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यूपी में कारोबार पकड़ रहा धीरे-धीरे रफ्तार

Last Updated- December 14, 2022 | 11:22 PM IST

बुरा वक्त बीत चुका है, लेकिन अच्छा आने में अभी भी कुछ देर है। महामारी के दौरान दो महीने के लॉकडाउन और अब अनलॉक के चार महीने बीत जाने के बाद उत्तर प्रदेश में कारोबारी गतिविधियां काफी हद तक सामान्य हो चुकी हैं। ज्यादातर औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन हो रहा है और मजदूरों की समस्या न के बराबर है। हालांकि कारोबारियों के सामने पुराने स्टॉक का ढेर निपटाने, नए ऑर्डर कम मिलने और पुराने बकाया की वसूली की दिक्कत जरूर है।
धंधे को ढर्रे पर लाने के लिए अनलॉक के दौर में खुदरा, आभूषण, रियल एस्टेट और सेवा क्षेत्र में ऑफरों की भरमार है और घर आकर सेवाएं देने की होड़ है। इन सबके बावजूद कम से कम रियल एस्टेट और सराफा कारोबारियों के लिए हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं।
प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में कारखाने चल जरूर रहे हैं मगर अपनी क्षमता का दो-तिहाई उत्पादन ही कर रहे हैं। यहां लॉकडाउन के समय बड़ी तादाद में मजदूरों का पलायन हो गया था, जो अब काफी तादाद में लौट चुके हैं। कानपुर के होजरी उद्यमी और जेट इंडस्ट्रीज के प्रमुख बलराम नरूला बताते हैं कि अब मजदूरों की दिक्कत तो बस 20 फीसदी ही रह गई है और आने वाले एक महीने में वह भी नहीं रहेगी। हालांकि उनका कहना है कि पहले जैसी स्थिति बहाल होने में कम से कम छह महीनों का समय और लग सकता है। नरूला कहते हैं कि उद्यमियों ने काफी हिम्मत दिखाई है और काफी हद तक कारोबार पटरी पर ले आए हैं।
वाराणसी में उद्यमियों की समस्याएं और निपटने के तरीके बाकी प्रदेश से अलग तो नही हैं, मगर यहां धैर्य खासा नजर आता है। सिल्क उद्यमी और सिनर्जी फैब्रीकेट के रजत मोहन पाठक बताते हैं कि लॉकडाउन के 120 दिनों तक नकदी शून्य रही और खुलने के बाद स्टॉक का अंबार, बड़े पैमाने पर माल वापसी के साथ ही तकादेदारों की दिक्कत से जूझना पड़ा। हालांकि सकारात्मक सोच के सहारे कम से कम वाराणसी के उद्यमियों ने फिर से काम शुरू किया और आज काफी हद तक संभल चुके हैं। पाठक के मुताबिक वेंडरों और कैटरर्स जैसे धंधों में अब बगैर अग्रिम के लोग काम नहीं करना चाहते हैं। आक्रामक ऑफरों के साथ सराफ, खुदरा विक्रेता और यहां तक कि परिधान व्यवसायी बाजार में धंधा जमाने में लगे हैं। उनका कहना है कि बाजारों में अब तो खासी चहल-पहल हो गई है और कारोबारी पहले की स्थिति से उबर चुके हैं।
हालांकि रियल एस्टेट के लिए अभी बहुत कुछ सुधरना बाकी है। प्रदेश के ज्यादातर बड़े शहरों में बीते छह महीनों से शायद ही कोई नई परियोजना शुरू की गई है। निजी क्षेत्र के रियल एस्टेट कारोबारी पुरानी परियोजनाओं की बिना बिकी संपत्तियों को निपटाने में जुटे हैं। कारोबारियों का कहना है कि उन पर सुस्ती की मार तो कोरोना काल से पहले ही पड़ रही थी और लॉकडाउन ने तो कमर ही तोड़ दी है। हालात यहां तक खराब है कि सरकारी आवासीय योजनाओं के मकानों के पंजीकरण की तारीखों को बार-बार ग्राहकों के न होने के चलते बढ़ाना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सस्ते मकानों के पंजीकरण की तारीख तक दो बार बढ़ाई गई हैं। रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि बाकियों के लिए सामान्य हालात शायद आगे के कुछ महीनों में आ जाएं, लेकिन उनके लिए तो इंतजार लंबा है।
उद्यमियों से कुछ इतर हाल खुदार बाजारों का भी नहीं है। राजधानी लखनऊ से लेकर कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज व अन्य बड़े शहरों में बाजार गुलजार होने लगे हैं, लेकिन खरीदार कम हैं। राजधानी के व्यापारी नेता अजय त्रिवेदी का कहना है कि लोग जरूरी चीजों की ही खरीददारी कर रहे हैं और विलासिता की वस्तुओं की बिक्री पर असर अब भी दिख रहा हैं। उनका कहना है कि त्योहारी सीजन शुरू हो रहे हैं और प्रतिबंध भी नाममात्र के ही रह गए हैं। आने वाले समय में बाजार में तेजी जरूर नजर आएगी।

First Published - October 2, 2020 | 8:52 PM IST

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