भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट जवाहर लाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (जेएनपीए) अगले कुछ वर्षों में अपने आधारभूत ढांचे का विस्तार 1.2 करोड़ ट्वेंटी फुट इक्विलेंट यूनिट्स (टीईयू) क्षमता तक करेगा। यह जानकारी जेएनपीए के चेयरपर्सन गौरव दयाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को साक्षात्कार में दी।
दयाल ने कहा, ‘हम टर्मिनलों के संचालन में अधिक दक्षता के साथ अपनी मौजूदा क्षमता को लगभग 1.2 करोड़ टीईयू तक बढ़ाने में सक्षम होंगे। यह जेएनपीए की अंतिम क्षमता होगी। इसका कारण यह है कि नया टर्मिनल विकसित करने के लिए कोई नया वॉटरफ्रंट उपलब्ध नहीं है – यह भौगोलिक सीमा है।’
अभी पांच कंटेनर टर्मिनलों की संयुक्त क्षमता 1.01 करोड़ टीईयू है, जेएनपीए कैलेंडर वर्ष 2025 में संभवत: 80 लाख टीईयू क्षमता को अतिरिक्त संभाल पाएगा। लिहाजा वह सालाना आधार पर 13 प्रतिशत वृद्धि कर पाएगा।
बंदरगाह ने पिछले कुछ समय में 10-12 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की है। दयाल ने कहा, जेएनपीए वृद्धि की इस गति से अगले 3-4 वर्षों में अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकता है। इसके बाद भविष्य में वृद्धि महाराष्ट्र में आगामी वाढवण बंदरगाह के जरिए होगी। वाढवण बंदरगाह को नए सिरे से बड़ी बंदरगाह परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है।
अमेरिका की सरकार के नए घोषित शुल्कों के कारण वैश्विक स्तर पर व्यापार बाधित हुआ है। हालांकि इसका जेएनपीए के कार्गो पर सीमित असर पड़ा है। उन्होंने बताया, ‘मामूली कमी आई थी। शुल्क की आशंका के कारण कार्गो की मात्रा में एकदम से 12-13 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। लेकिन साल के अंत में गिरावट आई थी। लिहाजा स्थिति बराबर होनी चाहिए।’
जेएनपीए की विशेषज्ञता कंटेनर व्यापार और उसके विविधीकृत कार्गो में है। हालांकि अमेरिका को निर्यात सुस्त हुआ लेकिन भारत के निर्यातकों के अन्य मार्केट तलाशने के कारण कुल व्यापार की मात्रा स्थिर रही है। दयाल ने कहा कि जेएनपीए की भूमिका मुख्य तौर पर सुविधाएं मुहैया कराने की रही हैं।
अगले दशक में वृद्धि का वास्तविक इंजन जेएनपीए के मौजूदा बंदरगाह से परे होगा। मुंबई के दक्षिण स्थित वाढवण को विश्व के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट में से एक होने का अनुमान लगाया गया है। वाढवण बंदरगाह के पूरी तरह विकसित होने पर क्षमता 2.3-2.5 करोड़ टीईयू होगी।