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लेखक : शेखर गुप्ता

आज का अखबार, लेख

शासन ढहते हैं कमजोर संस्थाओं की वजह से, न कि नेताओं या विचारधाराओं से

क्या सख्त या नरम सत्ता जैसा कुछ होता है? अगर हम कहें कि सत्ता केवल सत्ता होती है तो? उसमें यह कुव्वत होनी चाहिए कि वह एकजुट, स्थिर और व्यवस्थित बनी रहे। यह अंतिम पंक्ति मेरी नहीं है। किसकी है यह मैं आगे बताऊंगा। नेपाल को ही देख लें। जेनजी (युवाओं) ने राजधानी काठमांडू में […]

आज का अखबार, लेख

पंजाब के साथ खड़े होने का है वक्त, केंद्र की दूरी से बढ़ेगा अलगाव का खतरा

एक सितंबर को थ्यानचिन से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट करके अफगानिस्तान में आए भूकंप को लेकर दुख प्रकट किया। इस पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भी ट्वीट के जरिये प्रतिक्रिया दी। सिंह अकाल तख्त और तख्त श्री दमदमा साहिब गुरुद्वारा के पूर्व मुख्य पुजारी हैं। वह खुद को सिखों की […]

आज का अखबार, लेख

ओवल ऑफिस की तस्वीर से सबक: ट्रंप के दौर में यूरोप ने अपने हित कैसे सुरक्षित किए, भारत के लिए जरूरी सीख

थोड़ी देर के लिए उस तस्वीर पर गौर कीजिए जिसे आने वाली कई पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। यूरोप के बड़े देशों के नेता और वाेलोदीमिर जेलेंस्की, डॉनल्ड ट्रंप के सामने आज्ञाकारी स्कूली बच्चों की तरह खड़े हैं जबकि ट्रंप किसी शाही प्रधानाध्यापक की तरह नजर आ रहे हैं। इसे देखकर आपके मन में पहली […]

आज का अखबार, लेख

भारत बनाम पाक वायु सेना : पाकिस्तान गिनती में फंसा, भारत ने जोखिम उठाया और जीता

मैं इस पूरे मामले की शुरुआत एक पेचीदा प्रश्न से कर सकता हूं। वह प्रश्न यह है कि अगर युद्ध में एक पक्ष ने 13 विमान गंवा दिए और दूसरे पक्ष के 5 विमान नष्ट हो गए तो आखिर जीत किसकी हुई? भारत-पाकिस्तान के सभी सक्रिय युद्धों एवं झड़प की अवधि काफी कम रही है। […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप के दौर में भारत की कूटनीतिक रणनीति: सहयोग से टकराव और नई चुनौतियों तक का सफर

डॉनल्ड ट्रंप का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करना इन दिनों चलन में है। भारत में हम भी अपने स्तर पर ऐसा कर रहे हैं। बहरहाल हमें उन्हें दो साल तक और झेलने का तरीका तलाश करना होगा। किसी के पास ऐसी कोई दवा या इलाज नहीं है जिससे उन्हें ‘ठीक’ किया जा सके। भारत को ऐसे तरीके […]

आज का अखबार, लेख

इंदिरा का इंडिया और मोदी का भारत: दो राजनैतिक दौरों की तुलनात्मक पड़ताल

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के पद पर लगातार सबसे लंबी अवधि तक बने रहने वाले दूसरे नेता बन गए हैं। यह जानने का प्रयास करते हैं कि चार अहम मामलों में वह इंदिरा गांधी के साथ तुलना में कैसे नजर आते हैं? जून 2024 में जिस दिन नरेंद्र मोदी ने तीसरा कार्यकाल हासिल किया, यह उसी […]

आज का अखबार, लेख

ट्रम्प कूटनीति के रंग: दिखावटी, शोरगुल भरी और अमेरिका की सर्वोच्चता पर केंद्रित

अमेरिका को फिर से महान बनाने के नाम पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप दुनिया के उन हिस्सों में अमेरिका विरोध को नए सिरे से जन्म दे रहे हैं जहां वह सुषुप्तावस्था में पहुंच गया था। अब तक उनका तरीका यही रहा है,  सहयोगियों का सार्वजनिक रूप से मखौल उड़ाना और विरोधियों के साथ पींगें बढ़ाना। भारत […]

आज का अखबार, लेख

भागवत का ताजा बयान और मोदी के कदम का अनुमान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख यानी सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि 75 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद नेताओं को सेवानिवृत्त होने और युवा सहयोगियों के लिए स्थान बनाने के बारे में सोचना चाहिए। उनके इस बयान को इस तरह नहीं देखा जाना चाहिए कि उन्होंने कुछ गलत या अजीब कह दिया […]

आज का अखबार, लेख

कच्छ जंग के उदाहरण में छिपी भविष्य की आहट

यह सही है कि केवल भारत ही ऑपरेशन सिंदूर को अधूरा काम बता रहा है लेकिन दोनों देश इसे केवल एक झलक के रूप में देख रहे हैं या फिर अगले दौर की तैयारी के रूप में। कोई भी इसे अंतिम नतीजे तक पहुंची लड़ाई नहीं मान रहा है। उपमहाद्वीप का इतिहास बताता है कि […]

आज का अखबार, लेख

जोहरान ममदानी पर गर्व कर सकते हैं, लेकिन उनका ‘समाजवाद’ भारत में असफल रहा है

जोहरान ममदानी का विश्वास, गजा के लिए उनका समर्थन और मोदी तथा नेतन्याहू को लेकर उनकी नापसंदगी ऐसी वजह हैं जिनके चलते भारत में कई लोग उनके उभार से नाखुश हैं और इसे एक और ‘भारतीय’ की कामयाबी के रूप में नहीं देखते। जोहरान ममदानी केवल न्यूयॉर्क शहर या अमेरिकी राजनीति में ही नहीं बल्कि […]

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