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भारत का अपना ‘सॉवरेन AI’ तैयार! भारतजेन लॉन्च करेगा 17-अरब पैरामीटर वाला ‘परम-2’ मॉडल

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भारतजेन के सीईओ ऋषि बल के अनुसार आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में लॉन्च होने वाला परम-2 मॉडल भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक परिवेश के अनुरूप सटीक परिणाम देने में सक्षम होगा

Last Updated- February 16, 2026 | 11:20 PM IST
Rishi Bal
भारतजेन के सीईओ ऋषि बल

ऐसे समय जब भारतजेन इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में अपने अगली पीढ़ी के लार्ज लैंग्वेज मॉडल प्रदर्शित करने की तैयारी कर रहा है, सॉवरिन एआई और इस क्षेत्र में भारत की भविष्य की योजनाओं पर बहस तेज हो गई है। खालिद अंजार और हर्ष शिवम के साथ साक्षात्कार में भारतजेन के सीईओ ऋषि बल बताते हैं कि सरकार समर्थित यह कंसोर्टियम स्वयं के फाउंडेशनल एआई मॉडल क्यों बना रहा है। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश

भारतजेन क्या है?

भारतजेन एक गैर-लाभकारी फाउंडेशनल एआई स्टार्टअप है, जो पूरी तरह सरकार द्वारा वित्त पोषित है। यह आईआईटी मुंबई, आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी मंडी, आईआईटी हैदराबाद, आईआईआईटी दिल्ली, आईआईआईटी हैदराबाद, आईआईएम इंदौर समेत लगभग 10 शैक्षणिक संस्थानों का कंसोर्टियम है। हम भारत में अगली पीढ़ी के फाउंडेशनल एआई को बनाने के लिए एक साथ आए हैं।

व्यवहार में फाउंडेशनल एआई का क्या मतलब है?

वैसे तो कागजों में एआई दशकों से मौजूद है। मैं स्वयं लगभग 25 वर्षों से विभिन्न तरीकों से एआई पर काम कर रहा हूं, लेकिन हकीकत में 2018 या 2019 से ही एआई के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है, जो ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर, भारी मात्रा में डेटा और बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग के एक साथ आने के कारण हुआ है। इन सबके एक साथ आने से एक नई क्षमता विकसित हुई है। हम भारत में एआई की व्यापक नींव तैयार कर रहे हैं।

भारत को अक्सर तकनीक के निर्माता के बजाय उपभोक्ता के रूप में देखा गया है। अब हालात कैसे बदल रहे हैं?

पीछे मुड़कर देखेंगे तो अतीत में भारत में तकनीक, विज्ञान और गणित के निर्माता रहे हैं, लेकिन युद्धों, बाहरी आक्रमणों और अन्य व्यवधानों के कारण धीरे-धीरे परिदृश्य बदल गया, लेकिन उपभोक्ता होना हमेशा कोई कमी या दोष नहीं माना जा सकता। आज हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इसलिए हमें अब निर्माता और आविष्कारक के रूप में अलग तरह से सोचने की जरूरत है।

इस पूरे परिदृश्य में भारतजेन कहां खड़ा है?

एआई तंत्र बहुत व्यापक है और भारतजेन इस कड़ी का एक हिस्सा है। आपको एप्लिकेशन बनाने, निर्यात करने, मॉडल बनाने एवं उन्हें लागू करने तथा डेटा समेत पूरे क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों और कंपनियों की आवश्यकता है। भारतजेन इस परिदृश्य के एक अंग फाउंडेशनल मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

सॉवरिन एआई मॉडल बनाने के क्या फायदे हैं?

इसे कई तरह से समझा जा सकता है। पहला सिद्धांत है संप्रभुता, जो पहुंच की गारंटी प्रदान करती है। नीतियों में असहमति के बावजूद तकनीक तक पहुंच होनी चाहिए। दूसरा यह जानना है कि मॉडल में क्या है, ताकि आप खासकर संवेदनशील क्षेत्रों में इसके व्यवहार से हैरान न हों। और, तीसरा है सेवा क्षमता। मतलब, यदि आपने मॉडल नहीं बनाया है, तो आपके पास यह क्षमता भी नहीं होगी कि कुछ भी गलत होने पर आप उसे ठीक या अनुकूल कर लेंगे।

यदि कोई ओपन-वेट्स मॉडल जारी करता है और आप इसे अपनाते हैं, तो क्या आप वास्तव में इन तीन चीजों को नियंत्रित कर पाएंगे?

यह एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है। दूसरा आयाम वह है जिसे मैं ‘स्वदेशी’ कहता हूं। हमें अपनी सभी 22 भाषाओं और संस्कृति के लिए समर्थन की आवश्यकता है। आज के ग्लोबल मॉडल काफी हद तक ऐसे बोलते और व्यवहार करते हैं जैसे वे अमेरिका के वेस्ट कोस्ट से आते हैं। यदि आप सिरदर्द के बारे में पूछते हैं, तो वे टाइलेनॉल लेने के लिए कह सकते हैं। भारत में लोग क्रोसिन जैसे पैरासिटामॉल ब्रांड के बारे में सोचते हैं। ये मायने रखता है। हमारे पास ऐसे मॉडल होने चाहिए, जो हमारी तरह बोलें।

डेटा उपलब्धता की चुनौती को आप कैसे देखते हैं?

अधिकांश ग्लोबल डेटा अंग्रेजी में है। चीन और शायद जापान जैसे कुछ ही देशों के पास अपनी भाषाओं में बड़ी मात्रा में डेटा है। बाकी सभी को इस चुनौती का सामना करना पड़ता है। अगर हम भारत के लिए इस समस्या का समाधान कर लेते हैं, तो न केवल अपने लिए, बल्कि इस तरह की चुनौती से जूझ रहे अन्य देशों के लिए भी काम कर सकते हैं।

भारतीय डेटा कहां से आता है?

भारतीय डेटा के लिए हम जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। हम प्रकाशकों, पुरानी पुस्तकों वाले लोगों और सामुदायिक रेडियो स्टेशनों तक से डेटा जुटाते हैं।

भारतजेन को सरकार से किस तरह का समर्थन मिल रहा है?

भारतजेन को सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से 235 करोड़ रुपये की सीड फंडिंग मिली है। इसमें कर्मचारी, संचालन, कार्यालय समेत अन्य खर्चे शामिल होते हैं। अब हमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से भी समर्थन मिला है, जो मुख्य रूप से जीपीयू के रूप में है।

आज मॉडल विकास कहां खड़ा है?

हमने पिछले साल 2 जून को भारतजेन लॉन्च किया था और परम नामक एक 2.9-अरब-पैरामीटर बेस मॉडल जारी किया। इसे ओपन सोर्स बनाया, ताकि कोई भी भारतीय डेवलपर इसे एक्सेस कर सके। हमने आयुर्वेद, कृषि, वित्त और कानूनी उपयोग के लिए डोमेन-विशिष्ट मॉडल भी जारी किए हैं। इनमें एग्री-परम, अयुर-परम, वित्त-परम और विधि-परम शामिल हैं। परम बेस या मुख्य मॉडल है और ये सभी इसके ऊपर फाइन-ट्यून किए गए हैं। अब हमारे पास परम-2 है, जो 17-अरब-पैरामीटर मॉडल है।

क्या परम-2 पहले से ही उपयोग में है?

समिट में आप जो भी डेमो देखेंगे, वे परम-2 द्वारा संचालित हैं। हम इसे समिट में आधिकारिक तौर पर लॉन्च करने के बाद जारी करेंगे।

क्या अभी तक कोई उपभोक्ता सहायक एप्लिकेशन हैं?

हम प्रशासन, शिक्षा, संस्कृति मंत्रालय, वित्त और निजी सेक्टर जैसे क्षेत्रों में शुरुआती स्तर पर काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ उपभोक्ता-सहायक योजनाएं भी हैं।

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First Published - February 16, 2026 | 11:20 PM IST

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