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लेखक : अमित कपूर

आज का अखबार, लेख

भारत के बड़े शहरों की हकीकत: एक जैसे नहीं रोजगार, वेतन और महिलाओं के अवसर

शहरों से समृद्धि आती है। यहां प्रतिभाशाली लोग, उद्योग और निवेश एक साथ आते हैं, जिनसे उत्पादन बढ़ता है, रोजगार आते हैं और लोगों का जीवन स्तर बेहतर होता है। भारत की केवल एक-तिहाई आबादी शहरों में रहती है लेकिन देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इन्हीं शहरों से चलता है। इनमें भी सबसे अधिक […]

आज का अखबार, लेख

उपहार से लेकर हौज रानी तक: 29 साल बाद भी दिल्ली ने अग्निकांडों के दर्दनाक हादसों से नहीं लिया सबक

दिल्ली में जून के महीने में हुईं भीषण आग की दो घटनाओं में एक अजीब समानता है। 13 जून, 1997 को ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा हॉल अ​ग्निकांड में 59 लोग दम घुटने से मर गए। इस सिनेमा हॉल में मुनाफे के लिए गैर-कानूनी तौर पर बदलाव किए गए थे। वहीं, 3 जून, 2026 को […]

आज का अखबार, लेख

शहरी विकास का अधूरा आधार: भारत में आवास संकट अब सामाजिक नहीं, बल्कि आर्थिक वृद्धि की बड़ी बाधा

अधिकांश विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में शहर वह जगह होती हैं जहां उत्पादकता से जुड़े काम होते हैं, मजदूरी-पगार ज्यादा होती है और आर्थिक वृद्धि तेजी से होती है। भारत तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है और इसके शहरी केंद्र इस वृद्धि को बड़े पैमाने पर समायोजित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन एक […]

आज का अखबार, लेख

शहरी आय में तेज बढ़ोतरी, लेकिन शहरों के भीतर और बाहर बढ़ती असमानता ने बढ़ाई चिंता

देश के शहरी इलाकों की आय की गाथा, पारंपरिक मानकों पर बहुत उल्लेखनीय है। वर्ष2017-18 और 2023-24 के बीच शहरी आय वितरण के हर स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में तेजी से बढ़ी। शहरों ने कामगारों को जगह दी, औपचारिक रोजगार तैयार किए और ऐसा मध्य वर्ग तैयार किया जो खपत करता है तथा […]

आज का अखबार, लेख

आधुनिक शहर पर पुराने कायदे: क्यों बुनियादी ढांचे के बावजूद बेहाल हैं भारतीय शहर?

भारत के शहर बहुत पुराने तरीकों से बहुत आधुनिक चीजें करना सीख रहे हैं। हम 10 मिनट में किराने का सामान मंगा सकते हैं, यूपीआई से सड़क पर किसी वेंडर को भुगतान कर सकते हैं, ऐप पर अपनी बस को देख सकते हैं और विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़े किसी कांच के टॉवर में बैठकर अपना […]

आज का अखबार, लेख

भारत के शहर ‘अत्यधिक शहरी’ लेकिन उत्पादकता में पीछे: आर्थिक समीक्षा में खुलासा

इस वर्ष आई आर्थिक समीक्षा में देश के शहरी विकास पथ के बारे में असाधारण रूप से यह स्पष्ट स्वीकारोक्ति की गई है कि भारत ‘आर्थिक दृष्टि से पहले से ही अत्यधिक शहरी’ है। फिर भी यह ‘अधूरे वादों’ की कहानी है। समीक्षा के अनुसार, यह वादा घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों और कंपनियों […]

आज का अखबार, लेख

स्वच्छ भारत की अगली चुनौती: सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जोर

भारतीय शहरों में स्वच्छता सुधारों के स्पष्ट परिणाम दिखे हैं, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती अब भी दिखाई नहीं दे रही। यह चुनौती है सफाई के लक्ष्य को जन स्वास्थ्य और पर्यावरणीय सुरक्षा के कठिन कार्य के साथ जोड़ना। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) देश के सबसे प्रभावशाली और सफल शहरी अभियानों में से एक है […]

आज का अखबार, लेख

रहने योग्य शहरों के लिए डिजाइन को नागरिक कौशल बनाना क्यों जरूरी है?

भारत के शहर तेजी से विकास कर रहे हैं और रोजमर्रा के जीवन में नए रूपों में अपनी उपस्थिति का एहसास करा रहे हैं। शहरी परिदृश्य असाधारण गति से तैयार हो रहा है मगर इसे आकार देने वाली संस्थाएं इसकी रफ्तार के साथ तालमेल बैठाने में मुश्किलों का सामना कर रही हैं। इसका नतीजा यह […]

आपका पैसा, ताजा खबरें

रिटायरमेंट निवेश का सच: EPF-NPS से लेकर FD तक, 2025 में बुजुर्गों को कितना मिला रिटर्न?

इस साल भारत के बुजुर्गों के लिए सेवानिवृत्ति पर निवेश से मिले-जुले नतीजे आए। ज्यादातर फिक्स्ड इनकम वाले विकल्पों में रिटर्न स्थिर रहे, जबकि शेयर बाजार से जुड़े निवेश में काफी उतार-चढ़ाव दिखा। यह सब निवेश की मात्रा और सही समय पर निर्भर करता रहा। सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सुरक्षित विकल्पों में रिटर्न अच्छे […]

आज का अखबार, लेख

भारत के शहरी भविष्य की नई सोच: लोगों को ध्यान में रखकर शहर बसाने की दरकार

शहर अचानक नहीं बन जाते। वे समय के साथ तैयार होते हैं। शहरों के निर्माण में नीतियों, निर्णयों, फौरी उपायों, दुर्घटनाओं और रखरखाव आदि सभी का हाथ होता है। जब अर्थव्यवस्था का विस्तार होता है तो वे फैलते हैं, जहां शासन कमजोर होता है वहां वे कमजोर पड़ते हैं। उनका जीवन इस बात पर निर्भर […]

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