विदेश मंत्री एस जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने दोनों देशों के बीच ‘सहयोग को गहरा बनाने’ और ‘साझेदारी के अवसरों’ पर रविवार को बातचीत की। यह चर्चा उस समय हुई जब दोनों देश अगले महीने के आरंभ में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा की तैयारी में लगे हुए हैं। जयशंकर और आनंद की मुलाकात म्युनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान हुई। यह सितंबर 2025 के बाद उनकी पांचवीं मुलाकात है। इससे पता चलता है कि भारत और कनाडा के द्विपक्षीय रिश्ते कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक बार फिर पटरी पर आ रहे हैं।
एक संबंधित घटनाक्रम में, भारतीय अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि भारत और कनाडा के वार्ताकार दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर औपचारिक वार्ता शुरू होने से पहले बातचीत के खाके को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। म्युनिख में, जयशंकर और आनंद ने ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर चर्चा की। भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।
कार्नी की भारत यात्रा के दौरान, दोनों पक्ष आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, दुर्लभ खनिज, ऊर्जा और 2.8 अरब कनाडाई डॉलर मूल्य के यूरेनियम आपूर्ति के दस वर्षीय समझौते पर हस्ताक्षर भी कर सकते हैं। भारत कनाडाई पेंशन फंडों से अधिक निवेश की संभावनाओं का भी पता लगा रहा है।
अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में आनंद ने कहा कि दोनों विदेश मंत्रियों ने दोनों देशों के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए किए जाने वाले कार्यों पर चर्चा की और भारत को कनाडा के लिए एक महत्त्वपूर्ण साझेदार के रूप में रेखांकित किया। दोनों मंत्रियों ने व्यवसायों, उद्योगों और दोनों देशों के श्रमिकों के लिए तकनीकी लाभ और महत्त्वपूर्ण साझेदारी अवसरों को भी साझा किया। उन्होंने कहा, ‘कनाडा रचनात्मक सहभागिता के लिए प्रतिबद्ध है, और मैं भारत में हमारे प्रयासों को जारी रखने की आशा करती हूं।’
दोनों मंत्रियों ने अक्टूबर 2025 में घोषित कनाडा भारत संबंधों के संयुक्त रोडमैप पर हुई ठोस प्रगति पर भी चर्चा की। उन्होंने रोडमैप की प्राथमिकताओं के कार्यान्वयन के माध्यम से संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक लचीलेपन एवं स्थिरता के समर्थन में कनाडा भारत व्यापार को विस्तार और विविधता देने की अपनी प्रतिबद्धता पर बल दिया।
पिछले महीने, कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा था कि भारत और कनाडा के बीच व्यापार समझौता वार्ता शुरू होने के बाद एक वर्ष के भीतर समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतिम मुलाकात नवंबर में जोहान्सबर्ग में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जहां दोनों ने अपने अधिकारियों से भारत कनाडा व्यापार समझौते, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए), पर वार्ता आगे बढ़ाने को कहा था।
जनवरी में, कार्नी ने विश्व आर्थिक मंच (दावोस) में कहा था कि उनके देश ने अपनी रणनीतिक स्थिति बदल दी है और भारत सहित नए व्यापार और सुरक्षा साझेदारी पर काम कर रहा है। कार्नी अपने देश की पड़ोसी मुल्क अमेरिका पर निर्भरता को विविध बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी जून में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कनाडा गए थे, जिसने दोनों देशों के बीच संबंधों को नए सिरे से तय करने को चिह्नित किया, क्योंकि 2024 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट आ गई थी।
हाल के महीनों में कार्नी के कई मंत्री भारत की यात्रा कर चुके हैं। कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया सलाहकार नथाली जी ड्रूइन ने सितंबर में भारत का दौरा किया और इसकी विदेश मंत्री आनंद अक्टूबर में भारत आई थीं। कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन 27 से 30 जनवरी तक गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक में भाग लेने के लिए भारत आए थे।