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लेखक : शेखर गुप्ता

आज का अखबार, लेख

ताकत, वक्त और लंबी तैयारी का खेल: भारत और यूरोप क्यों आ रहे हैं एक साथ?

यह एक ऐसा खेल है जिसे सीखने का प्रयास अब दुनिया का हर देश कर रहा है। वे कुछ नए सहयोगी तलाश रहे हैं या उन देशों में मूल्य देख रहे हैं जिनमें पहले उनकी रुचि न के बराबर थी।  आज की भू-राजनीति में असली खेल शक्ति जुटाने और अपने लिए समय हासिल करने का […]

आज का अखबार, लेख

प्रिय नरेंद्रभाई, क्या आप हमारे पूर्वी क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता को फिर से बहाल कर सकते हैं?

करीब एक दशक से भी अधिक पहले अगस्त 2013 में प्रकाशित एक आलेख में मैंने तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार बनने जा रहे नरेंद्र मोदी से एक अपील की थी। यह उसी अपील की दूसरी कड़ी है और इसकी एक वजह है। बांग्लादेश में एक सप्ताह […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

Budget 2026: आत्मविश्वास से भरपूर, मगर भविष्य की चिंताओं को लेकर सतर्क

Budget 2026 Analysis: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अब तक के पिछले नौ बजट में यह एक ऐसा बजट था जिसमें सबसे कम कम राजनीतिक चिंता दिखाई दी। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 में बजट में बिगड़े भू-राजनीतिक हालात की चिंता जरूर नजर आ रही है। आइए, हम हम इन विरोधाभासों को दूर करने का प्रयास […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

पाकिस्तान से ‘आजादी’ हासिल करने का वक्त: हर मोर्चे पर भारत से बढ़ता फासला

इस शीर्षक का उपयोग करने में कई जोखिम हैं। इस पर क्लिकबेट पत्रकारिता में लिप्त होने का आरोप लगने से लेकर मानसिक चिकित्सक को दिखाने तक की सलाह मिल सकती है। मैं विनती करता हूं, कृपया मेरी बात सुनें।  पाकिस्तान किसी भी क्षेत्र में भारत की बराबरी नहीं कर सकता है। चाहे वह सैन्य शक्ति […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

ट्रंप को धन्यवाद कि उनकी वजह से वापस आए सुधार

मेरे मन का एक हिस्सा यह कहना चाहता है: ‘धन्यवाद डॉनल्ड ट्रंप कि आपने भारत के साथ व्यापार समझौते को ठंडे बस्ते में डाले रखा।’ इसकी वजह यह है कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया होता तो हमें वे आर्थिक सुधार नहीं देखने को मिलते जो 1991 के बाद से नहीं हो सके थे। उदाहरण […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

1985–95 क्यों आज भी भारत का सबसे निर्णायक दशक माना जाता है

समाचार पत्रिका इंडिया टुडे 50 वर्ष की हो गई है। पत्रिका ने मुझसे 1985 से 1995 के दशक पर लिखने को कहा। यही वह समय था जब मैं वहां काम करता था। उसका परिणाम इस लेख के रूप में सामने आया। एक युवा और उभरते गणराज्य में यकीनन विभिन्न दशकों के बीच इस बात की […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

इस्लाम, सैन्य शक्ति और लोकतंत्र पर पुनर्विचार: वर्ष के इस आखिरी स्तंभ में गलती की स्वीकारोक्ति

कोई स्तंभकार खुद से हुई असहमतियों को कहां स्वीकार करे? या ऐसे विचार पर कहां पुनर्विचार करे जो समय की परीक्षा में विफल रहा हो, गलत साबित हुआ हो। यह इस वर्ष ‘राष्ट्र की बात’ स्तंभ का अंतिम आलेख है और ऐसा करने का अच्छा मौका है। क्या मैं हर वर्ष के आखिर में ऐसा […]

आज का अखबार, लेख

‘धुरंधर’ से बॉलीवुड में नई पीढ़ी की सॉफ्ट पावर का आगमन

यह मान लेना सही नहीं होगा कि इस आलेख को पढ़ने वाले हर व्यक्ति ने आदित्य धर की फिल्म धुरंधर और सिद्धार्थ आनंद की 2023 में आई फिल्म पठान, दोनों को देखा होगा। दूसरी फिल्म शायद हिंदी की अभी तक की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म है। पहली फिल्म भी तेजी से उस दिशा […]

आज का अखबार, लेख

इंडिगो का ‘असली’ अपराध क्या? अक्षमता ने कैसे सरकार को वापसी का मौका दिया

यह पूरी तरह अक्षमता और संवेदनहीनता का मामला है। यह इतनी बुरी बात है कि अगर पुराने सरकारी इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया का दौर होता तो कुछ लोगों की कुर्सियां चली जातीं। आर्थिक सुधारों के बाद भारत में बने शायद सबसे बड़े वैश्विक ब्रांड यानी इंडिगो से जुड़े हालिया घटनाक्रम को देखें तो तीन […]

आज का अखबार, लेख

असफल मार्शल सिद्धांत: पाकिस्तान की सबसे ‘रचनात्मक’ सैन्य तानाशाही

बीसवीं सदी के बाद से दुनिया ने कई वर्दी वाले तानाशाह देखे हैं। लेकिन किसी भी देश के सैन्य शासन में उतना नवाचार नहीं दिखा जितनी कि पाकिस्तान में नजर आया। ताजा मामला उस अधिसूचना से जुड़ा है जिसके जरिये पाकिस्तानी सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) को पांच साल की नियुक्ति प्रदान […]

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