वर्ल्डपैनल बाई न्यूमरेटर (पहले कैंटर वर्ल्डपैनल के नाम से मशहूर) को उम्मीद है कि 2026 में भारतीय एफएमसीजी क्षेत्र धीमी लेकिन स्थिर रफ्तार से बढ़ता रहेगा और उसकी सालाना वृद्धि दर कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही के अंत तक 5 फीसदी तक पहुंच जाएगी। वर्ल्डपैनल बाइ न्यूमरेटर के दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक के. रामकृष्णन ने कहा, जिन श्रेणियों में हमने उच्च वृद्धि देखी है, उनमें अब बढ़ोतरी सामान्य होने की उम्मीद है। ये अब बड़ी होती जा रही हैं और एफएमसीजी के स्तर पर धीमी वृद्धि का एक कारण भी है। लेकिन यह अपने आप में बुरा नहीं है।
यह वृद्धि 2025 में इस क्षेत्र में देखी गई 4.1 फीसदी की बढ़ोतरी से अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2025 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में बढ़त 4.5 फीसदी रही जो सितंबर में समाप्त तिमाही की बढोतरी से थोड़ी कम है।
रामकृष्णन ने रिपोर्ट में कहा, हमें लगता है कि अंतिम तिमाही में मंदी के कई कारण हैं। पहला, जीएसटी 2.0 का असर अभी तक एफएमसीजी बाजार पर दिखना शुरू नहीं हुआ है। हमें यह याद रखना होगा कि एफएमसीजी बाजार में जीएसटी सुधारों का असर निकट भविष्य के बजाय दीर्घकालिक रूप से होने की उम्मीद थी।
उन्होंने कहा कि जीएसटी में कमी के कारण भारी टिकाऊ वस्तुओं और ऑटोमोबाइल जैसी महंगी वस्तुओं की मांग में काफी वृद्धि हुई और खर्च का एक बड़ा हिस्सा इन वस्तुओं की ओर चला गया। धीमी बिक्री का एक अन्य कारण यह था कि त्योहारी सीजन जल्दी आ गया (दशहरा 2 अक्टूबर को था)। इसका मतलब था कि त्योहारी खरीदारी सितंबर में ही शुरू हो गई थी, जो दिसंबर तिमाही में नहीं दिखाई दी। इस कारण 2025 की चौथी तिमाही में वृद्धि दर में मामूली कमी आई।
अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में घरेलू स्वच्छता, सुविधा उत्पाद और खाना पकाने के तेल जैसी श्रेणियों में पिछले वर्ष की चौथी तिमाही की तुलना में सुस्ती देखी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है, फर्श और बर्तन साफ करने वाले उत्पादों की बिक्री में पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में कुछ कमी आई है। इन दोनों श्रेणियों में 2024 में काफी मजबूत वृद्धि देखी गई थी और यह बढ़ोतरी जारी है। लेकिन अब इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी है। रेडी-टू-कुक मिक्स की बिक्री में कमी का कारण भी वही है। 2024 की तिमाही में रेडी-टू-कुक मिक्स की बिक्री में काफी मजबूत बढ़ोतरी हुई, लेकिन 2025 की तिमाही में वृद्धि मजबूत तो है पर धीमी है।
दिसंबर में समाप्त तिमाही में स्नैक्स की मांग में करीब 6 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया जबकि कोल्ड ड्रिंक्स की मांग में भी वर्ष के अंत तक 19 फीसदी की मजबूत बढ़ोतरी देखी गई।