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भारत में ऑटो पार्ट्स उद्योग ने बढ़ाया कदम, EV और प्रीमियम वाहनों के लिए क्षमता विस्तार तेज

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स्थानीयकरण की पहल और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के कारण निवेश में तेजी आ रही है

Last Updated- January 02, 2026 | 11:14 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत में वाहनों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियां क्षमता विस्तार के एक नए दौर में प्रवेश कर रही हैं। इसकी वजह महज बिक्री वृद्धि नहीं बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), सुरक्षा प्रणालियों और प्रति वाहन ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स कंटेंट की ओर ढांचागत बदलाव के कारण है।  

स्थानीयकरण की पहल और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के कारण निवेश में तेजी आ रही है। यह तब है जब वैश्विक कारोबार में अनिश्चितता के बीच निर्यात कारोबारी सतर्क बने हुए हैं। देवेन चोकसी रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार वाहन कलपुर्जा उद्योग अधिक वाहन उत्पादन, बढ़ते निर्यात और प्रीमियमाइजेशन तथा इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती पैठ के कारण मजबूत वृद्धि की उम्मीद कर रहा है।  

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीयकरण पहल और पीएलआई के कारण हो रहे निवेश के बल पर ईवी से जुड़े कलपुर्जों और सुरक्षा प्रणालियों की मजबूत मांग बरकरार है। कंपनियां क्षमताएं बढ़ाने और मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) जरूरतों के साथ तालमेल बिठाने के लिए तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित हो रही हैं।

यह बदलाव प्रमुख सहायक पुर्जा निर्माताओं में देखा जा रहा है, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, डाई-कास्टिंग, अलॉय व्हील्स और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों से जुड़ी कंपनियों में जिन्हें ईवी अपनाने, प्रीमियम वाहनों और सख्त नियामकीय नियमों से सीधा फायदा होता है। इस रुझान की एक प्रमुख लाभार्थी के रूप में मिंडा कॉरपोरेशन उभरी है।

देवेन चोकसी रिसर्च का कहना है कि कंपनी रणनीतिक रूप से अपने डाई कास्टिंग बिजनेस को आगे बढ़ा रही है और क्षमता विस्तार कर रही है और ईवी पावरट्रेन हाउसिंग और ज्यादा -टन भार वाले कलपुर्जों पर ध्यान बढ़ा रही है। एक और बड़ी कंपनी यूनो मिंडा, अलॉय व्हील्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) में लगातार तेजी से आगे बढ़ रही है।

देवेन चोकसी रिसर्च का कहना है कि कंपनी बढ़ती ग्राहक मांग और दोपहिया और चार पहिया वाहन प्लेटफॉर्म पर बेहतर उत्पाद मिश्रण के सपोर्ट से अपने अलॉय व्हील और कास्टिंग परिचालन को बढ़ा रही है। साथ ही आने वाले ओईएम प्रोग्राम के लिए मशीनिंग कैपेसिटी का भी विस्तार कर रही है। प्रबंधन की कमेंट्री भी इस आउटलुक को मजबूत करती है। 2025-26 की दूसरी तिमाही की अर्निंग्स कॉल में यूनो मिंडा ग्रुप के सीएफओ सुनील बोहरा ने कहा कि कंपनी ओईएम की विस्तार योजनाओं और सेक्टर की दीर्घावधि वृद्धि को देखते हुए निवेश कर रही है।

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First Published - January 2, 2026 | 10:14 PM IST

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