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लेखक : कनिका दत्ता

आज का अखबार, लेख

व्यापार समझौते अवसर लाए, लेकिन भारत अब भी निवेश के लिए पूरी तरह तैयार नहीं

दो महत्त्वपूर्ण व्यापार समझौतों में सफलता मिलने के बाद आधिकारिक तौर पर यह माना जा रहा है कि भारत आर्थिक रूप से अनुकूल स्थिति में है, या उसके आसपास कहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति के बदलते रुख के कारण उम्मीद है कि भारत को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कपड़ा, चमड़ा […]

आज का अखबार, लेख

होटल और क्यों बनाएं, जब उत्तराखंड बन सकता है भारत का स्किल्स इंजन

उत्तराखंड में ‘शीतकालीन चार धाम’ का दूसरा सीजन शुरू हो गया है। यह राज्य सरकार का धार्मिक पर्यटन को पूर्ण रूप से बढ़ावा देने और इस कारोबार से होने वाली आय को अधिकतम करने का एक तरीका है। पिछले साल लगभग 30,000 तीर्थयात्रियों ने हिमालय की निचली श्रेणियों की घाटी में मौजूद देवी-देवताओं के शीतकालीन […]

लेख, विविध

क्या AI छीन लेगी पत्रकारों की नौकरी? रिपोर्टर बनाम रोबोट की जंग तेज!

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के कारण बड़ी संख्या में रोजगार खत्म होने का खतरा भयावह वास्तविकता लग रहा है, खासकर जब आप बड़ी टेक कंपनियों, बैंकिंग, बीमा, उच्च-स्तरीय विनिर्माण और यहां तक कि पर्यटन एवं होटल उद्योगों में छंटनी और नियुक्तियों में मंदी की रफ्तार पर गौर करते हैं। बदलाव की इस तेज गति ने दुनिया […]

आज का अखबार, लेख

स्वदेशी की मियाद खत्म: भारतीय व्यवसायों को सफल होने के लिए प्रतिस्पर्धा करना सीखना होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी उत्पाद खरीदने के आह्वान के बाद ‘व्हाट्सऐप अंकल’ सक्रिय हो गए हैं। माफ कीजिए, शायद हमें उन्हें ‘अरटई अंकल’ कहना चाहिए जो एक स्वदेशी मेसेजिंग और कॉलिंग ऐप है जिसे वे व्हाट्सऐप समूहों के सदस्यों को इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। ऐसे ही एक समूह के कुछ […]

आज का अखबार, लेख

फीकी पड़ती चाय: जलवायु परिवर्तन भारत को श्रीलंका और नेपाल की चाय की ओर धकेल सकता है

अगर आप चाय के शौकीन हैं और दूध-शक्कर वाली चाय की बजाय दार्जिलिंग या असम की खूशबूदार काली चाय पसंद करते हैं तब आपको श्रीलंका में चाय की बहुत कमी महसूस होगी। हाल ही में श्रीलंका की यात्रा के दौरान मैंने यह बात महसूस की। हालांकि, यह छोटा सा हरा-भरा द्वीप देश, चाय के निर्यात […]

आज का अखबार, लेख

CSR खर्च में बढ़ोतरी, फिर भी कॉरपोरेट की प्रतिष्ठा में मामूली सुधार

देश में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की दूसरी पारी के दौरान वर्ष 2013 में अनूठे कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कानून की पेशकश की गई थी। यह कानून तब लाया गया था जब कंपनियों की छवि कुछ खराब हो रही थी। उस समय अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता, ओडिशा के एक आदिवासी इलाके में बॉक्साइट […]

आज का अखबार, लेख

जिंदगीनामा: मुफ्त बिजली, रियायती रेल परिवहन गरीबों को सार्थक लाभ नहीं दिला पाते

केंद्र और राज्य सरकारें गरीबों की मदद करने के नाम पर बुनियादी ढांचे पर जो भारी-भरकम सब्सिडी देती हैं, उनसे लक्षित वर्ग को तो उतना लाभ नहीं मिला है, बल्कि इसने विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने की राह में रोड़े ही अटकाए हैं। चाहे आप इसे कुछ भी कह लें, लेकिन जब तक तमाम […]

आज का अखबार, लेख

जिंदगीनामा: आर्थिक सुधारों पर बहुदलीय सहमति से वृद्धि को मिल सकता है बल

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया के बारे में दुनिया को बताने के लिए विभिन्न देशों में बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह तरीका दूसरे मामलों में भी अपनाया जाना चाहिए। बहुपक्षीयता का यह विचार निस्संदेह काफी प्रेरित करने वाला है। दुर्भाग्य है कि किसी ने भी […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप का ‘मुक्ति दिवस’ शुल्क पहुंचाएगा नुकसान

अर्थशास्त्रियों को शायद यह महसूस हो रहा होगा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के लिए अर्थशास्त्र के प्रारंभिक सिद्धांतों को समझना निहायत ही जरूरी हो गया है। इसके पीछे अर्थशास्त्रियों की यह सोच हो सकती है कि ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल को ‘मुक्ति दिवस’ के नाम पर लगाए ऊंचे शुल्क अर्थशास्त्र के किसी भी […]

आज का अखबार, लेख

अमेरिका में विविधता, समानता पर चोट

डॉनल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिकी कंपनियों के सुर बदलते दो महीने भी नहीं लगे और वे खुद को प्रगतिशील सामाजिक एवं राजनीतिक सोच के खिलाफ दिखाने लगीं। वजह? वे ट्रंप प्रशासन में आने वाले कारोबारी मौके लपकने में वक्त बिल्कुल जाया नहीं करना चाहतीं। सिलसिला दुनिया की सबसे बड़ी धन प्रबंधन […]

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