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लेखक : अमित कपूर

आज का अखबार, लेख

शहरों के विकास में नीली अर्थव्यवस्था का महत्त्व

एक लंबे अरसे से शहरों में जल को प्राकृतिक दृश्य या कारखानों एवं नालों से बहने वाले पानी के रूपों में देखा गया है। जल को एक रणनीति के रूप में तवज्जो नहीं दी गई है। मगर नीली अर्थव्यवस्था (ब्लू इकॉनमी) की अवधारणा में ये तीनों पहलू शामिल किए गए हैं। यह एक आशावादी सोच […]

आज का अखबार, लेख

शहरों के विकास में नागरिकों की भागीदारी अहम

अगर आप शहर में रहते हैं तो किसी कोने में जमा कूड़े के ढेर, सड़कों पर इधर से उधर उड़ती प्लास्टिक थैलियों और सार्वजनिक नलों से टपकते पानी से जरूर रूबरू हुए होंगे। शहर की आपा-धापी की जिंदगी में हम यह सोच कर इनकी अनदेखी कर जाते हैं कि किसी न किसी का ध्यान तो […]

आज का अखबार, लेख

भारत में भी ‘15-मिनट सिटी’ की जरूरत

दुनिया भर में ’15 मिनट सिटी’ बनाने की कोशिश हो रही है, जहां शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में केवल 15 मिनट लगें। लेकिन भारतीय महानगरों में एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचना जंग जीतने से कम नहीं है, जिसमें 2 घंटे या उससे भी ज्यादा लग जाते हैं। हम […]

आज का अखबार, लेख

शहरीकरण के सबक सिखा रही कुंभ नगरी

संगम के तट पर बसी कुंभ नगरी किसी दिव्य मरीचिका की तरह है। प्रयागराज में सब कुछ अपने भीतर समाए यह बड़ी सी नगरी मानो अचानक प्रकट हो गई और कुछ ही दिनों में एकाएक विलीन हो जाएगी। कुछ लोग इसे क्षणिक शहरीकरण का नाम भी दे सकते हैं। कुंभ नगरी में ऐसा महानगर नजर […]

आज का अखबार, लेख

शहरों में भूजल की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी

पानी कभी ठहरता नहीं.. रूप बदलता रहता है। बर्फ पिघलने से पानी बनता है, जो भाप बनकर उड़ जाता है और भाप इकट्ठी होकर एक बार फिर पानी की बूंदों में तब्दील हो जाती है। यह धरती पर तो रहता है मगर कभी एक रूप में ही नहीं रहता। प्रकृति के चक्र को देखें तो […]

आज का अखबार, लेख

आत्मनिर्भर बनें शहरी स्थानीय निकाय

नगर निकायों के वित्त पर भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट बताती है कि 50 फीसदी से ज्यादा नगर निगम अपने बल पर आधे से भी कम राजस्व अर्जित कर पाते हैं और 2022-23 में सरकार से उन्हें मिलने वाली रकम 20 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ गई। नगर निकायों को अधिक प्रशासनिक स्वायत्ता तथा […]

आज का अखबार, लेख

शहरों को तैयार करने की दूरदर्शी योजना बने

शहर सिर्फ इमारतों का एक समूह नहीं है। शहर वास्तव में सामाजिक व्यवस्थाओं, सेवाओं, इमारतों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे का गतिशील नेटवर्क होता है। शहर विभिन्न स्वरूपों और काम वाली जगह होती है जो लोगों को विविध अवसर मुहैया कराती है। इससे शहरीकरण की रफ्तार बढ़ती है और कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं […]

आज का अखबार, लेख

अवैध निर्माण के नुकसान और तकनीकी इलाज

किसी भी शहर में आपको ऐसा हिस्सा जरूर दिख जाएगा, जो बुनियादी विकास की बाट जोह रहा होता है। ऐसे इलाकों में अक्सर पुराने मकान, फुटपाथ और सड़कों के किनारे एक के बाद एक दुकानें दिख जाते हैं जिनसे यातायात बाधित होता रहता है। बिजली के खंभों से झूलते तार और इमारतों के नीचे तहखाने […]

आज का अखबार, लेख

बाढ़ और जल संकट की चेतावनी: नदियों का संरक्षण आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी

पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच विरोधाभास पर न जाने कितनी बार बहस हो चुकी है। अक्सर ऐसी बहसों और चर्चाओं का अंत प्रकृति और मानव के बीच सामंजस्य बनाए रखने पर जोर देने वाले भाषणों के साथ होता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन से जुड़े संकट गहराने के बाद ये बहसें हमें आगाह करने […]

आज का अखबार, लेख

बजट में शहरीकरण की योजना पर जोर मगर 2047 तक विकसित भारत के लिए उठाने होंगे कई कदम

भारत में शहरीकरण की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है और वर्तमान में देश की 35 प्रतिशत से अधिक आबादी शहरों में रहती है और ऐसी उम्मीद है कि वर्ष 2050 तक 50 प्रतिशत और क्षेत्रों के शहरीकरण की उम्मीद है। शहरी विकास पर सरकारों द्वारा जोर दिए जाने के लिए इससे बेहतर कोई समय […]

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