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स्मोकिंग करने वाले दें ध्यान! 1 फरवरी से महंगी होगी सिगरेट, जानें अब कितना ज्यादा पैसा देना होगा

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नई एक्साइज ड्यूटी और GST के तहत सिगरेट की लंबाई और प्रकार के अनुसार टैक्स तय किया गया है, जिससे धूम्रपान करने वालों पर कीमतों का असर स्पष्ट रूप से बढ़ेगा

Last Updated- January 02, 2026 | 5:46 PM IST
Cigarette
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

1 फरवरी 2026 से सिगरेट पीने वालों की जेब पर भारी बोझ पड़ने वाला है। सरकार ने सिगरेट पर फिर से खास सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगा दी है, जो GST के ऊपर अलग से लगेगी। अब टोबैको प्रोडक्ट्स की टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ गया है। एक्साइज ड्यूटी अब सिगरेट की लंबाई और प्रकार के हिसाब से तय होगी।

लंबाई और प्रकार के हिसाब से अब एक्साइज ड्यूटी

नई व्यवस्था में एक्साइज ड्यूटी प्रति हजार सिगरेट पर लगेगी। रेट फिल्टर्ड और नॉन-फिल्टर्ड सिगरेट के साथ-साथ उनकी साइज पर निर्भर करेगा:

  • 65 mm से छोटी नॉन-फिल्टर्ड सिगरेट: 2,050 रुपये प्रति हजार (यानी एक सिगरेट पर 2.05 रुपये)
  • 65 mm से छोटी फिल्टर्ड सिगरेट: 2,100 रुपये प्रति हजार (एक सिगरेट पर 2.10 रुपये)
  • 65-70 mm की फिल्टर्ड सिगरेट: 3,600 से 4,000 रुपये प्रति हजार (एक सिगरेट पर 3.60 से 4 रुपये)
  • 70-75 mm की फिल्टर्ड सिगरेट: 5,400 रुपये प्रति हजार (एक सिगरेट पर 5.40 रुपये)
  • 75 mm से लंबी या प्रीमियम सिगरेट: 8,500 रुपये तक प्रति हजार (एक सिगरेट पर 8.50 रुपये या उससे ज्यादा)

तुलना के लिए बता दें कि 2017 में GST आने के बाद ज्यादातर सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी महज नाममात्र की थी, जो 5 रुपये प्रति हजार थी। सिर्फ 75 mm से लंबी सिगरेट पर 10 रुपये लगते थे।

Also Read: 8th Pay Commission, EPF, टैक्स से लेकर बैंकिंग तक: 2026 में आपके लिए क्या-क्या बदलने वाला है?

सिगरेट पर टैक्स: धूम्रपान करने वालों और कीमतों पर असर

इस एक्साइज बढ़ोतरी से अब सिगरेट की लंबाई कीमत तय करने में बड़ा रोल निभाएगी। छोटी और आम सिगरेट पर बढ़ोतरी कम होगी, जबकि लंबी और महंगी ब्रांड वाली सिगरेट पर टैक्स का पूरा झटका लगेगा। अब दुकान पर सिगरेट का दाम सिर्फ ब्रांड पर नहीं, बल्कि स्टिक की साइज पर भी निर्भर करेगा।

टैक्स का बोझ और लोगों स्वास्थ्य

नई एक्साइज ड्यूटी GST के अलावा लगेगी। GST अलग-अलग प्रोडक्ट पर 18 फीसदी से 40 फीसदी तक होता है। हालांकि,  सरकार ने टोबैको पर लगने वाला GST कंपन्सेशन सेस हटा लिया है, लेकिन कुल टैक्स बोझ अब भी खुदरा कीमत का करीब 53 फीसदी ही बैठता है। ये विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुझाए 75 फीसदी के मानक से काफी कम है।

वित्त मंत्रालय का कहना है कि नई टैक्स व्यवस्था का मकसद टैक्स चोरी रोकना, सरकारी खजाने को मजबूत करना और भारत की टोबैको टैक्स नीति को वैश्विक जन-स्वास्थ्य मानकों के करीब लाना है।

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First Published - January 2, 2026 | 5:46 PM IST

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