GST काउंसिल अगले 15 दिनों में मीटिंग बुला सकती है। इस मीटिंग में एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर लगने वाले इनडायरेक्ट टैक्स को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बढ़ते हुए स्वास्थ्य खतरों को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। इस बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने यह बात कही।
काउंसिल को हर तीन महीने में कम से कम एक बार मीटिंग करनी होती है। इसकी आखिरी मीटिंग सितंबर में हुई थी, जिसमें कई चीजों पर टैक्स दरों में बड़ा बदलाव किया गया था। प्यूरीफायर पर टैक्स घटाने के लिए सभी राज्य के वित्त मंत्रियों की सहमति जरूरी होगी।
सूत्रों के मुताबिक, काउंसिल इस प्रस्ताव पर गौर करेगी कि इन प्रोडक्ट्स को लग्जरी या वैकल्पिक चीजों की बजाय जरूरी सामान मानकर GST दर 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी जाए।
यह चर्चा तब हो रही है जब देश के बड़े हिस्से में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है और सुरक्षित पीने का पानी हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं है।
बिजनेस स्टैंडर्ड ने वित्त मंत्रालय और GST काउंसिल सचिवालय को ईमेल भेजकर मीटिंग की तारीख और टैक्स घटाने की संभावना के बारे में जानकारी मांगी थी, लेकिन प्रेस टाइम तक कोई जवाब नहीं आया।
एयर और वॉटर प्यूरीफायर के अलावा काउंसिल घर में इस्तेमाल होने वाले कुछ कीटनाशकों और चूहे-चूहों को मारने वाली दवाओं (रोडेंटिसाइड्स) पर भी GST कम करने पर बात कर सकती है। अभी इन पर 18 फीसदी टैक्स लगता है।
इन प्रोडक्ट्स को भी 5 फीसदी स्लैब में डालने की बात चल रही है, ऐसा चर्चा से वाकिफ लोगों ने बताया। यह सब दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच हो रहा है।
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24 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि जल्द से जल्द GST काउंसिल की मीटिंग बुलाई जाए – चाहे वर्चुअल हो या फिजिकल। कोर्ट ने राजधानी क्षेत्र में खराब होती हवा का हवाला देते हुए एयर प्यूरीफायर पर GST कम करने या खत्म करने पर विचार करने को कहा। हालांकि केंद्र ने कोर्ट को बताया कि ऐसा करने से कई दूसरी चीजों पर भी टैक्स कम करने की मांग उठ सकती है और मामला उलझ सकता है।
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ तैयार प्रोडक्ट पर GST कम कर देने से दाम उतने ही नहीं घटेंगे जितना उम्मीद की जा रही है। इसके लिए पुर्जों पर लगने वाले इनपुट टैक्स को भी ठीक करना होगा, वरना कंपनियों के पास इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा होता रहेगा।
रस्तोगी चैंबर्स के संस्थापक अभिषेक ए रस्तोगी ने कहा, “ग्राहकों को कितना फायदा मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियों को कितना इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल रहा है। अगर पुर्जों पर टैक्स ऊंचा रहा तो कम GST का पूरा फायदा ग्राहक तक नहीं पहुंचेगा।”
राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। नवंबर में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर GST पूरी तरह खत्म करने की मांग की थी। कांग्रेस ने भी हाल ही में खत्म हुए संसद सत्र में यह मुद्दा उठाया।
उद्योग और व्यापार संगठनों ने अलग-अलग सरकार को चिट्ठी लिखकर इन प्रोडक्ट्स पर GST 5 फीसदी करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऊंचा टैक्स लगने से ये जरूरी चीजें महंगी हो जाती हैं, जिससे जन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है।
इन सब मांगों को बल मिला जब संसद की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन संबंधी स्थायी समिति ने दिसंबर में अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की कि एयर और वॉटर प्यूरीफायर तथा इनके पुर्जों पर GST कम किया जाए या खत्म कर दिया जाए। समिति ने कहा कि साफ हवा और सुरक्षित पानी लेने की कोशिश करने वाले नागरिकों को टैक्स के रूप में सजा नहीं दी जानी चाहिए।