकिन उस पर उतना खर्च नहीं करते हैं जितना करने की आवश्यकता है। भारत और चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से अपनी-अपनी सेना हटाना हमारे राष्ट्रीय संकल्प की दावेदारी की दिशा में एक अहम कदम है। यह याद दिलाता है कि भारत और चीन […]

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राष्ट्र की बात: कांग्रेस- अस्तित्व या मजबूती का सवाल

अगर मैं कहूं कि बीते दो दशक में कांग्रेस के साथ घटित दो सबसे बुरी बातें रहीं 2004 के आम चुनाव में जीत और 2024 में लोक सभा में 99 सीट जीतना तो? आप शायद मुझसे कहेंगे कि मैं अपनी दिमागी हालत की जांच करवाऊं। इससे पहले कृपया मेरी बात सुनें। कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र और […]

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