देश के दूसरे सबसे बड़े हवाई कार्गो केंद्र मुंबई हवाई अड्डे पर मालवाहक विमानों के संचालन को 10 महीने के लिए रोकने के प्रस्ताव से निर्यात में बाधा आ सकती है। भारत के एयर कार्गो एजेंटों ने आगाह किया है कि इससे माल भाड़ा बढ़ सकता है और वैश्विक कार्गो केंद्र के रूप में देश की साख को भी नुकसान पहुंच सकता है।
अदाणी समूह के नेतृत्व वाली मुंबई इंटरनैशनल एयरपोर्ट (मायल) ने 11 दिसंबर को एयर कार्गो ऑपरेटर सहित विमानन क्षेत्र के हितधारकों को सूचित किया था कि मुंबई हवाईअड्डा अपने मुख्य रनवे की सतह को नए सिरे से बनाने, एक नया टैक्सीवे बनाने और मालवाहक विमानों द्वारा माल की चढ़ाई-उतराई के लिए उपयोग किए जाने वाले एप्रन के पुनर्निर्माण के लिए अगस्त 2026 से मई 2027 तक हवाई अड्डे से मालवाहक उड़ानों को पूरी तरह से बंद कर देगा।
एयर कार्गो एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसीएएआई) ने 19 दिसंबर को मायल से आग्रह किया था कि वह इतने ‘लंबे समय’ के लिए मालवाहक विमानों के संचालन को पूरी तरह से बंद करने के निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करे और एक ऐसा मॉडल तैयार करे जिससे संचालन जारी रह सके। इस मामले में जानकारी के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड ने मायल से संपर्क किया मगर जवाब नहीं आया।
वित्त वर्ष 2024-25 में मुंबई हवाई अड्डे ने लगभग 8,89,900 टन कार्गो का जिम्मा संभाला जो उस वर्ष देश के कुल एयर कार्गो का लगभग एक चौथाई है। संगठन ने आगाह किया है कि 10 महीने के लिए मालवाहक विमानों के संचालन को निलंबित करने से माल उठाव की क्षमता बाधित होगी और माल भाड़ा दरों में काफी इजाफा होगा। उन्होंने कहा, ‘इससे भारतीय निर्यात की निरंतर वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।’
संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि प्रस्तावित 10 महीने की समयसीमा और बढ़ सकती है, जिससे और व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। संगठन ने कहा, ‘यह बिल्कुल संभव है कि 10 महीनों के लिए नियोजित कार्य कुछ और महीनों के लिए बढ़ा दिए जाएं जिसके बाद विमानन कंपनियों के पास अपने मालवाहक विमानों को वापस लाना तत्काल संभव नहीं होगा क्योंकि उन विमानों का कहीं और से परिचालन किया जा रहा होगा। मायल की सहायक कंपनी द्वारा विकसित शहर का दूसरा हवाई अड्डा नवी मुंबई हवाई अड्डा ने पिछले सप्ताह से उड़ानों का संचालन शुरू कर दिया है।