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लेखक : शेखर गुप्ता

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: जुनून और समर्थकों के बिना कैसे होगा खेल?

यह सही है कि खेल में धर्म को लाना उचित नहीं है लेकिन सभी प्रतिस्पर्धी खेलों में जुनून होता है। मौजूदा क्रिकेट विश्व कप (World Cup 203) के दौरान सप्ताह भर पहले अहमदाबाद में भारत और पाकिस्तान के बीच जो मुकाबला हुआ उसे क्रिकेट की दृष्टि से एकदम ‘फुस’ कहा जा सकता है। परंतु दर्शकों […]

अंतरराष्ट्रीय, लेख

राष्ट्र की बात: गाजा में युद्ध से परे शांति की संभावना

जहां बहुत मामूली क्षमता से काम हो सकता था वहां इस कदर शक्ति प्रदर्शन करने का बेंजामिन नेतन्याहू का रवैया विवेकसम्मत नहीं है। मृत शिशुओं की तस्वीरों से पटी इस जंग में यह सवाल बेमानी हो जाएगा कि वास्तविक पी​ड़ित कौन है। हमास के हिंसक हमले के बाद उत्पन्न भूराजनीतिक संकट को एक सप्ताह का […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: राजनीतिक दृष्टि से प्रतिगामी है जाति जनगणना का विचार

कांशीराम अत्यधिक बुद्धिमान और राजनीतिक रूप से दृष्टा व्यक्ति थे। उनके विचारों ने भारत को पिछड़ा वर्ग का प्रधानमंत्री दिया। परंतु बिहार की शैली में जाति जनगणना शेष भारत के लिए बहुत बुरा विचार होगी। नरेंद्र मोदी को चुनौती देने वाले चाहे बंटे हुए हों, एकजुट हों, मजबूत हों या अत्यधिक मजबूत हों, वे अगले […]

आज का अखबार, लेख

पंजाब में लड़ाई छेड़ने की नहीं है वजह

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप लगाए दो सप्ताह बीत चुके हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से अगला कदम क्या होना चाहिए? इसे दो हिस्सों में बांट कर देखते हैं। एक तरीका तो यह है कि मोदी सरकार मौजूदा रुख बरकरार रखे। वहीं दूसरी […]

आज का अखबार, लेख

आखिर क्या चाहते हैं भारतीय सिख?

अगर मुझे 10 मिनट के लिए कोई दैवीय शक्ति मिल जाती और मैं आपसे अपने पीछे कुछ दोहराने को कह पाता तो मैं आपसे तीन बार यह दोहराने को कहता: खालिस्तान आंदोलन, स्वप्न या विचार जैसी कोई चीज नहीं है। भारत में तो बिल्कुल नहीं। कनाडा के ब्रैम्पटन में जो होता है वह कनाडावासियों की […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: विपक्षी गठबंधन ‘I.N.D.I.A’ की नाराजगी

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A) ने 14 प्रमुख समाचार प्रस्तोताओं पर ‘पक्षपाती और नफरती’ होने का आरोप लगाते हुए उनके बहिष्कार का जो निर्णय लिया है क्या यह एक शानदार और चुनौतीपूर्ण कदम है? या फिर यह एक ऐसा गलत कदम है जिसका बचाव नहीं किया जा सकता, नाराजगी में बेवजह उठाया गया एक कदम? लंबी […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: विदेश नीति से जुड़े मसले पर एकजुट परिदृश्य

भारत जब ऋ​षि सुनक से लेकर शेख हसीना वाजेद और जो बाइडन तथा तमाम अन्य वैश्विक नेताओं तथा अनेक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनि​धिमंडलों का स्वागत कर रहा था (भारत के लिए यह एक अभूतपूर्व क्षण) तब दो सु​र्खियां बनने लायक बातें मुख्य विपक्षी दल की ओर से सामने आईं। पहली बात, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का द […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ भाजपा का ‘ब्रह्मास्त्र’

मोदी सरकार ने अचानक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक राष्ट्र, एक चुनाव) का जो शगूफा छेड़ दिया है उसे चुनाव से पहले लोगों का ध्यान भटकाने की बड़ी चाल, या ‘ट्रायल बलून’ आदि कुछ भी नाम दे सकते हैं लेकिन यह समझना महत्त्वपूर्ण है कि यह विचार आया कहां से। लेख में आगे ‘वन नेशन, […]

आज का अखबार, लेख

विकासशील देशों का नेतृत्व कल्पना और भुलावा

इन दिनों नेहरू को नकारना या उनसे पल्ला झाड़ना चाहे जितना चलन में हो लेकिन उन्होंने विदेश नीति में जो बातें शामिल की थीं उनका एक हिस्सा नरेंद्र मोदी सरकार में भी जस का तस है। इस दलील को स्थापित करने के लिए हम यह गिनती कर सकते हैं कि हाल के दिनों में मोदी […]

आज का अखबार, लेख

राष्ट्र की बात: पंजाब से ‘कोहरा’ दूर करने की दरकार

पंजाबियों को पता है कि विपरीत हालात से कैसे निपटा जाता है। उन्होंने विभाजन के बाद ऐसा किया और बाद में सन 1993 में समाप्त हुए आतंक और उग्रवाद के समय भी ऐसा ही किया। ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर प्रसारित छह कड़ियों वाले धारावाहिक ‘कोहरा’ का मुख्य किरदार एक ऐसा संवाद बोलता है जो पंजाब […]

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