facebookmetapixel
उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल की मंडियों में आलू की कीमतें तेजी से गिरीं, किसानों को नहीं मिल रही लागतटैरिफ तनाव से बाजार धड़ाम: सेंसेक्स-निफ्टी में तीन महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटESOP प्रस्तावों पर Groww कर रही विरोध का सामना, गवर्नेंस पर उठे सवालमौसम, मजदूर व लागत की मार: दार्जिलिंग चाय पर गहराया संकट, 2025 में पैदावार और घटने के स्पष्ट संकेतबैंकों में पड़ी लावारिस जमा राशि पर सरकार सख्त, 14 जनवरी से दावे निपटान की रफ्तार का होगा आकलनUnion Budget 2026 से बड़ी उम्मीद, खपत बढ़ाने और MSMEs को रफ्तार देने पर हो जोर: निर्मल के. मिंडासुस्त शेयर बाजार के बीच 2025 में डीमैट खातों की रफ्तार आधी, 3.06 करोड़ पर सिमटीखाद में आत्मनिर्भरता की बड़ी छलांग, देश में उर्वरकों की कुल खपत का 73 प्रतिशत घरेलू उत्पादन सेबीमा सेक्टर में बड़ा बदलाव संभव, कमीशन ढांचे पर नियामक और सरकार के बीच चल रही बातचीतMotherson का मुंबई में बड़ा दांव: BKC में 100 करोड़ रुपये का प्रीमियम ऑफिस स्पेस खरीदा

आईटीसी, एचयूएल ने टाला निवेश

Last Updated- December 09, 2022 | 11:11 PM IST

एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां आईटीसी और एचयूएल को उत्तराखंड में अपनी विस्तार परियोजनाएं टालनी पड़ सकती हैं।


इसकी वजह है उत्तराखंड में भूमि की कमी। एचयूएल ने उत्तराखंड बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास निगम (सिडकुल) से हरिद्वार में 50 एकड़ भूमि की मांग की थी। लेकिन सरकार की नई भूमि आवंटन नीति के तहत कंपनी को मात्र 15 एकड़ भूमि ही मिल पाई है।

कंपनी ने हरिद्वार औद्योगिक परिसर में 510 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की थी। हरिद्वार परिसर में पहले से ही कंपनी का एक संयंत्र है। इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, ‘हरिद्वार में मांग से कम भूमि मिलने के कारण कंपनी अपनी विस्तार परियोजना को टाल सकती है।’

इसी तरह आईटीसी को भी हरिद्वार में 30 एकड़ जमीन चाहिए थी। लेकिन कंपनी को सिर्फ 9 एकड़ जमीन ही मिल पाई है। आईटीसी ने भी लगभग 260 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की थी। अधिकारी ने बताया कि जरूरत के हिसाब से कम जमीन मिलने के कारण आईटीसी भी इस निवेश को रोक सकती है।

सिडकुल को जुलाई में राज्य में मौजूद अलग-अलग औद्योगिक परिसरों के लिए लगभग 150 आवेदन मिले थे। लेकिन पंतनगर औद्योगिक परिसर से भी कम भूमि होने के बावजूद हरिद्वार औद्योगिक परिसर में भूमि के लिए कई आवेदन आए थे।

राज्य में ज्यादा से ज्यादा कंपनियों को बुलाने के लिए सरकार ने कंपनियों को दिए जाने वाले प्लॉटों का आकार घटा दिया था। अधिकारियों ने बताया कि सरकार स्टरलाइट और कंट्रोल ऐंड स्विचगियर को भी मांग के मुताबिक भूमि का आवंटन नहीं कर पाई है।

लेकिन पंतनगर औद्योगिक परिसर में हालात उतने खराब नहीं हैं। पंतनगर में टाटा मोटर्स, डेल्टा इंडिया और हिंदुस्तान जिंक अपनी घोषणाओं के मुताबिक ही विस्तार कर रही हैं।

यहां पर सबसे ज्यादा जमीन मिली टाटा मोटर्स को । कंपनी को छोटी कार नैनो के निर्माण संयंत्र के लिए 45 एकड़ अतिरिक्त जमीन दी गई है।

First Published - January 27, 2009 | 8:56 PM IST

संबंधित पोस्ट