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आईटीसी, एचयूएल ने टाला निवेश

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Last Updated- December 09, 2022 | 11:11 PM IST

एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां आईटीसी और एचयूएल को उत्तराखंड में अपनी विस्तार परियोजनाएं टालनी पड़ सकती हैं।


इसकी वजह है उत्तराखंड में भूमि की कमी। एचयूएल ने उत्तराखंड बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास निगम (सिडकुल) से हरिद्वार में 50 एकड़ भूमि की मांग की थी। लेकिन सरकार की नई भूमि आवंटन नीति के तहत कंपनी को मात्र 15 एकड़ भूमि ही मिल पाई है।

कंपनी ने हरिद्वार औद्योगिक परिसर में 510 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की थी। हरिद्वार परिसर में पहले से ही कंपनी का एक संयंत्र है। इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, ‘हरिद्वार में मांग से कम भूमि मिलने के कारण कंपनी अपनी विस्तार परियोजना को टाल सकती है।’

इसी तरह आईटीसी को भी हरिद्वार में 30 एकड़ जमीन चाहिए थी। लेकिन कंपनी को सिर्फ 9 एकड़ जमीन ही मिल पाई है। आईटीसी ने भी लगभग 260 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की थी। अधिकारी ने बताया कि जरूरत के हिसाब से कम जमीन मिलने के कारण आईटीसी भी इस निवेश को रोक सकती है।

सिडकुल को जुलाई में राज्य में मौजूद अलग-अलग औद्योगिक परिसरों के लिए लगभग 150 आवेदन मिले थे। लेकिन पंतनगर औद्योगिक परिसर से भी कम भूमि होने के बावजूद हरिद्वार औद्योगिक परिसर में भूमि के लिए कई आवेदन आए थे।

राज्य में ज्यादा से ज्यादा कंपनियों को बुलाने के लिए सरकार ने कंपनियों को दिए जाने वाले प्लॉटों का आकार घटा दिया था। अधिकारियों ने बताया कि सरकार स्टरलाइट और कंट्रोल ऐंड स्विचगियर को भी मांग के मुताबिक भूमि का आवंटन नहीं कर पाई है।

लेकिन पंतनगर औद्योगिक परिसर में हालात उतने खराब नहीं हैं। पंतनगर में टाटा मोटर्स, डेल्टा इंडिया और हिंदुस्तान जिंक अपनी घोषणाओं के मुताबिक ही विस्तार कर रही हैं।

यहां पर सबसे ज्यादा जमीन मिली टाटा मोटर्स को । कंपनी को छोटी कार नैनो के निर्माण संयंत्र के लिए 45 एकड़ अतिरिक्त जमीन दी गई है।

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First Published - January 27, 2009 | 8:56 PM IST

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