facebookmetapixel
Advertisement
शेयर बाजार में धमाका: अगले हफ्ते ये 2 कंपनियां दे रही हैं 1 के बदले 10 शेयर, नोट कर लें तारीख!यूपी सरकार ने FY27 के लिए तय किया ₹71,278 करोड़ का भारी-भरकम आबकारी लक्ष्य, पहले तीन महीने में रिकॉर्ड कमाईअब उत्तर प्रदेश से सीधे विदेश जाएगा आम, हॉट वेपर ट्रीटमेंट की व्यवस्था राज्य में ही करने जा रही योगी सरकारउत्तर प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कोल इंडिया और UPRVUNL के बीच हुआ बड़ा समझौताफार्मा कंपनियों को सरकार से बड़ी राहत, अब दवा की वास्तविक ओवरचार्जिंग पर ही होगी कार्रवाईभीषण गर्मी और लू का असर: IEX पर 32% महंगी हुई बिजली, दाम बढ़कर ₹5.2 प्रति यूनिट पर पहुंचाFY27 में निर्यात का नया रिकॉर्ड बनाने को तैयार भारत, डंपिंग पर लगेगी लगाम; बढ़ेगा घरेलू विनिर्माण: गोयलतेल कंपनियां फिर मुनाफे में, घटा राजस्व नुकसान; पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्यों है सरकार और ब्रोकरेज में रारभारत में जापानी कंपनियों के GCC का दबदबा, 2030 तक अर्थव्यवस्था में दिखेगा बड़ा असर: रिपोर्टबंपर सेल के चलते भीषण गर्मी में भी चमकी FMCG कंपनियां, Q1 में दो अंकों की ग्रोथ की उम्मीद

लेखक : शेखर गुप्ता

आज का अखबार, लेख

मंदिर रूपी परीक्षा में कांग्रेस की विफलता

करीब चार दशकों से एक प्रेत कांग्रेस का पीछा कर रहा है और इस दौरान पार्टी लोकसभा में 414 सीट से घटकर 52 सीट पर आ चुकी है। हालांकि यह आंकड़ा 2014 में उसे मिली 44 सीट से अधिक है। राम मंदिर के निर्माण ने पार्टी को यह अवसर दिया था कि वह इससे पीछा […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: मोदी से मुकाबले का यह नहीं सही तरीका

PM Modi: सबसे पहले उन लोगों को गिनते हैं जिन पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस अदाणी मामले में सर्वोच्च न्यायालय में अपनी विफलता के लिए आम तौर पर संदेह कर रही होगी। परंतु विपक्ष तब तक विफल होता रहेगा जब तक वह इस सबसे महत्वपूर्ण सवाल का जवाब नहीं ढूंढ लेता कि मोदी सरकार के खिलाफ […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: डीडीए का एकाधिकार और बाजार का बदला

देश की राजनीतिक अर्थव्यवस्था के विकास को समझने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) का उदाहरण बहुत जानकारीपरक है। यह हमें बताता है कि क्या बदलाव हुआ है और क्या नहीं। यह बदलाव अच्छे के लिए है या बुरे के लिए। सन 1957 में अपनी स्थापना के बाद से काफी समय तक डीडीए सर्वशक्तिमान रहा। […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: भ्रामक है उत्तर-दक्षिण विभाजन की दलील

यह दलील बहुत कमजोर है कि भारत की राजनीति दो हिस्सों में बंट गई है। एक भाजपा को पसंद करने वाला उत्तर भारत और दूसरा उसे खारिज करने वाला दक्षिण भारत। गत सप्ताह चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद हमारी राजनीतिक बहस में उत्तर-दक्षिण की एक दिलचस्प नई बहस शामिल हो गई है। इस […]

आज का अखबार, लेख

पन्नू नहीं पंजाब को ध्यान में रखकर काम करे सरकार

यह सही है कि हालात अभी लगातार करवट ले रहे हैं लेकिन गुरपतवंत सिंह पन्नू के मामले के हवाले से भारत-अमेरिका रिश्तों के बारे में कई चीजें सुरक्षित ढंग से कही जा सकती हैं। पहला, दोनों पक्ष नहीं चाहते हैं कि यह बात उनके नियंत्रण से बाहर निकले या भावनात्मक रूप ग्रहण करे। यही वजह […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: विधानसभा चुनावों में खराब विचारों की वापसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनका दल मौजूदा विधानसभा चुनावों में उन बड़े विचारों का इस्तेमाल नहीं कर रहे जिन्हें वे आमतौर पर प्रयोग में लाते है। तकरीबन एक चौथाई सदी से हमारे राजनीतिक चक्र में एक खास रुझान देखने को मिल रहा है जहां तीन प्रमुख राज्यों में आम चुनाव से करीब छह महीने पहले […]

लेख

Opinion: भारतीय क्रिकेट का उभार और उससे निकले सबक

जब भारत ने इस विश्व कप में अपना अभियान शुरू किया तो उसके आलोचकों और प्रशंसकों दोनों की एक ही शिकायत थी कि उसने पूरे एक दशक से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की कोई ट्रॉफी नहीं जीती है। आखिरी बार 2013 में बर्मिंघम में चैंपियंस ट्रॉफी में जीत हासिल हुई थी। टीम हमेशा नॉकआउट दौर […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात : राष्ट्रवाद के साथ इस्लाम का संघर्ष

इस सप्ताह इस स्तंभ में कही जाने वाली बातें शायद गाजा में इजरायली सेना द्वारा की जा रही हिंसा की कसौटी पर खरी न उतरें लेकिन फिर भी इस मुद्दे को जल्द से जल्द उठाया जाना आवश्यक है। यह अक्टूबर 2020 में इसी स्तंभ में कही गयी बातों को भी आगे बढ़ाएगा। सबसे पहले गाजा […]

आज का अखबार, लेख

क्रिकेट विश्व कप, राष्ट्रवाद और क्लब की अहमियत

क्लब आधारित खेलों और पेशेवर नजरिये ने कठोर राष्ट्रवाद को नरम किया है। इसकी शुरुआत फुटबॉल से हुई और अब यह क्रिकेट में भी दिख रहा है। इन दिनों चल रहा क्रिकेट विश्व कप इसका उदाहरण है। अगर क्रिकेट पर यह स्तंभ लिखना हो तो उसके लिए भारत में चल रहे विश्व कप से अनुकूल […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात : इजरायल और सैन्य शक्ति की सीमाएं

Israel-Hamas War: दूसरे विश्वयुद्ध के बाद के आठ दशक और इजरायल (Israel) का अनुभव दिखाता है कि सैन्य शक्ति पर भरोसा चाहे जितना मजबूत हो लेकिन वह बड़े राजनीतिक और सामरिक लक्ष्य पाने में प्रभावी नहीं है। यदि हम ऐसा सवाल पूछते, ‘किसी देश की शक्ति का निर्माण करने और उसे सामने रखने में सेनाएं […]

1 11 12 13 14 15 18
Advertisement
Advertisement