राष्ट्र की बात: पंजाब से ‘कोहरा’ दूर करने की दरकार
पंजाबियों को पता है कि विपरीत हालात से कैसे निपटा जाता है। उन्होंने विभाजन के बाद ऐसा किया और बाद में सन 1993 में समाप्त हुए आतंक और उग्रवाद के समय भी ऐसा ही किया। ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर प्रसारित छह कड़ियों वाले धारावाहिक ‘कोहरा’ का मुख्य किरदार एक ऐसा संवाद बोलता है जो पंजाब […]
राष्ट्र की बात: सीधे आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी
तीन ऐसी वजह हैं जिनसे मोदी और भाजपा के लिए आगामी लोकसभा चुनाव कठिन साबित हो सकते हैं: सुस्पष्ट धुरी वाला विपक्षी गठबंधन, भाजपा विरोधी मतों का एकजुट होना और बदली हुई भूराजनीतिक परिस्थितियां। आगामी आम चुनाव के पहले दौर के मतदान में बमुश्किल आठ महीने का समय बचा है और चुनाव प्रचार अभियान जोर […]
मणिपुर में कांग्रेस जैसी गलतियां दोहराती भाजपा
मणिपुर में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के अधीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की मोदी सरकार दोनों राज्य में फैली निरंतर अराजकता के कारण हमलों की जद में हैं। हालात ऐसे हैं कि मणिपुर को आसानी से ‘गृहयुद्ध’ का शिकार घोषित किया जा सकता है। पार्टी का बचाव करने […]
विचारधारा का अंत और उसका पुनर्जन्म
भाजपा ने अपनी विचारधारा की निरंतरता बनाए रखी है जबकि कांग्रेस में विभाजन देखने को मिला है। कांग्रेस एक आधुनिक विचारधारा को अपनाए तो हमें दो दलीय राजनीति की वापसी देखने को मिल सकती है पिछले दिनों महाराष्ट्र की राजनीति में जो नाटकीय परिवर्तन नजर आया वह हमारी राष्ट्रीय राजनीति के बारे में दिलचस्प झलक […]
मणिपुर में दुविधाग्रस्त नजर आ रही मोदी सरकार
‘भारत में शासन की दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण राज्य कौन सा है?’ इस प्रश्न का उत्तर आसान है। भारत का नक्शा उठाकर देखिए आपको पता चल जाएगा कि जवाब है मणिपुर। दो महीने से भी अधिक समय हो चुका है और इस सीमावर्ती राज्य में सशस्त्र समूहों और प्रतिद्वंद्वी भीड़ का शासन चल रहा है […]
फंस गए रे ओबामा
इस आलेख का शीर्षक किसी असावधानी में नहीं दिया गया है बल्कि यह 2010 में आई सुभाष कपूर की एक शानदार फिल्म का नाम है। अब तक आप समझ ही गए होंगे कि यहां संदर्भ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीखी आलोचना का है। यह आलोचना ठीक उसी […]
Manipur Violence: मणिपुर संकट को लेकर क्या हो प्रतिक्रिया ?
मणिपुर ऐसी अराजकता का शिकार हो गया जो देश के किसी अन्य हिस्से में दशकों से देखने को नहीं मिली है। अगर आप यह परखना चाहते हैं कि देश के सामने आज सबसे बड़ा तात्कालिक आंतरिक या बाहरी सुरक्षा खतरा क्या है तो कृपया उसकी तलाश टेलीविजन समाचार चैनलों पर न कीजिए। क्योंकि तब आप […]
राष्ट्र की बात: पुराने कुलीनों की जगह लेतीं नई प्रतिभाएं
भारत का पुराना कुलीन वर्ग अपना दबदबा गंवा चुका है। आज भारत का कारवां उन लाखों भारतीयों की बदौलत आगे बढ़ रहा है जिन्हें हमारे गिनेचुने कुलीन संस्थानों द्वारा तैयार नहीं किया गया। सर आइवन मेनेजेस (1959-2023) जिनका हाल ही में निधन हुआ है, वह एक शानदार व्यक्ति थे। बहुत संभव है कि मेरी उनसे […]
राष्ट्र की बात: कश्मीर मामले में पूरा हो अधूरा काम
भारत ने कश्मीर को लेकर अनुकूल स्थितियां बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है। परंतु अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने की चौथी वर्षगांठ करीब है और अभी भी जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस लौटाना शेष है। समाचारों की प्रकृति ही कुछ ऐसी है कि श्रीनगर में आयोजित जी20 कार्यक्रम (पर्यटन पर तीसरा […]
हमें मणिपुर की वाकई नहीं है परवाह
क्या एक राष्ट्र के रूप में हम अपने सुदूर पूर्वी राज्य मणिपुर की परवाह करते हैं? मणिपुर इस समय ऐसे संकट से गुजर रहा है जिसका सामना 1983-93 के दशक में पंजाब में हिंदू-सिख संबंधों में आई दरार और कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हिंसा एवं उनके पलायन के बाद किसी भारतीय राज्य […]








