facebookmetapixel
Netflix के भारत में 10 साल: कैसे स्ट्रीमिंग ने भारतीय मनोरंजन उद्योग की पूरी तस्वीर बदल दीEditorial: ट्रंप की नई टैरिफ धमकी से भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों पर गहराया संकटट्रंप को धन्यवाद कि उनकी वजह से वापस आए सुधार‘VB-G Ram Ji’ कानून के बचाव में उतरेंगे केंद्रीय मंत्री और BJP के नेता, विपक्ष के अभियान को देंगे जवाबApple की बड़ी छलांग: भारत से आईफोन निर्यात पहली बार ₹2 लाख करोड़ के पार, PLI स्कीम का असरऑफिस से फैक्ट्री तक कर्मचारियों को पहुंचाने पर उबर का फोकस, कंपनी को दिख रहा यहां बड़ा अवसरबड़े दावे, सीमित नतीजे: AI के दौर में भी कई GCC सिर्फ कॉस्ट सेंटर बनकर रह गए, वैल्यू क्रिएशन से कोसों दूरदोपहिया उद्योग को 2026 में 9 फीसदी तक की ग्रोथ की उम्मीद, GST कटौती के चलते मांग बढ़ने के आसार2032 तक 3-नैनोमीटर चिप बनाएगा भारत, सेमीकंडक्टर महाशक्ति बनने की हमारी तैयारी: वैष्णवरिकॉर्ड निवेश और मजबूत रिटर्न: सोना-चांदी की तेजी से 2025 में भी मल्टी-ऐसेट फंडों ने दिखाया जलवा

अब हर बूथ पर दृष्टिहीनों के लिए वोटिंग मशीन

Last Updated- December 10, 2022 | 1:06 AM IST

चुनाव आयोग इस साल के लोकसभा चुनावों में देश भर के दृष्टिहीनों के लिए ब्रेल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।
चुनाव आयुक्त नवीन चावला ने बताया, ‘हम उन सभी जगहों पर इन मशीनों का इस्तेमाल करेंगे जहां दृष्टिहीनों की संख्या ज्यादा है।’ साल 2007 में देश में पहली बार उत्तराखंड में 150 दृष्टिहीनों ने ब्रेल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से वोट किया था। ब्रेल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टिहीन संस्थान(एनआईवीएच) ने नेत्रहीनों के लिए बनाया था।
चावला ने बताया, ‘एनआईवीएच  द्वारा दृष्टिहीनों के लिए बनाई गई वोटिंग मशीन काफी अच्छी तरह से काम करती हैं। इन मशीनों के काम से मैं काफी प्रभावित हूं।’ एनआईवीएच क ी निदेशिका डॉ. अनुराधा मोहित ने इसके लिए चुनाव आयोग की तारीफ की।
उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों की दुनिया में सिर्फ अंधेरा है यह उन लोगों के लिए एक अच्छा तोहफा होगा।’ डॉ. अनुराधा खुद भी दृष्टिहीन हैं। इस मशीन से वोट करते समय दृष्टिहीनों को कोई भी मुश्किल नहीं होगी। इन मशीनों पर प्रत्याशियों के नाम और उनके चुनाव चिह्न ब्रेल लिपि में लिखे होंगे। डॉ. अनुराधा ने बताया, ‘पहले दृष्टिहीन वोटिंग करते थे तो उनकी वोटिंग में कोई गोपनीयता नहीं रह जाती थी।’
विशेषज्ञों ने कहा कि अभी भी इसमें और सुधार की जरूरत है। डॉ. अनुराधा ने बताया, ‘अगर हम इन मशीनों में ध्वनि आधारित सिस्टम भी लगा सके तो अनपढ़ दृष्टिहीनों को भी सुविधा होगी।’ दरअसल दृष्टिहीनों में ब्रेल लिपि की साक्षरता दर 22-25 फीसदी के बीच ही है।

First Published - February 15, 2009 | 9:37 PM IST

संबंधित पोस्ट