Middle East Crisis: पश्चिम एशिया में ताजा संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि के बीच एयर इंडिया ने मंगलवार को अपने घरेलू और कुछ अंतरराष्ट्रीय टिकटों पर ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge) लागू करने की घोषणा की। यह शुल्क चरणबद्ध तरीके से 12 मार्च से शुरू होगा। एयरलाइन ने बताया कि एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में इस समय तेज़ बढ़ोतरी हुई है, जो एयरलाइन संचालन की कुल लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है।
एयर इंडिया के अनुसार, मार्च की शुरुआत से ATF की कीमतों में वृद्धि में आपूर्ति में व्यवधान प्रमुख कारण है। इसके अलावा, दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख महानगरों में ATF पर उच्च उत्पाद शुल्क और वैट (VAT) लागू होने के कारण कुल ऑपरेटिंग लागत में और वृद्धि हो रही है।
एयरलाइन ने बताया कि पहले चरण में, 12 मार्च से की जाने वाली नई बुकिंगों पर शुल्क लागू होगा। इसके तहत घरेलू उड़ानों और दक्षिण एशियाई देशों जैसे नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश (जो SAARC सदस्य हैं) की उड़ानों पर ₹399 का ईंधन अधिभार लगेगा। ये मार्ग पहले किसी भी ईंधन शुल्क के दायरे में नहीं आते थे।
पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व की उड़ानों पर अब $10 का नया ईंधन शुल्क लागू होगा। इन मार्गों पर पहले कोई अधिभार नहीं लगाया गया था।
दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए यह शुल्क $40 से बढ़ाकर $60 किया जाएगा, जबकि अफ्रीका की उड़ानों पर $60 से बढ़ाकर $90 का अधिभार लगेगा।
एयरलाइन ने कहा कि दूसरे चरण में, जो 18 मार्च से शुरू होगा, लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन अधिभार बढ़ाया जाएगा। यूरोप के लिए शुल्क $100 से बढ़ाकर $125 कर दिया जाएगा। वहीं, उत्तर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की उड़ानों के लिए $150 से बढ़ाकर $200 का ईंधन अधिभार लागू होगा।
एयरलाइन ने बताया कि हांगकांग, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे फार ईस्ट मार्केट्स को कवर करने वाली तीसरी चरण की जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि जो टिकट संबंधित तारीखों से पहले जारी किए गए हैं, उन पर संशोधित अधिभार लागू नहीं होगा। हालांकि, यदि यात्री अपनी यात्रा की तारीख या यात्रा योजना में बदलाव करते हैं और इसके कारण किराया पुनर्गणना होती है, तो नए अधिभार लागू होंगे। यह अधिभार एयर इंडिया समूह की सभी उड़ानों पर लागू होगा, जिनमें एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा संचालित उड़ानें भी शामिल हैं।
एयरलाइन ने कहा कि “एयर इंडिया को इस तरह ईंधन अधिभार बढ़ाने की आवश्यकता है। यह कदम पूरी तरह उन कारकों के कारण उठाया गया है, जिन पर एयरलाइन का नियंत्रण नहीं है। यदि ऐसे ईंधन अधिभार लागू नहीं किए गए, तो कुछ उड़ानें अपने संचालन लागत को पूरा नहीं कर पातीं और उन्हें रद्द करना पड़ सकता था।”
एयर इंडिया ने यह भी बताया कि वह समय-समय पर अपने अधिभार की समीक्षा करेगी और परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक बदलाव करेगी। इसका उद्देश्य एयरलाइन संचालन को सतत और सुरक्षित बनाए रखना है।