भारत का लैब में बना हीरे का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि मांग में बढ़ोतरी हो रही है और विस्तार के बीच फंडिंग में भी तेजी आई है। कभी खास माने जाने वाले लैब में तैयार हीरे अब मुख्य रिटेल बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं और देश के सबसे बड़े ज्वैलरी रिटेलर टाइटन की एंट्री से इसे और भी बढ़ावा मिला है। इस कैटेगरी की कंपनियां भी उत्साहित हैं क्योंकि इससे वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
टाइटन के प्रवेश को इस श्रेणी के लिए एक अहम मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है। एलेव लैब डायमंड्स के मुख्य कार्याधिकारी प्रजय मगनलाल ने कहा, ‘बीयॉन के जरिये टाइटन की एंट्री इस कैटेगरी के लिए सकारात्मक है। इससे उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ेगी, बड़े पैमाने पर लैब-निर्मित हीरों को मान्यता मिलेगी और आखिरकार सभी उत्साहित कंपनियों को फायदा होगा।’
टाटा के स्वामित्व वाले ब्रांड टाइटन ने ‘बीयॉन’ के साथ लैब-निर्मित हीरा बाजार में प्रवेश किया है और 29 दिसंबर को मुंबई में अपना पहला एक्सक्लूसिव स्टोर खोला। इसके बाद इस फॉर्मेट को दिल्ली में भी शुरू किया जाएगा और यह उसके मौजूदा ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क, मिया और जोया से अलग काम करेगा।
जून में, इस सेक्टर में सबसे बड़ी फंडिंग में से एक गीवा को मिली, जो ‘हीर’ नाम से लैब-निर्मिता हीरा ब्रांड चलाती है), जिसने अपने सीरीज सी राउंड में 530 करोड़ रुपये जुटाए। इसका नेतृत्व ग्रोथ-स्टेज इन्वेस्टर क्रीएजिस ने किया, जिसमें प्रेमजी इन्वेस्ट, एडलवाइस डिस्कवरी फंड और अन्य ने भी हिस्सा लिया।
बेंगलूरु की गीवा के अभी 280 स्टोर हैं और मार्च 2026 तक उसकी योजना 340 से ज्यादा आउटलेट खोलने की है, जिसमें वित्त वर्ष 2026 में लगभग 45 फीसदी नए स्टोर जोड़े जाएंगे। अगले तीन साल में, यह ब्रांड पूरे भारत में टियर 1, 2 और 3 शहरों में लगभग 800-1,000 स्टोर तक विस्तार करने का इरादा रखता है।
सप्लाई चेन कंट्रोल को बेहतर बनाने और ज्यादा बिक्री में मदद के लिए जयपुर में एक नई निर्माण इकाई भी बन रही है। अग्रवाल का मानना है कि लैब में तैयार हीरे भारतीय आभूषण खपत में व्यावहारिक बदलाव ला सकते हैं, जिससे निवेश-आधारित खरीदारी से हटकर रोजाना पहनी जाने वाली फाइन ज्वैलरी की तरफ रुझान बढ़ेगा।
हैदराबाद स्थित एलेव लैब डायमंड्स ने अब तक लगभग 14 करोड़ रुपये जुटाए हैं और रिटेल और टेक-आधारित विस्तार के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये और जुटाने के लिए बातचीत कर रही है।