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राष्ट्र की बात- ‘आप’-भाजपा की लड़ाई और कांग्रेस का संघर्ष

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केजरीवाल की राजनीति जिस ‘विचार’ के इर्दगिर्द विकसित हुई थी वह था भ्रष्टाचार के विरुद्ध बिना रोकटोक की लड़ाई।

Last Updated- March 24, 2024 | 9:57 PM IST
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पहली प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली सरकार की एक प्रमुख मंत्री आतिशी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार हैं। यानी उनका कहने का अर्थ यह था कि केजरीवाल की गिरफ्तारी या उन्हें अस्थायी रूप से कुर्सी से हटाया जाना उनकी राजनीति, पार्टी या सरकार को कोई बड़ी क्षति नहीं पहुंचाएगा।

यह अच्छा और दिलचस्प बिंदु है। आइए यहीं से शुरुआत करते हैं। अगले कुछ दिनों में हमें पता लग जाएगा कि आप और दिल्ली तथा पंजाब की उसकी सरकारों पर क्या असर होगा। इससे भी अधिक अहम चर्चा यह है कि इसका राष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर होगा। सैद्धांतिक तौर पर देखें तो आम आदमी पार्टी इस झटके को झेलने में सक्षम है और केजरीवाल की रिहाई तक पार्टी और मजबूत बनकर उभर सकती है। तब केजरीवाल एक ऐसे नेता के रूप में उभर सकते हैं जिसका करिश्मा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जेल में और मजबूत हुआ हो।

अगर आपकी बुनियादी विश्वसनीयता बरकरार रहती है और आपका आधार आपके विरुद्ध लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से सुरक्षित रहता है तो विरोधी सरकार की जेल में कुछ समय बिताना भारतीय राजनेताओं को कभी नुकसान नहीं पहुंचाता। दूसरी ओर अगर आपकी अनुपस्थिति में आपकी सरकार लड़खड़ा जाती है और नेता उसे छोड़कर जाने लगते हैं (जिसका प्रयास भाजपा करेगी) तो आपकी राजनीति को निर्णायक झटका लगता है। पार्टी फिलहाल ऐसे ही मोड़ पर खड़ी है।

अगर आज केजरीवाल एक विचार हैं तो वह और उनकी राजनीति जिस विचार के इर्दगिर्द खड़ी हुई वह था भ्रष्टाचार के विरुद्ध दो टूक लड़ाई। यही कारण है कि अब मोदी सरकार ने उन्हें, उनकी पूरी पार्टी और सरकार को भ्रष्टाचार के आरोपों मे ही उलझा दिया है। उनके निशाने पर कोई व्यक्ति नहीं है बल्कि वे एक विचार के पीछे हैं जो कभी केजरीवाल का पर्याय था। सार्वजनिक जीवन और बहसों में हर व्यक्ति, चाहे वह राजनेता हो, निगम हो, मीडिया हो, न्यायाधीश हो या कोई और, वह भ्रष्ट है। या फिर जैसा कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के दौर में कहा जा रहा था: सब चोर हैं और सब मिले हुए हैं। इसके बाद कहा जाता था कि केवल एक व्यक्ति इनसे सच्ची लड़ाई लड़ रहा है और वह केजरीवाल हैं।

इस प्रकार वह एक विचार में तब्दील हुए जिसे मोदी अब भ्रष्टाचार के आरोप के साथ नष्ट करना चाहते हैं। मानो वह कहना चाहते हों कि देखो, देखो इतने वर्षों तक कौन यह सब बोल रहा था। बीते एक दशक के दौरान भाजपा ने देखा कि कैसे केजरीवाल के विचार ने लोकप्रियता हासिल की। उनकी पार्टी को पंजाब में जीत हासिल हुई और गोवा में भी वोट मिले लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि आप ने गुजरात में पांच सीटों पर जीत हासिल की। मोदी-शाह के गढ़ में उसने 13 फीसदी के करीब वोट हासिल किए। उसने नगर निकायों के चुनावों में भी कुछ प्रगति की और खतरे की घंटी बजा दी। वर्तमान भाजपा अतीत की समस्याओं पर राजनीति कर सकती है लेकिन वह आज की लड़ाइयां आज नहीं लड़ती।

किसी भी अन्य महाशक्ति की तरह वह आने वाले कल की लड़ाइयों से आज निपटती है और वह ऐसा अपने क्षेत्र से दूर रहकर करती है। 2022 के राज्य चुनावों ने दिखाया कि आप भाजपा के सबसे गहरे प्रभाव वाले क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। उसी वक्त पार्टी ने तय कर लिया कि आप भविष्य की प्रतिद्वंद्वी है जिससे आज ही निपटना होगा। अगर भाजपा कामयाब होती है और केजरीवाल के विचार का पतन होने लगता है तो यह राष्ट्रीय राजनीति में एक व्यापक रुझान की पुष्टि होगी और वह यह कि लोकप्रिय शक्तिशाली और महत्त्वाकांक्षी नेताओं द्वारा अपने राजनीतिक प्रभाव वाले भूभाग का विस्तार करने की कोशिश विफल रही है।

बीते तीन सालो में हमने देखा कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने गोवा, त्रिपुरा और मेघालय में समय, ऊर्जा और पूंजी लगाई लेकिन वह राष्ट्रीय छाप छोड़ने में नाकाम रही। इसी तरह तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने अपने दल के नाम में से तेलंगाना हटाकर भारत जोड़ने का जो निर्णय लिया वह भी एक गलत कदम साबित हुआ। अन्य राज्यस्तरीय दलों में से कोई अपनी क्षेत्रीय सीमाओं से परे विस्तार करने के बारे में सपने नहीं देख सकता। वाम दल जो एक समय इकलौती देशव्यापी शक्ति थे वे केवल एक राज्य में सिमट गए।

आप इकलौता ऐसा दल बना जो अपना विस्तार करने में कामयाब रहा और भाजपा और कांग्रेस के अलावा इकलौता ऐसा दल बना जो एक से अधिक राज्यों में शासन कर रहा था। यही वजह है कि भाजपा ने उसके पर कतरने का निर्णय लिया। वह भविष्य की लड़ाई लड़ रही है। केजरीवाल की गिरफ्तारी के कारण राजनीतिक परिदृश्य में आए बदलाव को समझने के लिए हमें उस राजनीतिक दल पर नजर डालनी होगी जो उनके और उनके दल के बचाव में सबसे अधिक मुखर ढंग से सामने आया है। वह दल है कांग्रेस, यानी वह पार्टी जिसे केजरीवाल और 2010-14 के उनके भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने बहुत अधिक क्षति पहुंचाई।

आप लगातार उसके वरिष्ठ मंत्रियों की गिरफ्तारी की मांग करती रही। ऐसे में कांग्रेस केजरीवाल के बचाव में इतनी मुखर और सक्रिय क्यों है? दिल्ली और गुजरात में आंशिक गठजोड़ के अलावा दो अन्य कारण इसके पीछे हैं। पहला, किसी भी अन्य भाजपा विरोधी दल की तरह कांग्रेस भी जानती है कि जो आप के साथ हो रहा है वह कल उसके साथ भी हो सकता है। कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में उसके मुख्यमंत्री इस पर बहुत गहरी नजर रखे हुए हैं। उनका इस बात पर खास ध्यान है कि उनकी अपनी पार्टी, खासकर उसकी विधि से जुड़ी प्रतिभाएं किस तरह की चुनौती सामने रख पा रही हैं?

दूसरा कारक यह है कि अब कांग्रेस को पता है कि तमाम कमजोरियों के बावजूद वह इकलौती शक्ति है जो भाजपा और भारत के एकदलीय गणराज्य बनने के बीच खड़ी है। क्योंकि एक बार अगर वह रास्ते से हट गई तो भाजपा अन्य क्षेत्रीय दलों में से कुछ को अपने साथ मिला लेगी और अन्य को समाप्त कर देगी। ऐसे में कांग्रेस जानती है कि अगला नंबर उसका ही होगा।

अहम बात यह है कि आप पर हमले ने देश को दो राजनीतिक शक्तियों वाला देश बना दिया है एक भाजपा और दूसरा कांग्रेस। भले ही दोनों की ताकत में भारी अंतर मौजूद हो। अब यह कहना सुरक्षित है कि आने वाले वर्षों में या कम से कम 2029 तक कांग्रेस पार्टी ही भाजपा की इकलौती राष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी होगी, भले ही वह कमजोर हो। लगातार हारों के बावजूद पार्टी अभी भी करीब 20 फीसदी मत प्रतिशत रखती है। कम से कम 2019 के चुनावों तक तो ऐसा ही था। तमाम नाकामियों और जीत तथा सत्ता में वापसी की शून्य उम्मीद के बावजूद अगर पांच में से एक भारतीय आपके लिए वोट कर रहा है तो आप मुकाबले में बने हुए हैं।

अगर यह मत प्रतिशत बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाए तो भी खेल बदल सकता है। अगर आप कांग्रेस से हों तो कह सकते हैं कि यह अच्छा बिंदु है और एक पल के लिए आपके चेहरे पर मुस्कान भी आ सकती है। परंतु हकीकत से सामना अभी बाकी है। पहला कदम होगा खुद को आने वाले महीनों में भाजपा के ऐसे ही हमलों से बचाना। उसके लिए जैसा कि भाजपा कर रही है, कांग्रेस को भी भविष्य की लड़ाइयां आज ही लड़नी होंगी। यही वजह है कि कांग्रेस इतनी गहनता से आप के बचाव में उतरी है। वह अपना अस्तित्व बचाने के लिए लड़ रही है ताकि वह मुकाबले में बनी रहे सके और दो दलीय प्रणाली की अनिवार्यता कायम रहे।

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First Published - March 24, 2024 | 9:57 PM IST

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