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लेखक : शेखर गुप्ता

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

सामने आईं कमजोरियां अब मंथन का है वक्त: आत्म-प्रशंसा छोड़ यथार्थ को पहचानें

अगर ‘पाकिस्तान से आजादी’ का नारा देने के सिर्फ दो महीने बाद मैं फिर उसी देश के बारे में लिख रहा हूं, तो यकीनन मुझे एक स्पष्टीकरण देना चाहिए। मेरे दो बिंदु इस प्रकार हैं। पहला, इस सप्ताह यह केवल आंशिक रूप से पाकिस्तान के बारे में है। जल्द ही हम वह बात करेंगे जो […]

आज का अखबार, लेख

विश्व गुरु बनने का हमारा-आपका भ्रम: वाकई भारत अपनी क्षमता से बढ़कर वैश्विक मंच पर प्रदर्शन कर रहा है?

बीते एक वर्ष में इस स्तंभ के अंतर्गत प्रकाशित दो आलेखों को एक सुविधाजनक शीर्षक दिया गया था, ‘धन्यवाद ट्रंप।’ ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी फटकार और अपमान ने आरामतलब हो चले भारत को झकझोर दिया। इससे हमारे देश को अपनी अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करने, रक्षा में निवेश करने, वैचारिक व्यापार विरोध को छोड़ने और […]

आज का अखबार, लेख

दो अरब लोगों की पसंद ‘स्वशासन’! क्यों भारतीय उपमहाद्वीप का लोकतंत्र दुनिया में सबसे जुदा है

हम चाहे जितना खोजें,  हमें दुनिया में कहीं और ऐसा एक-दूसरे से जुड़ा क्षेत्र नहीं मिलेगा जहां दो अरब लोग निरंतर मतदान करते हों और लोकतंत्र की कद्र करते हों। अमेरिका, अफ्रीका में ऐसा कोई इलाका नहीं है। यूरोप की तो इतनी आबादी ही नहीं है और पूर्वी एशिया में चीन की 1.4 अरब की […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

ट्रंप का ‘अपमान युग’ और भारत की चुनौती: क्या मोदी की चुप्पी और विनम्रता ही सबसे बड़ा हथियार है?

अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को डुबाए जाने के बाद उभरे आक्रोश को एक सुर्खी से समझा जा सकता है। वह यह कि डॉनल्ड ट्रंप ने अपमान के युग की शुरुआत कर दी है। यह उनके मित्रों, सहयोगियों और साझेदारों पर विशेष रूप से लागू होता है। हमारे लिए यानी भारत में इसका […]

आज का अखबार, लेख

15 साल पहले की भविष्यवाणी सच हुई, खुद के बुने जाल में फंसा पाकिस्तान

एक टीकाकार की जिंदगी में सबसे बड़ा खतरा यही होता है कि उसका लिखा सब कुछ समीक्षा और तथ्यों की जांच के लिए हमेशा उपलब्ध रहता है। तथ्यों की गलती, व्याख्या की खामी या अपने किसी अनुमान में गलती करके आप भले ही बच निकलें लेकिन कभी न कभी आपको उसका सामना करना पड़ता है। […]

आज का अखबार, लेख

संप्रभुता, व्यावहारिकता और विकल्प: भारत के लिए जोखिम और समझदारी के बीच का संतुलन

अभी 2026 की शुरुआत ही हुई है और ‘संप्रभुता’ शब्द खूब चर्चा में आ चुका है। भारतीय राजनीति में यह चर्चा का विषय है। जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भारत के संदर्भ में इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं तब तो यह विस्फोटक ही हो जाता है। या तब भी जब उनके राजदूत सर्जियो गोर […]

आज का अखबार, लेख

ताकत, वक्त और लंबी तैयारी का खेल: भारत और यूरोप क्यों आ रहे हैं एक साथ?

यह एक ऐसा खेल है जिसे सीखने का प्रयास अब दुनिया का हर देश कर रहा है। वे कुछ नए सहयोगी तलाश रहे हैं या उन देशों में मूल्य देख रहे हैं जिनमें पहले उनकी रुचि न के बराबर थी।  आज की भू-राजनीति में असली खेल शक्ति जुटाने और अपने लिए समय हासिल करने का […]

आज का अखबार, लेख

प्रिय नरेंद्रभाई, क्या आप हमारे पूर्वी क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता को फिर से बहाल कर सकते हैं?

करीब एक दशक से भी अधिक पहले अगस्त 2013 में प्रकाशित एक आलेख में मैंने तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार बनने जा रहे नरेंद्र मोदी से एक अपील की थी। यह उसी अपील की दूसरी कड़ी है और इसकी एक वजह है। बांग्लादेश में एक सप्ताह […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

Budget 2026: आत्मविश्वास से भरपूर, मगर भविष्य की चिंताओं को लेकर सतर्क

Budget 2026 Analysis: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अब तक के पिछले नौ बजट में यह एक ऐसा बजट था जिसमें सबसे कम कम राजनीतिक चिंता दिखाई दी। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 में बजट में बिगड़े भू-राजनीतिक हालात की चिंता जरूर नजर आ रही है। आइए, हम हम इन विरोधाभासों को दूर करने का प्रयास […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

पाकिस्तान से ‘आजादी’ हासिल करने का वक्त: हर मोर्चे पर भारत से बढ़ता फासला

इस शीर्षक का उपयोग करने में कई जोखिम हैं। इस पर क्लिकबेट पत्रकारिता में लिप्त होने का आरोप लगने से लेकर मानसिक चिकित्सक को दिखाने तक की सलाह मिल सकती है। मैं विनती करता हूं, कृपया मेरी बात सुनें।  पाकिस्तान किसी भी क्षेत्र में भारत की बराबरी नहीं कर सकता है। चाहे वह सैन्य शक्ति […]

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