प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
अभिषेक कुमारसोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) और फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) में खुदरा निवेशकों की रुचि में जबरदस्त उछाल देखी जा रही है। ऐसा पहले शायद ही किसी म्युचुअल फंड (एमएफ) श्रेणी में हुआ हो।
जनवरी 2025 में कीमती धातुओं के ईटीएफ में कुल मिलाकर 28 लाख निवेशक खाते या फोलियो जोड़े गए, जो पिछले महीने उद्योग स्तर पर कुल फोलियो वृद्धि का 55 फीसदी है। पिछले महीने की वृद्धि 2025 में देखी गई औसत मासिक वृद्धि से पांच गुना से भी ज्यादा है। इसकी तुलना में इक्विटी योजनाओं में महज 11 लाख खाते जोड़े गए।
फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) के माध्यम से भी निवेशकों की सहभागिता बढ़ रही है। एफओएफ में नए खातों की संख्या में हाल के महीनों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। एफओएफ में इक्विटी, डेट और कमोडिटी समेत सभी योजनाएं शामिल हैं। यह वृद्धि सोने और चांदी के ईटीएफ में दिखे इजाफे के अनुरूप है। जनवरी में एफओएफ में 22 लाख खाते जोड़े गए।
उद्योग सोने और चांदी के ईटीएफ के लिए अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध नहीं कराता है। दिलचस्प यह है कि चांदी के ईटीएफ में नए खातों की संख्या सोने के ईटीएफ की तुलना में ज्यादा रही, जबकि सोना काफी बड़ी फंड श्रेणी है। जनवरी में चांदी के ईटीएफ में 16 लाख नए खाते जुड़े, जबकि सोने के ईटीएफ में 12 लाख खातों का इजाफा हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार जहां कीमती धातुओं के भावों में तेज उछाल नए निवेशकों को सोने और चांदी की योजनाओं की ओर आकर्षित कर रही है, वहीं चांदी में अपेक्षाकृत ज्यादा उतार-चढ़ाव भी रफ्तार का फायदा उठाने वाले निवेशकों को लुभा रही है और चांदी के ईटीएफ में अल्पकालिक कारोबारी गतिविधियों में इजाफे को बढ़ावा दे रही है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में वरिष्ठ निवेश रणनीतिकार श्रीराम बीकेआर ने कहा, सोने की तुलना में चांदी में संरचनात्मक उतारचढ़ाव ज्यादा होने के कारण इसमें निवेशकों की संख्या ज्यादा होती है। इसकी कीमतों में तीव्र उतार-चढ़ाव निवेशकों को अल्पकालिक मौका उठाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। सोने के ईटीएफ की तुलना में चांदी के ईटीएफ फोलियो में तेज वृद्धि से भी यह बात जाहिर होती है।
सिस्टमैटिक्स प्राइवेट वेल्थ के संयुक्त एमडी और सीईओ पार्थ सेन गुप्ता ने चांदी के ईटीएफ पोर्टफोलियो में उछाल का यही कारण बताया। उन्होंने कहा, चांदी के ईटीएफ में यह तेजी आंशिक रूप से अल्पकालिक लाभ की उम्मीदों से लग रही है। 170 फीसदी सालाना लाभ स्वाभाविक रूप से उन मोमेंटम ट्रेडर्स को ललचाता है, जो तुंरत फायदा उठाने की तलाश में रहते हैं, खासकर तब जबकि हाल के समय में गिरावट मामूली रही हो।
म्युचुअल फंड श्रेणी में खातों में वृद्धि की इसी तरह की रफ्तार 2024 की पहली छमाही में तब देखी गई थी, जब थीमेटिक और सेक्टोरल फंडों में रिकॉर्ड संख्या में खाते जोड़े गए थे। लेकिन सोने और चांदी के ईटीएफ के विपरीत थीमेटिक फंडों में वृद्धि मुख्य रूप से कई नए फंडों की पेशकश के कारण हुई थी।
सोने और चांदी में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी इनमें आ रहे निवेश में भी साफ दिखाई देती है। पिछले महीने पहली बार गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश, ऐक्टिव इक्विटी म्युचुअल फंड योजनाओं के कुल निवेश से ज्यादा रहा। जनवरी में गोल्ड ईटीएफ में 24,040 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया जबकि सिल्वर ईटीएफ में करीब 9,500 करोड़ रुपये का। ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में निवेश में कमी जारी रही और शुद्ध निवेश सात महीनों के निचले स्तर 24,028 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।