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Editorial: 2021 की लंबित जनगणना कब होगी पूरी?

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दुनिया के सबसे बड़े चुनावों के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से होने के बाद डिजिटल जनगणना से भारत की सूचना प्रौद्योगिकी शक्ति की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी।

Last Updated- July 02, 2024 | 9:32 PM IST
2021 की लंबित जनगणना कब होगी पूरी?, When will the pending census of 2021 be completed?

नई सरकार के समक्ष लंबित कई प्राथमिकताओं में से एक यह भी है कि हर दशक होने वाली जनगणना को तत्काल अंजाम दिया जाए। दशकीय जनगणना 2021 में होनी थी लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया। अब महामारी का असर न्यूनतम हुए दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है लेकिन जनगणना के मोर्चे पर कोई प्रगति होती नहीं दिख रही है।

जनगणना के पहले राज्यों को जिलों, तहसीलों और कस्बों आदि की प्रशासनिक सीमाओं को बंद करने का आदेश दिया जाता है लेकिन इसे नौ बार टाला जा चुका है। ताजा जानकारी के मुताबिक जनगणना कराने को लेकर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

जनकल्याण और मुफ्त उपहारों को लेकर सार्वजनिक तौर पर जबरदस्त बहसों तथा जाति जनगणना की मांगों के बीच यह अस्वाभाविक ही है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने इस महत्त्वपूर्ण काम को प्राथमिकता नहीं दी जबकि 150 सालों में पहली बार यह काम स्थगित हुआ, वह भी बिना किसी स्पष्ट समय सीमा के। चूंकि ताजा जनगणना डिजिटल रूप में होनी है और इसमें आंकड़ों को इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में भरना है इसलिए इसे अंजाम देना उतना कठिन और समय खपाऊ नहीं होगा जितना कि अतीत में होता रहा है।

दुनिया के सबसे बड़े चुनावों के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से होने के बाद डिजिटल जनगणना से भारत की सूचना प्रौद्योगिकी शक्ति की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। इसके बजाय भारत फिलहाल उन 120 देशों में शामिल है जिन्होंने महामारी का हवाला देकर जनगणना की कवायद को रोक रखा है। कई अन्य देशों मसलन चीन, बांग्लादेश और नेपाल ने महामारी के दौरान भी जनगणना की है।

भारत उन 44 देशों में शामिल है जिन्होंने अब तक जनगणना नहीं की है। ऐसा करने वाले अन्य देशों में यमन, म्यांमार, यूक्रेन, श्रीलंका, अफगानिस्तान तथा सब-सहारा अफ्रीका के देश शामिल हैं जो किसी न किसी तरह के संकट से जूझ रहे हैं।

जनगणना जैसी गहन जनांकिकीय कवायद अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। भारत जैसे आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता वाले देश में तो इसकी आवश्यकता और भी अधिक है। उदाहरण के लिए यह आबादी के आकार जैसी बुनियादी जानकारी मुहैया कराता है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार भारत की आबादी चीन से अधिक हो चुकी है और 1.4 अरब लोगों के साथ हम दुनिया में सबसे बड़ी आबादी वाले देश बन चुके हैं।

विडंबना यह है कि भारत सरकार के पास आबादी को लेकर कोई नई आधिकारिक जानकारी नहीं है। जनगणना को बार-बार स्थगित किए जाने के बीच भारत की आधिकारिक आबादी अभी भी 1.2 अरब है। अहम राष्ट्रीय सर्वेक्षण मसलन खपत सर्वे, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे, खाद्य सुरक्षा अधिनियम की कवरेज, प्रवासन के रुझान की समझ आदि जनगणना के ताजा आंकड़ों पर निर्भर करते हैं। हमारे यहां पिछली जनगणना 2011 में हुई थी।

यह संभव है कि बड़ी तादाद में कल्याण योजनाएं गलत ढंग से लक्षित हों, उनकी फंडिंग अपर्याप्त अथवा अनावश्यक हो क्योंकि आबादी को लेकर नई और अद्यतन जानकारी उपलब्ध नहीं है। बिना नई जनगणना के 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाएं 13 साल पुराने जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होंगी।

सरकार के लिए यही बेहतर होगा कि वह स्पष्ट बताए कि उसकी जनगणना को कब तक कराने की योजना है। वह इसे इस वर्ष कराना चाहती है या अगले वर्ष। उसे यह भी बताना चाहिए कि क्या अगली जनगणना का समय इससे प्रभावित होगा? यह महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अन्य चीजों के साथ परिसीमन और संसद तथा राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण का क्रियान्वयन भी 2026 के बाद होने जनगणना पर निर्भर है।

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First Published - July 2, 2024 | 9:32 PM IST

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