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नए साल की रात ऑर्डर में बिरयानी और अंगूर सबसे आगेमैदान से अंतरिक्ष तक रही भारत की धाक, 2025 रहा गर्व और धैर्य का सालमुंबई–दिल्ली रूट पर एयर इंडिया ने इंडिगो को पीछे छोड़ाअगले साल 15 अगस्त से मुंबई–अहमदाबाद रूट पर दौड़ेगी देश की पहली बुलेट ट्रेनगलत जानकारी देकर बीमा बेचने की शिकायतें बढ़ीं, नियामक ने जताई चिंता1901 के बाद 2025 रहा देश का आठवां सबसे गर्म साल: IMDHealth Insurance के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी, पॉलिसियों की बिक्री घटीअब बैंक भी बन सकेंगे पेंशन फंड के प्रायोजक, PFRDA ने नए ढांचे को दी मंजूरीPM Internship Scheme का तीसरा चरण जनवरी में शुरू होने की उम्मीद, हो सकते हैं बदलाव2025 में UPI ने तोड़े सभी रिकॉर्ड, लेनदेन में 30% से ज्यादा उछाल

लेखक : शेखर गुप्ता

आज का अखबार, लेख

RSS, सत्ता और छिपी हुई कठिनाइयां

संघ इस समय ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक ताकतवर स्थिति में है। इसके साथ ही यह भी कहा जा सकता है कि वह कभी इतना अधिक कमजोर नहीं रहा। यह विरोधाभास कैसे दूर होगा? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख जिन्हें सरसंघचालक भी कहा जाता है, उनकी जीवनशैली ऐसी है कि वे सार्वजनिक रूप से […]

आज का अखबार, लेख

भारत के समक्ष रणनीतिक गुंजाइश और आत्मसंशय

इस वर्ष में भारत की बाह्य सुरक्षा के हालात पर एक व्यापक नजर डालें तो आप दो सहज लेकिन विरोधाभासी चयनों में से एक कर सकते हैं। पहला-अगर आप आशावादी और/अथवा मोदी समर्थक हैं तो आपको लग सकता है कि हालात कभी इतने सहज सामान्य नहीं थे। चीन के साथ सीमा पर दीर्घकालिक लेकिन ​स्थिर […]

आज का अखबार, लेख

रॉय दंपती, एनडीटीवी और समाचार कक्ष की गरिमा

बीते वर्ष की सबसे बड़ी खबर रही प्रणव रॉय और रा​धिका रॉय का एनडीटीवी का स्वामित्व छोड़ना और अदाणी समूह का इसका नया मालिक बनना। रॉय दंपती ने समूह से विदा लेते हुए जो ग​रिमामय पत्र लिखा है वह उनकी प​त्रकारिता के बारे में काफी कुछ बताता है। टेली​विजन समाचारों की आपाधापी वाली दुनिया में […]

आज का अखबार, लेख

आखिर राहुल गांधी क्या चाहते हैं?

क्या राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जो 107 दिनों के सफर के बाद दिल्ली पहुंची, वह एक राजनीतिक कदम के रूप में बुरी तरह नाकाम रही है? या इसने उनकी पार्टी के लिए अपेक्षित प्रभाव उत्पन्न किया है। लाल सिंह चड्ढा नुमा (फॉरेस्ट गम्प से माफी सहित) से क्या गांधी ने खुद को एक […]

आज का अखबार, लेख

जमीनी नहीं मनोवै​ज्ञानिक
कब्जे की फिराक में चीन

चीन के साथ विवाद का विषय जमीन नहीं है। लेकिन दुख की बात है कि भारत को बड़ी राजनीतिक, सामरिक और भूराजनीतिक बहस की जरूरत है, हमारा मौजूदा लोकतंत्र उसके लिए तैयार नहीं है।

लेख

विचारधारा पर भारी है मोदी का कद और उनकी छवि

चुनावों का एक और दौर समाप्त हो चुका है और हम भविष्य का अनुमान लगाने का प्रयास कर सकते हैं। शुरुआत उस सवाल से करते हैं जो हमने 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के तीन महीने बाद उठाया था: क्या आपने कोई ऐसा राजनेता देखा है जिसका मुखौटा उसके चेहरे […]

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