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लेखक : शेखर गुप्ता

आज का अखबार, लेख

‘कॉमिक्स’ पत्रकारिता से यह कैसा डर? जो सैको की किताब हटाना ‘प्रकाशन जगत का मजाक’

माल्टा मूल के अमेरिकी कार्टूनिस्ट जो सैको ने अनूठी ‘कॉमिक्स पत्रकारिता’ के बूते दुनिया भर में तो लोकप्रियता हासिल की ही है, अपने भारी-भरकम बायोडाटा में उन्होंने अपनी नवीनतम किताब ‘द वन्स ऐंड फ्यूचर रायट’ के रूप में एक और उपलब्धि जोड़ ली। हालांकि, पें​ग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने इस किताब का वितरण रोक दिया […]

आज का अखबार, लेख

सत्ता से नहीं, विचारधारा से कायम रहती है दलों की एकजुटता

व्यापक दलबदल के इस दौर में जब सभी दलबदल करने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर रुख कर रहे हैं तब तीन ऐसे राजनीतिक प्रश्न उठते हैं जो आपस में संबद्ध हैं। राजनीतिक दल क्यों टूटते हैं? लोग दलबदल क्यों करते हैं? क्या विचारधारा, सिद्धांत और यहां तक कि निष्ठा की कोई अहमियत है? […]

आज का अखबार, लेख

प्रधानमंत्री मोदी की अगली परीक्षा इतिहास को दोहराने की नहीं, बल्कि भविष्य को संवारने की चुनौती 

बीते सप्ताह यही बात खबरों में रही कि नरेंद्र मोदी ने निरंतर सबसे लंबी अवधि तक प्रधानमंत्री के रूप में पद संभालने का जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया। मोदी और नेहरू के बीच यह तुलना खूब होती रही है कि दरअसल किसने भारत के लिए क्या किया। अब वक्त आ गया है कि हम […]

आज का अखबार, लेख

‘ब्रांड इंडिया’ के लिए सबसे बड़ा खतरा: भारत के जर्जर और असफल होते शहर

एक सवाल मेरे मन में महीनों से पक रहा है: भारत को ब्रांड के रूप में सबसे अधिक क्षति पहुंचाने वाली बात कौन सी है। आर्थिक सुधारों की शुरुआत के तीन दशक बाद और भारत के विकसित देशों का चहेता बनने के बाद हालात बदल क्यों गए? निवेशक अपना पैसा निकाल कर भारत से बाहर […]

आज का अखबार, लेख

इतिहास की गूंज: साल 1973 और आज का भारत; तेल का झटका, महंगाई और मोदी सरकार के सामने बड़ी चुनौती

इतिहास खुद को दोहराता है, इस पर हम किस की बात मानें, कार्ल मार्क्स की या मार्क ट्वेन की? इस पर मतभेद हो सकता है। मार्क्स ने कहा था कि इतिहास खुद को दोहराता है, पहली बार त्रासदी के रूप में और दूसरी बार प्रहसन के रूप में। ट्वेन ने तर्क दिया कि इतिहास खुद […]

आज का अखबार, लेख

रणनीतिक शुरुआत पर सामरिक अंत हमेशा विनाशकारी, यही है पाकिस्तानी सेना की सबसे बड़ी कमजोरी

अब जबकि पाकिस्तान के साथ 87 घंटों तक चली झड़प की वर्षगांठ मनाने की होड़ खत्म हो चुकी है तो हम यह आकलन कर सकते हैं कि ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान ने भारत के साथ लड़ाई में किस तरह का व्यवहार किया है। रणनीतिक रूप से शानदार, लेकिन सामरिक रूप से विनाशकारी, इसके लिए यह […]

आज का अखबार, लेख

बदलता चुनावी मिजाज: क्या भारतीय राजनीति में अब मुस्लिम वोट अपनी अहमियत खो रहा है?

करीब सात वर्ष पहले मैंने आलेख लिखा था जिसका शीर्षक था: ‘क्या भारतीय मुस्लिम अहमियत रखते हैं?’ उस सवाल को दोबारा उठाने का यह सही समय है। हालिया विधान सभा चुनावों के नतीजे, खासकर पश्चिम बंगाल और असम के जहां मुस्लिम मतदाताओं की आबादी 30 फीसदी से ज्यादा है, दिखाते हैं कि यह मुद्दा अब […]

आज का अखबार, लेख

भाजपा, हिंदूकृत राष्ट्रवाद, बंगाल और एक्स फैक्टर

तीन गैर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में सत्ताधारी दलों को हार का सामना करना पड़ा। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के इन परिणामों के अलग-अलग सबक और नजरिये हैं। मैं पहले इन तीनों राज्यों के कुछ सामान्य पहलू सामने रखूंगा और फिर कुछ खास। सबसे पहले बात करते हैं पश्चिम बंगाल की। मैं […]

आज का अखबार, लेख

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरे: भविष्य के युद्धों के लिए भारत को अब पूर्वी मोर्चे पर ध्यान देने की जरूरत

अगले सप्ताह ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ होगी। ऐसे में हमें उन 87 घंटों के दौरान सैन्य प्रदर्शन की प्रेरक कहानियों की भरमार के लिए तैयार रहना चाहिए। परंतु हमें इसे रोकना चाहिए, और इसके पीछे कारण है। मेरा मानना है कि यह राष्ट्र हित में होगा कि हम अतीत को लेकर यूं जश्न के […]

आज का अखबार, लेख

बंगाल में दीवारों पर साफ लिखी इबारत: लेफ्ट की पकड़ ढीली, बीजेपी ने तेज की अपनी दावेदारी

पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान बिना कोलकाता से बाहर निकले आप दीवारों पर लिखी इबारतें कैसे पढ़ सकते हैं? मेरे साथ आइए, लगभग 600 किलोमीटर उत्तर में, सिलिगुड़ी कॉरिडोर तक चलिए। यह 60 किलोमीटर की संकरी पट्टी बंगाल के मैदानी हिस्से को उसके हिमालयी और दुआर (द्वार) जिलों से जोड़ती है। यहां, हम नक्सलबाड़ी […]

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