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Apple की बड़ी छलांग: भारत से आईफोन निर्यात पहली बार ₹2 लाख करोड़ के पार, PLI स्कीम का असर

भारत में 2024 तक उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत ऐपल का मुख्य ध्यान आईफोन का निर्यात बढ़ाने पर रहा

Last Updated- January 11, 2026 | 10:15 PM IST
iPhone 17
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

साल 2021 में ऐपल द्वारा भारत में उत्पादन शुरू करने के बाद यह पहला मौका है जब 2025 में देश से उसके आईफोन का निर्यात 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। ऐपल के लिए ठेके पर आईफोन बनाने वाली कंपनियों द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों को दिए गए आंकड़ों के अनुसार जनवरी से दिसंबर 2025 तक इनका निर्यात रिकॉर्ड 23 अरब डॉलर (या 2.03 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया जो 2024 की तुलना में करीब 85 फीसदी अ​धिक है। 

भारत में 2024 तक उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत ऐपल का मुख्य ध्यान आईफोन का निर्यात बढ़ाने पर रहा। इससे कंपनी का निर्यात हर साल बढ़ता गया। ऐपल ने 2021 में 8,800 करोड़ रुपये का निर्यात किया जो 2022 में बढ़कर 36,234 करोड़ रुपये हो गया। 2023 में यह दोगुना से ज्यादा बढ़कर 74,000 करोड़ रुपये रहा। 2024 में निर्यात बढ़कर 1.1 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। 

2020 में पीएलआई योजना के बाद ऐपल ने ठेके पर आईफोन बनाने वाले अपने दो आपूर्तिकर्ताओं विस्ट्रॉन और फॉक्सकॉन के साथ भारत में प्रवेश किया। कोरोना महामारी और चीन के साथ सीमा पर झड़प की वजह से भारत में उत्पादन शुरू करने में देरी हुई और देश में 2021 में आईफोन का उत्पादन शुरू हुआ, जो मुख्य रूप से निर्यात बाजार के लिए था। 

2020 से जब ऐपल की आपूर्ति श्रृंखला चीन से शिफ्ट हो रही थी तो उम्मीद थी कि वह अपने कई आपूर्तिकर्ताओं को चीन से भारत ले आएगी। सरकार ने प्रेस नोट 3 के तहत पाबंदियों के बावजूद चीन की 14 कंपनियों को भारत में निवेश के लिए मंजूरी भी दी थी। ऐपल ने 2023 से भारतीय कंपनियों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला में लाना शुरू कर दिया।

सरकार के लिए यह मुश्किल फैसला था लेकिन इससे भारतीय पारि​स्थितिकी तंत्र को फायदा होने, खास तौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कुशलता मिलने की वजह से लिया गया।

टाटा समूह इस पारि​स्थितिकी तंत्र में शामिल होने वाला पहला कारोबारी समूह था जब उसने 2023 में कर्नाटक में विस्ट्रॉन का आईफोन कारखाना खरीद लिया। बाद में इसने तमिलनाडु में पेगाट्रॉन की आईफोन फैक्टरी में बहुलांश हिस्सेदारी का अ​धिग्रहण किया। 

2024 में कई भारतीय कंपनियां कलपुर्जा और सब-असेंबली आपूर्तिकर्ता के तौर पर ऐपल की आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हो गई हैं। इनमें मदरसन, हिंडाल्को, विप्रो पारी, जैबिल, एक्वस, एसएफओ टेक्नॉलजीज और भारत फोर्ज मुख्य हैं। इसके आपूर्तिकर्ता भारत के आठ राज्यों में फैले हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक पिछले चार साल में स्मार्टफोन में मूल्यवर्धन तेजी से बढ़कर 2025 तक 19 फीसदी पहुंच गया। यह उस 40-45 फीसदी मूल्यवर्धन का लगभग आधा है जो चीन ने करीब 18 साल में हासिल किया है।

नई शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जा विनिर्माण योजना इस दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे अगले चार वर्षों में मूल्यवर्धन में लगभग 30 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसमें ऐपल के कई आपूर्तिकर्ता भी हिस्सा ले रहे हैं। इससे स्मार्टफोन निर्यात के अलावा पुर्जों के निर्यात को भी मिलने की उम्मीद है। 

First Published - January 11, 2026 | 10:15 PM IST

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