शहरी आय में तेज बढ़ोतरी, लेकिन शहरों के भीतर और बाहर बढ़ती असमानता ने बढ़ाई चिंता
देश के शहरी इलाकों की आय की गाथा, पारंपरिक मानकों पर बहुत उल्लेखनीय है। वर्ष2017-18 और 2023-24 के बीच शहरी आय वितरण के हर स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में तेजी से बढ़ी। शहरों ने कामगारों को जगह दी, औपचारिक रोजगार तैयार किए और ऐसा मध्य वर्ग तैयार किया जो खपत करता है तथा […]
आधुनिक शहर पर पुराने कायदे: क्यों बुनियादी ढांचे के बावजूद बेहाल हैं भारतीय शहर?
भारत के शहर बहुत पुराने तरीकों से बहुत आधुनिक चीजें करना सीख रहे हैं। हम 10 मिनट में किराने का सामान मंगा सकते हैं, यूपीआई से सड़क पर किसी वेंडर को भुगतान कर सकते हैं, ऐप पर अपनी बस को देख सकते हैं और विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़े किसी कांच के टॉवर में बैठकर अपना […]
भारत के शहर ‘अत्यधिक शहरी’ लेकिन उत्पादकता में पीछे: आर्थिक समीक्षा में खुलासा
इस वर्ष आई आर्थिक समीक्षा में देश के शहरी विकास पथ के बारे में असाधारण रूप से यह स्पष्ट स्वीकारोक्ति की गई है कि भारत ‘आर्थिक दृष्टि से पहले से ही अत्यधिक शहरी’ है। फिर भी यह ‘अधूरे वादों’ की कहानी है। समीक्षा के अनुसार, यह वादा घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों और कंपनियों […]
स्वच्छ भारत की अगली चुनौती: सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जोर
भारतीय शहरों में स्वच्छता सुधारों के स्पष्ट परिणाम दिखे हैं, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती अब भी दिखाई नहीं दे रही। यह चुनौती है सफाई के लक्ष्य को जन स्वास्थ्य और पर्यावरणीय सुरक्षा के कठिन कार्य के साथ जोड़ना। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) देश के सबसे प्रभावशाली और सफल शहरी अभियानों में से एक है […]
रहने योग्य शहरों के लिए डिजाइन को नागरिक कौशल बनाना क्यों जरूरी है?
भारत के शहर तेजी से विकास कर रहे हैं और रोजमर्रा के जीवन में नए रूपों में अपनी उपस्थिति का एहसास करा रहे हैं। शहरी परिदृश्य असाधारण गति से तैयार हो रहा है मगर इसे आकार देने वाली संस्थाएं इसकी रफ्तार के साथ तालमेल बैठाने में मुश्किलों का सामना कर रही हैं। इसका नतीजा यह […]
रिटायरमेंट निवेश का सच: EPF-NPS से लेकर FD तक, 2025 में बुजुर्गों को कितना मिला रिटर्न?
इस साल भारत के बुजुर्गों के लिए सेवानिवृत्ति पर निवेश से मिले-जुले नतीजे आए। ज्यादातर फिक्स्ड इनकम वाले विकल्पों में रिटर्न स्थिर रहे, जबकि शेयर बाजार से जुड़े निवेश में काफी उतार-चढ़ाव दिखा। यह सब निवेश की मात्रा और सही समय पर निर्भर करता रहा। सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सुरक्षित विकल्पों में रिटर्न अच्छे […]
भारत के शहरी भविष्य की नई सोच: लोगों को ध्यान में रखकर शहर बसाने की दरकार
शहर अचानक नहीं बन जाते। वे समय के साथ तैयार होते हैं। शहरों के निर्माण में नीतियों, निर्णयों, फौरी उपायों, दुर्घटनाओं और रखरखाव आदि सभी का हाथ होता है। जब अर्थव्यवस्था का विस्तार होता है तो वे फैलते हैं, जहां शासन कमजोर होता है वहां वे कमजोर पड़ते हैं। उनका जीवन इस बात पर निर्भर […]
शहरी संकट: स्थानीय निकायों को वास्तविक स्वायत्तता और जवाबदेही देना समय की मांग
देशभर में शहरी बुनियादी ढांचा लगातार दबाव में है। शहरों को कभी उत्पादकता का वाहक और बेहतर जीवन स्तर सुलभ कराने वाला माना जाता था लेकिन अब वे जलभराव, लंबे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से जूझ रहे हैं जिससे निवासियों के जीवन स्तर और समग्र उत्पादकता, दोनों को खतरा है। ये अंतर्निहित कमियां शहरी नियोजन […]
हमारे शहरों को जलवायु संकट से बचाने में फाइनेंस कमीशन की अहम भूमिका
शहरों और जलवायु परिवर्तन की कहानियां अक्सर जानी-पहचानी आपदाओं जैसे कि झुलसा देने वाली गर्मी, नदियों में उफान और दम घोंटने वाले धुएं के जरिये बताई जाती हैं। ये सभी आज के दौर की गंभीर चिंताएं हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है लेकिन गौर करने की एक अहम बात यह भी है कि […]
पलायन समस्या नहीं शहरी विकास का आधार, इसे दूर नहीं किया जाना चाहिए
दशकों से भारतीय शहर अवसरों के प्रमुख केंद्र रहे हैं, जो सामाजिक गतिशीलता के माध्यम से उम्मीद जगाते हैं। लाखों प्रवासी, ग्रामीण इलाकों से शहरी क्षेत्रों में चले गए हैं। मुंबई की कपड़ा मिलों से लेकर बेंगलूरु के प्रौद्योगिकी केंद्रों तक दरअसल ये प्रवासी एक ऐसी छिपी हुई ताकत हैं जो भारत के शहरी क्षेत्रों […]








