भारतीय विमानन कंपनियों द्वारा वर्ष 2026 में देश में अपने संपूर्ण बेड़े में लगभग 50-55 विमानों को शामिल करने का अनुमान है। 2025 में कुल शामिल विमानों की शुद्ध संख्या 35 थी। इनमें कुल 79 विमान जोड़े गए और 44 वापस किए गए थे, जो 2024 से भी बहुत कम है।
प्लेनस्पॉटर डॉटकॉम के अनुसार, देश में विमानों की कुल संख्या 826 कुल मिलाकर आंकी गई थी – जिसमें 2025 में परिचालन विमान 723 थे। लगभग 103 विमान स्पेयर पार्ट्स की कमी या एयर इंडिया की तरह विमानों के अपग्रेडेशन और नवीनीकरण के लिए जाने के कारण परिचालन से बाहर थे। हालांकि, अगर सब कुछ ठीक रहा (जैसे बोइंग अपना प्रोडक्शन बेहतर करती है और इस साल तीन नई एयरलाइंस को परिचालन शुरू करने की इजाजत मिल जाती है) तो 2026 तक बेड़े की कुल क्षमता लगभग 900 तक पहुंच सकती है। एयर इंडिया और इंडिगो के लिए 2027 और 2028 में बड़े पैमाने पर विमानों की डिलिवरी के साथ भारत 1,000 विमान के आंकड़े के करीब पहुंच सकता है।
इससे भारत भी अमेरिका और चीन जैसे देशों की जमात में शामिल हो जाएगा जो पहले से ही इस तरह के आंकड़े को पार कर चुके हैं।
साथही, 2026 में परिचालन से बाहर रहे कई विमानों को भी बेड़े में जगह मिल सकती है, जिससे चालू विमानों की संख्या बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इंडिगो के 49 विमानों में से आधे भी प्रैट एंड व्हिटनी के नए इंजनों के साथ उड़ना शुरू कर दें, तो स्थिति अलग हो सकती है।
इसी तरह, एयर इंडिया के कई रीफर्बिश्ड विमानों के भी बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है, जिससे एयरलाइंस को काफी बढ़ावा मिलेगा।
बेशक, एयर इंडिया अपनी कुल क्षमता में कोई बड़ा बदलाव नहीं देख रही है। लेकिन प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन का कहना है कि एयरलाइन के पास इस साल 26 विमान होंगे, जिनमें से 20 नैरो बॉडी वाले होंगे।
लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बेड़े में शामिल विमानों की संख्या लगभग स्थिर रहेगी क्योंकि यह लीज पर लिए गए बोइंग 777 को वापस कर रही है और उनमें से कुछ को रिटायर कर रही है।
विमानन विश्लेषकों के अनुसार नई एयरलाइन अकासा (जिसके पास पहले से ही 31 विमान हैं) द्वारा हर महीने एक से दो विमान शामिल करने की उम्मीद है।