इस बात पर दो राय नहीं हो सकती कि 2025 आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) को एक नए मुकाम पर पहुंचाने वाला साल रहा है। विभिन्न संकेतों और रुझानों से यह बात साबित हो जाती है। एआई तकनीक एवं साधन व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं, डेवलपर और कंटेंट क्रिएटरों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गए। इनकी मदद से लोगों के लिए लिखने, कोडिंग, डिजाइन के तौर-तरीकों और खोज (सर्च) में काफी बदलाव आए। मगर बड़े उद्यमों में एआई अब तक फर्राटा नहीं लगा पाई है। भारी भरकम निवेश के बावजूद एआई तकनीक इस्तेमाल और व्यापक व्यावसायिक लाभ देने के स्तर पर संघर्ष करती दिख रही है। इसे देखते हुए एआई को लेकर उत्साह और इसके असर के बीच फर्क साफ दिखने लगा है।
एआई की स्थिति पर मैकिंजी ग्लोबल का सर्वे दर्शाता है कि विश्व स्तर पर लगभग 90 फीसदी उद्यम अपने संगठन के किसी न किसी हिस्से में एआई का उपयोग कर रहे हैं। मगर जब उनसे पूछा गया कि उनमें कितने उद्यम इस तकनीकी के मौजूदा इस्तेमाल को व्यापक स्तर पर ले गए हैं तो आंकड़े उत्साहजनक नहीं रहे। ऐसे उद्यमों की संख्या महज 7 फीसदी रह गई।
एमआईटी प्रोजेक्ट नंदा की रिपोर्ट, ‘द जेन एआई डिवाइड: स्टेट ऑफ एआई इन बिजनेस 2025’ के निष्कर्ष इस खामी की पुष्ट कर देते हैं। जेनरेटिव एआई में 30-40 अरब डॉलर के निवेश के बावजूद लगभग 95 प्रतिशत संगठनों को न के बराबर फायदा (रिटर्न) मिला है। इसका नतीजा यह हुआ है कि खरीदारों (उद्यमों, मध्यम आकार की कंपनियां और एसएमबी) और निर्माताओं (स्टार्टअप, विक्रेताओं और कंसल्टेंसी कंपनियां) में स्पष्ट अंतर दिख रहा है। केवल 5 फीसद एकीकृत एआई परियोजनाएं लाखों डॉलर कमा रही हैं जबकि ज्यादातर नफा-नुकसान के बहीखाते पर कोई विशेष प्रभाव नहीं छोड़ पा रही हैं।
मैकिंजी ऐंड कंपनी में सीनियर पार्टनर नोशीर काका इन निष्कर्षों से सहमत हैं। काका कहते हैं,‘एआई के इस्तेमाल और वास्तविक लाभ के बीच अंतर तीन मुख्य बातों पर निर्भर करता है। सबसे पहले अधिकांश उद्यम अपने व्यावसायिक खंड की नए सिरे से कल्पना करने में विफल रहते हैं। एआई को बड़े बदलाव लाने नवाचार और विकास का एक मजबूत जरिया समझने के बजाय दक्षता में वृद्धि या लागत में कमी का एक औजार माना जाता है। जो कंपनियां सफल होती हैं उनका लक्ष्य 2 से 10 गुना बदलाव लाना रहता है और इस पर विचार हरेक खंडों के विशेषज्ञों को करना चाहिए न कि प्रौद्योगिकी टीमों द्वारा।’
उनका कहना है कि संगठन कार्य प्रवाह के बजाय प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण के साथ शुरुआत करते हैं। प्रक्रियाओं को एक सिरे से दूसरे सिरे तक फिर से तैयार कर नए साधन अपनाए जाते हैं जिससे लंबे समय तक क्रियान्वयन का झंझट लगा रहता है और प्रभाव भी सीमित रहता है। तकनीक का ताना-बाना मॉड्यूलर, विस्तार योग्य, सुरक्षित और स्वामित्व की वाजिब
लागत के साथ तैयार किए जाने की आवश्यकता है मगर यह व्यवसाय की समस्या स्पष्ट रूप से फिर से परिभाषित किए जाने के बाद ही होना चाहिए।
मैकिंजी ऐंड कंपनी में सीनियर पार्टनर नोशीर काका ने कहा,‘उद्यम संगठनात्मक पुनर्संयोजन को अधिक तवज्जो नहीं देकर गलती कर बैठते हैं। एआई आगे बढ़ाने के लिए नए प्रशासन, तेजी से निर्णय लेने की क्षमता, निरंतर कौशल विकास और नेतृत्व स्वामित्व की आवश्यकता होती है। अगर नेतृत्वकर्ता स्वयं एआई का उपयोग और उसके लाभ नहीं दिखा सकते हैं तो इसे (एआई) अपनाने में देरी होती है। साथ में ये तीन स्तंभ एक गुणक समीकरण बनाते हैं। केवल एक में निवेश करने से एआई का लाभ नहीं दिखता है मगर तीनों पर ध्यान देने से एआई अंततः आगे बढ़ सकती है।’
एआई में निवेश के बहुत अधिक फायदा नहीं दिखने से उद्यम लागत संरचनाओं को नया आकार दे रहे हैं यह काम सबसे अधिक कर्मचारियों की संख्या में कमी के जरिये किया जा रहा है। पिछले एक साल में कई बड़ी प्रौद्योगिकी और सलाहकार (कंसल्टिंग) कंपनियों ने छंटनी की घोषणा की है। इसके लिए वे स्वचालन, एआई की मदद से कोडिंग और बैक-ऑफिस अनुकूलन का हवाला दे रही हैं।
हालांकि, कंपनियां नौकरी में कटौती के लिए सीधे एआई को जिम्मेदार ठहराने से बच रही हैं मगर इतना तो स्पष्ट है कि राजस्व में इजाफा नहीं होते देख कंपनियां एआई का उपयोग कारोबार आगे बढ़ाने के बजाय लागत कम करने के लिए कर रही हैं। लेऑफ डॉट एफवाई के अनुसार 2025 में विश्व स्तर पर लगभग 257 कंपनियों से लगभग 1,22,549 तकनीकी कर्मचारियों की छंटनी की।
साल 2026 में एआई निवेश से फायदा अब तक अधिक नहीं रहने के कारण कई लोगों का मानना है कि वर्ष 2026 उद्यम एआई के लिए एक निर्णायक वर्ष हो सकता है। एंटरप्राइज एआई एडॉप्शन पर आईएसजी के सर्वेक्षण में कहा गया है कि उत्पादन में एआई के इस्तेमाल के मामले 2024 के बाद दोगुना हो गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है,‘भारी निवेश के बावजूद कई उद्यम एआई के इस्तेमाल और उससे होने वाले लाभ के बीच अंतर की शिकायत करते हैं। उनके अनुसार एआई से कार्य क्षमता तो बढ़ती है मगर कारोबार आगे बढ़ने में समय लग जाता है। आईएसजी के सर्वेक्षणों में लगभग आधे उद्यमों को 2026 या आगे एआई द्वारा संचालित सार्थक कारोबार विकास की उम्मीद है। एआई इस्तेमाल में तेजी लाने के लिए नेतृत्वकर्ताओं को न केवल लागत बचत और स्वचालन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए बल्कि विकासोन्मुख इस्तेमाल के मामलों (नई उत्पाद डिजाइन, ग्राहक अनुभव और उद्योग-विशिष्ट पुनर्निर्माण) पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।’
कैपजेमिनाई के एआई फ्यूचर्स लैब के प्रमुख मार्क रॉबर्ट्स ने उद्यम व्यवहार में बदलाव पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि कंपनियां कई प्रयोग आगे बढ़ाने के बजाय तेजी से बड़े पैमाने पर एआई को कारगर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। रॉबर्ट्स ने कहा, ‘हम पहले से ही इन अवधारणाओं के प्रमाणों को मुख्य प्रणालियों में एकीकृत करने के बारे में ग्राहकों के साथ बातचीत होते देख रहे हैं। कई लोग इस बात से सहमत हैं कि एआई ने वह नहीं दिया है जो वह देने में सक्षम है लेकिन हमें आने वाले वर्ष में ठीक-ठाक लाभ दिखने की उम्मीद है।’
कई लोगों का तर्क है कि आने वाला वर्ष उद्यमों के लिए एआई को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ कर देगा। जैसे-जैसे संगठन एआई के वृहद पैमाने पर इस्तेमाल की तरफ बढ़ रहे हैं वैसे ही डेटा एकीकरण एक अहम बाधा के रूप में सामने आ रहा है।
स्नोफ्लेक में उत्पाद के कार्यकारी उपाध्यक्ष क्रिश्चियन क्लेनरमैन ने कहा,‘पिछले 18 महीनों में जो रुझान उभरा है वह यह है कि उद्यम में एआई तभी काम करती है और समझ में आती है जब यह उद्यम डेटा से जुड़ी होती है। अगर आप अपना डेटा एआई से नहीं जोड़ते हैं तो आपके पास केवल ऐसी चैटजीपीटी रह जाएगी जो आपके उत्पादों या ग्राहक सेवाओं के बारे में सवालों के जवाब नहीं दे पाएगी। उद्यमों के आंकड़े ही एआई को इसका संदर्भ उपलब्ध कराते हैं।’
उद्यमों के इन मुद्दों से जूझने के बीच 2026 के लिए एक व्यापक विषय खास तौर पर उभर रहा है और वह है संप्रभु एआई (सॉवरिन एआई)। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच तकनीकी संप्रभुता एक अहम पहलू साबित होता जा रहा है। भारत इस बात का स्पष्ट उदाहरण है जहां अरबों डॉलर निवेश किए गए हैं ताकि संप्रभु एआई की मांग पूरी की जा सके। एमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल ने भारत में लगभग 70 अरब डॉलर निवेश किए हैं।
इस लिहाज से भारत में 2026 में आयोजित होने वाले ग्लोबल एआई समिट की भूमिका काफी बढ़ जाती है और खासकर भारत के लिहाज से। यह शिखर सम्मेलन केवल एक राजनयिक मील का पत्थर नहीं है बल्कि एक मजबूत इरादे का संकेत है। भारत सार्वजनिक बुनियादी ढांचा, जिम्मेदारी से इस्तेमाल और घरेलू क्षमता-निर्माण को ध्यान में रखते हुए एआई अपनाने के अगले चरण को आकार देना चाहता है।
शिखर सम्मेलन की तैयारी में देश भर में 200 से अधिक कार्यक्रमों के आयोजन हो चुके हैं। इन कार्यक्रमों में अब तक 2,00,000 से अधिक छात्र और शोधकर्ता भाग ले चुके हैं।
इंडियाएआई मिशन के लिए 2025 एक प्रमुख बदलाव लेकर आया। इस मिशन के जरिये कंपनियां ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट भारत लाई हैं और स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (एलएलएम) विकसित करना शुरू कर दिया है। 10,372 करोड़ रुपये के इस मिशन में पहले मल्टी-मॉडल एलएलएम भारतजेन की घोषणा ही जिसके बाद इन एलएलएम के निर्माण के लिए चार और स्टार्टअप का चयन किया गया।
इंडियाएआई मिशन के तहत देश में लाई गईं जीपीयू की संख्या 38,000 से अधिक हो गई है जो 10,000 जीपीयू के प्रारंभिक लक्ष्य का लगभग चार गुना है। इसी तरह, एआईकोष डेटासेट प्लेटफॉर्म 20 क्षेत्रों में 3,000 से अधिक डेटासेट और 243 एआई मॉडल तक पहुंच गया।