New tax regime vs ELSS: अगर आपने न्यू टैक्स रिजीम को अपनाया है, तो आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि क्या ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) फंड अब भी निवेश के लिहाज से फायदेमंद हैं? खासकर तब, जब इनमें अब धारा 80C के तहत टैक्स छूट नहीं मिलती। पुराने टैक्स सिस्टम में इन फंड्स में 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर धारा 80C के तहत टैक्स कटौती का फायदा मिलता था। साथ ही इन योजनाओं में तीन साल का लॉक-इन पीरियड भी होता है। सीधी बात यह है कि नए टैक्स सिस्टम का ELSS के रिटर्न पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन इनमें निवेश करने की वजह अब बदल गई है।
ELSS फंड्स का प्रदर्शन अब भी मजबूत बना हुआ है। वैल्यू रिसर्च की एक स्टडी के मुताबिक, लंबी अवधि में ELSS फंड्स ने फ्लेक्सी-कैप फंड्स और व्यापक बाजार के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है।
जनवरी 2018 से फरवरी 2026 के दौरान ELSS फंड्स ने औसतन करीब 15.3% का पांच साल का रोलिंग रिटर्न दिया। यह रिटर्न फ्लेक्सी-कैप फंड्स के बराबर रहा और Nifty 500 TRI के 14.8% से बेहतर साबित हुआ।
इन फंड्स ने पांच साल की आधे से ज्यादा अवधियों में फ्लेक्सी-कैप फंड्स को पीछे छोड़ा है। वहीं करीब दो-तिहाई अवधियों में इन्होंने अपने बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न दिया है।
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इससे साफ होता है कि टैक्स नियमों में बदलाव का म्युचुअल फंड के रिटर्न पर सीधा असर नहीं पड़ता। फंड का प्रदर्शन बाजार की चाल और फंड मैनेजमेंट के फैसलों पर निर्भर करता है, न कि टैक्स सिस्टम पर।
वैल्यू रिसर्च के अमेया सत्यवादी ने एक नोट में कहा, “ये आंकड़े दिखाते हैं कि ELSS फंड्स मजबूत स्थिति में रहे हैं। इन्होंने फ्लेक्सी-कैप फंड्स के लगभग बराबर रिटर्न दिया, साथ ही अपने बेंचमार्क को भी अच्छे अंतर से पीछे छोड़ा। इसके अलावा, पांच साल की कुल अवधियों में से आधे से कुछ ज्यादा समय में इस कैटेगरी ने फ्लेक्सी-कैप फंड्स से बेहतर प्रदर्शन किया और ऐसी करीब दो-तिहाई अवधियों में Nifty 500 TRI को भी पछाड़ा।”
बदलाव असल में निवेश की वजह में आया है। पुराने टैक्स सिस्टम में ELSS फंड्स पर धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती थी। इसलिए निवेशक इन्हें मुख्य रूप से टैक्स सेविंग और इक्विटी निवेश– दोनों मकसद से चुनते थे।
नए टैक्स सिस्टम में टैक्स छूट का फायदा नहीं मिलता। ऐसे में ELSS अब तीन साल के लॉक-इन के साथ एक सामान्य डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड जैसा बन जाता है। यह लॉक-इन उन निवेशकों के लिए मायने रख सकता है जो निवेश में ज्यादा लचीलापन चाहते हैं।
ELSS फंड्स अब भी आपके लिए सही विकल्प हो सकते हैं अगर:
दरअसल, मूल रूप से ELSS अब भी एक इक्विटी म्युचुअल फंड कैटेगरी है, जिसने लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न दिए हैं।
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अगर आप नए टैक्स सिस्टम में हैं, तो आप इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं:
ये विकल्प बाजार में समान निवेश का मौका देते हैं और साथ ही ज्यादा लिक्विडिटी भी प्रदान करते हैं।
वैल्यू रिसर्च ने कहा, “तो क्या नए टैक्स सिस्टम में निवेश करने वालों को अब भी ELSS फंड्स पर विचार करना चाहिए? भले ही इस कैटेगरी का प्रदर्शन फ्लेक्सी-कैप फंड्स के बराबर रहा है, लेकिन इसमें लॉक-इन पीरियड है, जो ज्यादा लिक्विडिटी चाहने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता। हालांकि, अगर आपने पुराना टैक्स सिस्टम चुना है और तीन साल के लॉक-इन से सहज हैं, तो ELSS फंड्स अब भी एक अच्छा विकल्प हैं।”
न्यू टैक्स रिजीम ने ELSS फंड्स के प्रदर्शन को प्रभावित नहीं किया है, लेकिन इनमें निवेश करने का टैक्स फायदा जरूर कम कर दिया है।
आज ज्यादातर निवेशकों के लिए फैसला काफी सीधा है:
अगर आप पुराने टैक्स सिस्टम में हैं, तो ELSS अब भी उपयोगी हो सकता है।
अगर आप नए टैक्स सिस्टम में हैं, तो इक्विटी फंड का चुनाव अपने वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर करें, न कि टैक्स बचत के लिए।
अब ELSS को टैक्स बचाने की मजबूरी नहीं, बल्कि एक निवेश विकल्प के रूप में देखें।