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कियर स्टार्मर की भारत यात्रा: व्यापार, निवेश और सुरक्षा में बढ़ती साझेदारी

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कियर स्टार्मर की हालिया भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों में हुए हाल में आई गर्मजोशी को आगे बढ़ाना था

Last Updated- October 12, 2025 | 9:39 PM IST
India UK

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कियर स्टार्मर की हालिया भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों में हुए हाल में आई गर्मजोशी को आगे बढ़ाना था। इससे पहले गत जुलाई में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर हुए थे। स्टार्मर के साथ यूके के कारोबारियों का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल भारत आया था। ब्रिटिश सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि इस यात्रा के दौरान भारतीय कंपनियों द्वारा ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में करीब 1.3 अरब पाउंड के निवेश का वादा किया गया है। इसमें टीवीएस मोटर्स द्वारा इंगलैंड के उत्तरी हिस्से में विनिर्माण सुविधाओं के विस्तार की योजना भी शामिल है।

टीवीएस मोटर ने 2020 में ब्रिटिश कंपनी नॉर्टन मोटरसाइकल का अधिग्रहण किया था। इस बीच भारत को उम्मीद है कि नई संयुक्त परियोजनाओं की बदौलत उसे उन्नत नवाचार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। व्यापार सौदा भी भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खोल सकता है। इसमें छोटे बाजार भी शामिल हैं। उदाहरण के लिए रत्न एवं आभूषण क्षेत्र जिसके अमेरिकी व्यापार नीतियों से सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका है, उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में वह यूके को अपना निर्यात दोगुना कर सकता है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने मुंबई में एक फिनटेक सम्मेलन को संबोधित किया। यह इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के वित्तीय और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के बीच करीबी रिश्ते देखने को मिल सकते हैं। ब्रिटेन राजकोषीय मोर्चे पर दिक्कतों से जूझ रहा है और उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था की लागत भी अधिक है। खासतौर पर बायोटेक और फिनटेक क्षेत्रों के साथ ऐसा है।

इन क्षमताओं का प्रतिबिंब उन सहयोग योजनाओं की प्रकृति में दिखाई देता है, जिनका उद्देश्य भारत में जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद द्वारा संचालित संस्थानों तथा भारतीय विज्ञान संस्थान की सुविधाओं को उन्नत करना है। कुछ ऐसी बातें जो अतीत में भारत की प्राथमिकता रही हैं अब उन पर जोर नहीं दिया जा रहा है। उदाहरण के लिए लगता नहीं है कि भारतीयों को वर्क वीजा का मुद्दा बातचीत में दोबारा उभरेगा। इसके पीछे घरेलू राजनीतिक हालात को जिम्मेदार माना जा सकता है।

ब्रिटेन पहुंचने वाले भारतीयों की संख्या पहले ही लगातार बढ़ रही है। 2021 से 2024 के बीच 8.50 लाख प्रवासी भारतीय वहां पहुंचे। इसके बजाय भारतीय और ब्रिटिश सरकारों ने अवैध प्रवासियों की वापसी को लेकर करीबी सहयोग पर सहमति जताई है।

हालांकि सीईटीए के उचित क्रियान्वयन को अंजाम देने के लिए अभी भी काफी कुछ करना बाकी है ताकि भारत की सूक्ष्म, लघु और मझोली कंपनियों सहित सभी कंपनियां इससे लाभान्वित हो सकें। पेशेवरों के लिए परस्पर मान्यता वाले समझौतों को अंतिम रूप देना जरूरी है। यह आसान नहीं होगा क्योंकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं सेवा आधारित हैं।

व्यापार में ई-गवर्नेंस और नियामक सहयोग पर किए गए वादों को पूरा करना भी आवश्यक होगा। ऐसा करके व्यापार समझौते का पूरा लाभ उठाया जा सकता है। सुरक्षा के क्षेत्र में भी आगे काम करने की जरूरत है। भारतीय नौसेना और रॉयल नेवी पहले भी संयुक्त अभ्यास कर चुके हैं। परंतु हिंद महासागर के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। खासतौर पर फ्रांस के साथ त्रिपक्षीय प्रारूप में ऐसा किया जा सकता है।

ब्रिटेन ने बहरीन में अपने नौसैनिक अड्डे में निवेश बढ़ाया है तथा उम्मीद की जा रही है कि वे भारतीय नौसेना के सहयोग और समर्थन में समुद्री डकैती रोकने संबंधी निगरानी और अभियानों को और अधिक प्रभावी रूप से अंजाम दे सकेंगे। भारत-यूके साझेदारी भारत के नजरिये से सबसे कम तनावपूर्ण और सबसे अधिक पारदर्शी साझेदारियों में से एक बनी हुई है और इसके आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों में और अधिक विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।

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First Published - October 12, 2025 | 9:39 PM IST

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