ट्रंप की बड़ी भूल? सद्दाम और गद्दाफी जैसी गलतियों से क्या अमेरिका ने नहीं सीखा कोई सबक
इजरायल और अमेरिका ने ईरान के साथ जंग की शुरुआत अत्यधिक नाटकीय अंदाज में की थी। यह बात भी उतनी ही नाटकीय है कि तथाकथित विजेता, खासकर अमेरिका अब रुक गया है। इसमें नाटकीयता का तत्व ईरान के शीर्ष धार्मिक, सैन्य, वैचारिक और खुफिया नेतृत्व की लक्षित हत्या में निहित था। अमेरिकी कार्रवाई में वर्तमान […]
दुनिया तेजी से बदल रही, अगले 5 साल भारत के लिए बड़ा मौका, बस अनुशासन बनाए रखना होगा
इस समय दुनिया तमाम युद्धों, बदलते और टूटते गठबंधनों और कठोर शक्ति की वापसी के बीच इस कदर उलझी हुई है कि यह भारत के लिए एक अवसर बन गया है। भारत को अपने भीतर झांककर देखना चाहिए। यह संकट एक और ऐसा अवसर है जिसे व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। दरअसल इन महाशक्तियों और […]
ऊर्जा सुरक्षा की कड़वी सच्चाई: चीन ने कोयले से बनाई गैस और हम बातों में उलझे रहे
भारत के आम परिवारों से लेकर सूक्ष्म, लघु और मझोले उपक्रमों तथा खासतौर पर उर्वरक उत्पादन को एलपीजी और प्राकृतिक गैस की कमी जिस प्रकार प्रभावित कर रही है, उसे देखते हुए यह जानने की मेरी उत्सुकता बढ़ गई कि भारत से पांच गुना सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वाला देश चीन इतना शांत कैसे नजर […]
सामने आईं कमजोरियां अब मंथन का है वक्त: आत्म-प्रशंसा छोड़ यथार्थ को पहचानें
अगर ‘पाकिस्तान से आजादी’ का नारा देने के सिर्फ दो महीने बाद मैं फिर उसी देश के बारे में लिख रहा हूं, तो यकीनन मुझे एक स्पष्टीकरण देना चाहिए। मेरे दो बिंदु इस प्रकार हैं। पहला, इस सप्ताह यह केवल आंशिक रूप से पाकिस्तान के बारे में है। जल्द ही हम वह बात करेंगे जो […]
विश्व गुरु बनने का हमारा-आपका भ्रम: वाकई भारत अपनी क्षमता से बढ़कर वैश्विक मंच पर प्रदर्शन कर रहा है?
बीते एक वर्ष में इस स्तंभ के अंतर्गत प्रकाशित दो आलेखों को एक सुविधाजनक शीर्षक दिया गया था, ‘धन्यवाद ट्रंप।’ ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी फटकार और अपमान ने आरामतलब हो चले भारत को झकझोर दिया। इससे हमारे देश को अपनी अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करने, रक्षा में निवेश करने, वैचारिक व्यापार विरोध को छोड़ने और […]
दो अरब लोगों की पसंद ‘स्वशासन’! क्यों भारतीय उपमहाद्वीप का लोकतंत्र दुनिया में सबसे जुदा है
हम चाहे जितना खोजें, हमें दुनिया में कहीं और ऐसा एक-दूसरे से जुड़ा क्षेत्र नहीं मिलेगा जहां दो अरब लोग निरंतर मतदान करते हों और लोकतंत्र की कद्र करते हों। अमेरिका, अफ्रीका में ऐसा कोई इलाका नहीं है। यूरोप की तो इतनी आबादी ही नहीं है और पूर्वी एशिया में चीन की 1.4 अरब की […]
ट्रंप का ‘अपमान युग’ और भारत की चुनौती: क्या मोदी की चुप्पी और विनम्रता ही सबसे बड़ा हथियार है?
अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को डुबाए जाने के बाद उभरे आक्रोश को एक सुर्खी से समझा जा सकता है। वह यह कि डॉनल्ड ट्रंप ने अपमान के युग की शुरुआत कर दी है। यह उनके मित्रों, सहयोगियों और साझेदारों पर विशेष रूप से लागू होता है। हमारे लिए यानी भारत में इसका […]
15 साल पहले की भविष्यवाणी सच हुई, खुद के बुने जाल में फंसा पाकिस्तान
एक टीकाकार की जिंदगी में सबसे बड़ा खतरा यही होता है कि उसका लिखा सब कुछ समीक्षा और तथ्यों की जांच के लिए हमेशा उपलब्ध रहता है। तथ्यों की गलती, व्याख्या की खामी या अपने किसी अनुमान में गलती करके आप भले ही बच निकलें लेकिन कभी न कभी आपको उसका सामना करना पड़ता है। […]
संप्रभुता, व्यावहारिकता और विकल्प: भारत के लिए जोखिम और समझदारी के बीच का संतुलन
अभी 2026 की शुरुआत ही हुई है और ‘संप्रभुता’ शब्द खूब चर्चा में आ चुका है। भारतीय राजनीति में यह चर्चा का विषय है। जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भारत के संदर्भ में इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं तब तो यह विस्फोटक ही हो जाता है। या तब भी जब उनके राजदूत सर्जियो गोर […]
ताकत, वक्त और लंबी तैयारी का खेल: भारत और यूरोप क्यों आ रहे हैं एक साथ?
यह एक ऐसा खेल है जिसे सीखने का प्रयास अब दुनिया का हर देश कर रहा है। वे कुछ नए सहयोगी तलाश रहे हैं या उन देशों में मूल्य देख रहे हैं जिनमें पहले उनकी रुचि न के बराबर थी। आज की भू-राजनीति में असली खेल शक्ति जुटाने और अपने लिए समय हासिल करने का […]









