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लेखक : शेखर गुप्ता

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: भ्रामक है उत्तर-दक्षिण विभाजन की दलील

यह दलील बहुत कमजोर है कि भारत की राजनीति दो हिस्सों में बंट गई है। एक भाजपा को पसंद करने वाला उत्तर भारत और दूसरा उसे खारिज करने वाला दक्षिण भारत। गत सप्ताह चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद हमारी राजनीतिक बहस में उत्तर-दक्षिण की एक दिलचस्प नई बहस शामिल हो गई है। इस […]

आज का अखबार, लेख

पन्नू नहीं पंजाब को ध्यान में रखकर काम करे सरकार

यह सही है कि हालात अभी लगातार करवट ले रहे हैं लेकिन गुरपतवंत सिंह पन्नू के मामले के हवाले से भारत-अमेरिका रिश्तों के बारे में कई चीजें सुरक्षित ढंग से कही जा सकती हैं। पहला, दोनों पक्ष नहीं चाहते हैं कि यह बात उनके नियंत्रण से बाहर निकले या भावनात्मक रूप ग्रहण करे। यही वजह […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: विधानसभा चुनावों में खराब विचारों की वापसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनका दल मौजूदा विधानसभा चुनावों में उन बड़े विचारों का इस्तेमाल नहीं कर रहे जिन्हें वे आमतौर पर प्रयोग में लाते है। तकरीबन एक चौथाई सदी से हमारे राजनीतिक चक्र में एक खास रुझान देखने को मिल रहा है जहां तीन प्रमुख राज्यों में आम चुनाव से करीब छह महीने पहले […]

लेख

Opinion: भारतीय क्रिकेट का उभार और उससे निकले सबक

जब भारत ने इस विश्व कप में अपना अभियान शुरू किया तो उसके आलोचकों और प्रशंसकों दोनों की एक ही शिकायत थी कि उसने पूरे एक दशक से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की कोई ट्रॉफी नहीं जीती है। आखिरी बार 2013 में बर्मिंघम में चैंपियंस ट्रॉफी में जीत हासिल हुई थी। टीम हमेशा नॉकआउट दौर […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात : राष्ट्रवाद के साथ इस्लाम का संघर्ष

इस सप्ताह इस स्तंभ में कही जाने वाली बातें शायद गाजा में इजरायली सेना द्वारा की जा रही हिंसा की कसौटी पर खरी न उतरें लेकिन फिर भी इस मुद्दे को जल्द से जल्द उठाया जाना आवश्यक है। यह अक्टूबर 2020 में इसी स्तंभ में कही गयी बातों को भी आगे बढ़ाएगा। सबसे पहले गाजा […]

आज का अखबार, लेख

क्रिकेट विश्व कप, राष्ट्रवाद और क्लब की अहमियत

क्लब आधारित खेलों और पेशेवर नजरिये ने कठोर राष्ट्रवाद को नरम किया है। इसकी शुरुआत फुटबॉल से हुई और अब यह क्रिकेट में भी दिख रहा है। इन दिनों चल रहा क्रिकेट विश्व कप इसका उदाहरण है। अगर क्रिकेट पर यह स्तंभ लिखना हो तो उसके लिए भारत में चल रहे विश्व कप से अनुकूल […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात : इजरायल और सैन्य शक्ति की सीमाएं

Israel-Hamas War: दूसरे विश्वयुद्ध के बाद के आठ दशक और इजरायल (Israel) का अनुभव दिखाता है कि सैन्य शक्ति पर भरोसा चाहे जितना मजबूत हो लेकिन वह बड़े राजनीतिक और सामरिक लक्ष्य पाने में प्रभावी नहीं है। यदि हम ऐसा सवाल पूछते, ‘किसी देश की शक्ति का निर्माण करने और उसे सामने रखने में सेनाएं […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: जुनून और समर्थकों के बिना कैसे होगा खेल?

यह सही है कि खेल में धर्म को लाना उचित नहीं है लेकिन सभी प्रतिस्पर्धी खेलों में जुनून होता है। मौजूदा क्रिकेट विश्व कप (World Cup 203) के दौरान सप्ताह भर पहले अहमदाबाद में भारत और पाकिस्तान के बीच जो मुकाबला हुआ उसे क्रिकेट की दृष्टि से एकदम ‘फुस’ कहा जा सकता है। परंतु दर्शकों […]

अंतरराष्ट्रीय, लेख

राष्ट्र की बात: गाजा में युद्ध से परे शांति की संभावना

जहां बहुत मामूली क्षमता से काम हो सकता था वहां इस कदर शक्ति प्रदर्शन करने का बेंजामिन नेतन्याहू का रवैया विवेकसम्मत नहीं है। मृत शिशुओं की तस्वीरों से पटी इस जंग में यह सवाल बेमानी हो जाएगा कि वास्तविक पी​ड़ित कौन है। हमास के हिंसक हमले के बाद उत्पन्न भूराजनीतिक संकट को एक सप्ताह का […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: राजनीतिक दृष्टि से प्रतिगामी है जाति जनगणना का विचार

कांशीराम अत्यधिक बुद्धिमान और राजनीतिक रूप से दृष्टा व्यक्ति थे। उनके विचारों ने भारत को पिछड़ा वर्ग का प्रधानमंत्री दिया। परंतु बिहार की शैली में जाति जनगणना शेष भारत के लिए बहुत बुरा विचार होगी। नरेंद्र मोदी को चुनौती देने वाले चाहे बंटे हुए हों, एकजुट हों, मजबूत हों या अत्यधिक मजबूत हों, वे अगले […]

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