facebookmetapixel
Advertisement
भारत-अमेरिका को मतभेद दूर कर भरोसेमंद कर व्यवस्था बनाने पर काम करना चाहिए: सर्जियो गोरभारतीय चुनाव व्यवस्था की तारीफ कर बोले ट्रंप, कांग्रेस ने कहा- ईवीएम भी अमेरिका भेज देंगेब्रिक्स देशों ने पर्यावरण संरक्षण पर चार ज्ञान संकलन जारी किए, टिकाऊ विकास पर जोरदुबई का कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार मजबूत, पहली छमाही में लेनदेन 8.5% बढ़ाबाल यौन शोषण सामग्री पर सरकार सख्त, सोशल मीडिया के ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान पर साफ संदेश17 सितंबर से सेमीकॉन इंडिया 2026, वैश्विक सीईओ और 500 से ज्यादा प्रदर्शक करेंगे ​शिरकत 13-17 साल के किशोरों के लिए नया चैटजीपीटी, मजबूत सुरक्षा और पैरेंटल कंट्रोल की सुविधालाठीचार्ज और पुलिस हिंसा की जांच करेगी 3 सदस्यीय समिति, सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देशपायलटों की आकस्मिक ड्रग जांच 25% करने की मांग, डीजीसीए से एफआईपी की अपीलभारत के समुद्री व्यापार का नया गेटवे बना विझिंजम, 57 लाख टीईयू क्षमता की ओर बढ़ा बंदरगाह

लेखक : शेखर गुप्ता

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: विदेशों में बसे सिख उपद्रवियों से परेशान न हो भारत

बड़े और पुराने खतरे दोबारा सिर उठा रहे हैं और पीढ़ियों से दफन प्रेत फिर उठ रहे हैं तो सेना को हटाना या कम करना कैसे सही ठहराया जा सकता है? हम पंजाब और सिखों की बात कर रहे हैं। आप पूछ सकते हैं कि जंग के हालात आखिर कहां हैं? पंजाब खामोश है और […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: फिलिस्तीन मसला और हमारी उदासीनता

गाजावासियों और खासतौर पर फिलिस्तीनियों के लिए भारतीयों के मन में सहानुभूति इतनी कम क्यों है? हिजबुल्ला प्रमुख हसन नसरल्ला के मारे जाने का समय छोड़ दें तो कोई खास विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं हो रहा है? नसरल्ला के मारे जाने पर भी ज्यादातर विरोध कश्मीर घाटी और लखनऊ के शिया बहुल इलाकों में ही […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: सेना और आस्था के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था

अगर आप वादा करें कि जवाब तलाशने में गूगल की मदद नहीं लेंगे तो मैं आपसे एक प्रश्न करूंगा। कृपया मुझे बताइए कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के संदर्भ में आपने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के अलावा और कौन सा नाम सुना है? पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र महा सभा से इतर अमेरिका से लेकर […]

आज का अखबार, लेख

लोकतंत्र में धैर्य और उसका महत्त्व: श्रीलंका, नेपाल, भारत ने अस्थिरता से कैसे पाई जीत, बांग्लादेश और पाकिस्तान क्यों रहे असफल

श्रीलंका में सीमित ढंग से कराए जा रहे चुनाव में वहां के लोग एक नए राष्ट्रपति का चुनाव कर रहे हैं और यह उपयुक्त अवसर है कि हम खुद को यह याद दिलाएं कि महज दो वर्ष पहले वहां जिस तरह की घटनाएं घटी थीं, उसके बाद वहां के लोगों ने कितने परिपक्व और शांतिपूर्ण […]

आज का अखबार, लेख

मणिपुर संकट: भाजपा की पहचान की राजनीति और पूर्वोत्तर में बढ़ती चुनौतियां

बीते एक दशक में जब-जब नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों का जिक्र आया है तो ‘ताकतवर’ शब्द बार-बार देखने को मिला है। प्रश्न यह है कि वर्तमान सरकार वाकई में ताकतवर है या कमजोर? मणिपुर इसकी शुरुआत करने के लिए एक बढ़िया जगह है। अगर आप मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थक हैं […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: रचनात्मक स्वतंत्रता का दुरुपयोग गलत

आश्वस्त रहिए यह नेटफ्लिक्स पर आई अनुभव सिन्हा की वेबसिरीज ‘आईसी-814 : द कंधार हाइजैक’ पर आधारित एक और आलेख नहीं है। बल्कि यह आलेख समकालीन इतिहास के किसी भी अध्याय या व्यक्तित्व पर आधारित कला, साहित्य, सिनेमा या टीवी सिरीज से जुड़ी भयावह या शारीरिक दृष्टि से खतरनाक चुनौती को लेकर व्यापक विमर्श को […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: बांग्लादेशी हिंदुओं की चिंता और भारत का रुख

यह ऐसा दौर है जहां छोटे-मोटे विवाद भी भू राजनीतिक बहसों के विवाद में बदल जाते हैं। पिछले दिनों नरेंद्र मोदी और जो बाइडन के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद अमेरिका और भारत के बयानों में जो अंतर है उसे हम इसी आलोक में देख सकते हैं और मजाक के रूप में खारिज […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: मोदी का तीसरा कार्यकाल और तीन ‘सी’ का जाल

सी से शुरू होने वाला एक शब्द सेंसस यानी जनगणना अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों का विषय बन गया है, जबकि इसे एक आम विषय होना चाहिए था। जैसा कि हम जानते हैं यह समय भी हमारे राजनीतिक इतिहास का आम समय नहीं है। पिछले दशक में कई पुराने नियम नए सिरे से तैयार हुए, कुछ नियम […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: पड़ोसी का सम्मान होगी सही रणनीति, बदले समीकरण लेंगे मोदी सरकार की परीक्षा

बांग्लादेश के घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत के पड़ोस को सुर्खियों में ला दिया है। साथ ही ऐसी स्थितियों से निपटने के मोदी सरकार के रिकॉर्ड पर भी सबकी नजर है। आज के हालात पर गहराई से नजर डालने के लिए हमें चौथाई सदी पहले जाना होगा, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौर की […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: सत्ताधारी पक्ष बचाव में और विपक्ष आक्रामक

हम अक्सर क्रिकेट से जुड़े हालात और रूपकों की मदद से राजनीतिक जटिलताओं को समझने का प्रयास करते हैं। इस समय ओलिंपिक खेल और यूरो कप चल रहे हैं इसलिए हॉकी और फुटबॉल का जिक्र अधिक उचित होगा। आइए देखते हैं कि कैसे हॉकी या फुटबॉल के खेल में आने वाले बदलाव हमारी राष्ट्रीय राजनीति […]

1 8 9 10 11 12 18
Advertisement
Advertisement