facebookmetapixel
मजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटाबांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर लगाया प्रतिबंध, एक्सपर्ट बोले: इस फैसले से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगादिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकारGrok विवाद में X को सरकार ने दी 72 घंटे की और मोहलत, महिलाओं व बच्चों की तस्वीरों पर केंद्र सख्तकेंद्रीय बजट से पहले IVCA की मांग: AIF ने प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के लिए टैक्स में समानता की मांग कीSMC बिल पर एम. दामोदरन की चेतावनी: सेबी का निवेशकों की सुरक्षा पर फोकस कमजोरविश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक में दावोस जाएंगे भारतीय नेतागण, चौहान और वैष्णव करेंगे अगुआईभारत कोकिंग कोल का आईपीओ शुक्रवार को पेश होगा, ₹1,069 करोड़ जुटाने की तैयारीAI इम्पैक्ट समिट में ग्लोबल साउथ पर फोकस, खुद को AI सर्विस सप्लायर के रूप में पेश करेगा भारत

नई और पुरानी कर प्रणाली में कौन सी रहेगी आपके लिए फायदेमंद

New tax regime: नई कर प्रणाली चुनने वाले करदाताओं के लिए अधिभार की अधिकतम दर 25 फीसदी रखी गई है, जबकि पुरानी कर प्रणाली के तहत करदाताओं के लिए इसकी अधिकतम दर 37 फीसदी है।

Last Updated- May 01, 2024 | 11:52 PM IST
Net direct tax collection rises 7%

नया वित्त वर्ष शुरू होते ही आपका नियोक्ता 2024-25 के लिए कर प्रणाली चुनने के संबंध में आपसे संपर्क कर सकता है। यह निर्णय काफी महत्त्वपूर्ण है। कर प्रणाली का चयन यह निर्धारित करेगा कि आपकी आय पर कर की गणना किस प्रकार की जाएगी। इसलिए यदि आपने सही विकल्प का चयन नहीं किया तो आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है।

साइरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर एसआर पटनायक ने कहा, ‘वित्त अधिनियम, 2023 के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 से (1 अप्रैल 2024 से प्रभावी) नई कर प्रणाली लोगों के लिए डिफॉल्ट कर प्रणाली बन गई है।’

नई कर प्रणाली

नई कर प्रणाली के तहत कर की दरें कम रखी गई हैं, मगर इसमें कटौती और छूट को भी कम कर दिया गया है। इसके तहत करदाता आयकर अधिनियम की धारा 80सी, 80डी, 24 आदि के तहत विभिन्न लोकप्रिय कटौतियों का दावा नहीं कर सकते हैं। हालांकि मानक कटौती और पारिवारिक पेंशन (पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने वाले लोग 15,000 रुपये अथवा पेंशन की एक तिहाई रकम के लिए कटौती का दावा कर सकते हैं) जैसी कुछ कटौतियों को बरकरार रखा गया है।

आरएसएम इंडिया के संस्थापक सुरेश सुराणा ने कहा, ‘यह प्रणाली कर ढांचे को सरल बनाती है और तमाम लोगों के लिए कर का बोझ कम करती है। ऐसा खास तौर पर उन लोगों के लिए किया गया है जिन्हें पुरानी कर प्रणाली के तहत महत्त्वपूर्ण कटौती नहीं मिल पाती है।’

नई कर प्रणाली को अपनाने वाले लोगों के लिए आयकर अधिनियम की धारा 87ए के तहत छूट का लाभ उपलब्ध है। नई कर प्रणाली चुनने वाले करदाताओं के लिए अधिभार की अधिकतम दर 25 फीसदी रखी गई है, जबकि पुरानी कर प्रणाली के तहत करदाताओं के लिए इसकी अधिकतम दर 37 फीसदी है।

पुरानी कर प्रणाली: किसके लिए फायदेमंद

पुरानी कर प्रणाली के तहत करदाता आयकर अधिनियम की धारा 80सी, 80डी, मकान किराया भत्ता आदि विभिन्न कटौतियों और छूटों का लाभ उठा सकते हैं। इससे उनकी कर योग्य आय काफी कम हो जाती है। सिंघानिया ऐंड कंपनी के पार्टनर (प्रत्यक्ष कर) अमित बंसल ने कहा, ‘पुरानी कर प्रणाली के तहत करदाता पूरी तरह स्थापित नियमों एवं प्रक्रियाओं से पहले से ही वाकिफ हैं। इसलिए अधिक निवेश करने और कटौती के अनुकूल खर्च करने वाले करदाताओं के लिए पुरानी कर प्रणाली के तहत कर देनदारियां नई प्रणाली के मुकाबले कम हो सकती हैं।’

नई कर प्रणाली: आपके लिए कितनी सही

नई कर प्रणाली को चुनने का निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि करदाता कितनी छूट और कटौतियों का लाभ उठा सकता है।
पटनायक ने कहा, ‘नई कर प्रणाली युवा करदाताओं के लिए अधिक उपयुक्त होगी क्योंकि उनके पास कोई पुराना दावा नहीं है। नई कर प्राणाली के तहत उन्हें आम तौर पर निचली स्लैब दरों पर कर का भुगतान करना पड़ेगा।’

अगर किसी व्यक्ति की आय 7 लाख रुपये से अधिक है तो उन्हें कटौती के बाद पुरानी कर प्रणाली के तहत अपनी कर देनदारी का अनुमान लगाना चाहिए और उसकी तुलना बिना कटौती के नई कर प्रणाली के तहत अपनी कर देनदारी से करनी चाहिए। पटनायक ने कहा, ‘उसके बाद वे उस कर प्रणाली को अपना सकते हैं जिसके तहत उनकी कर देनदारी कम हो।’

न फायदा न नुकसान की स्थिति

अगर न फायदा न नुकसान की स्थिति है तो दोनों कर प्रणालियों के तहत कर देनदारियों में कोई अंतर नहीं होगा। टैक्समैन के उपाध्यक्ष (अनुसंधान एवं सलाह) नवीन वाधवा ने कहा, ‘हमने विभिन्न स्थितियों में न फायदा न नुकसान के बिंदुओं की गणना की है ताकि करदाताओं को यह निर्धारित करने में मदद मिल सके कि कौन सा विकल्प उनके लिए अधिक फायदेमंद है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति को पुरानी कर प्रणाली के तहत कोई कटौती नहीं मिलती है तो उनके लिए नई कर प्रणाली का चयन अधिक फायदेमंद रहेगा।’

इसी प्रकार, अगर कोई करदाता केवल आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत कटौती का लाभ उठाता है, तो उसके लिए नई कर प्रणाली का चयन फायदेमंद साबित होगा। वाधवा ने कहा, ‘अगर आप आयकर अधिनियम की धारा 80सी और 80डी दोनों के तहत कटौती का लाभ उठाते हैं, तो न फायदा न नुकसान के स्तर वाली आय 8,25,000 रुपये है। आयकर अधिनियम की धारा 115बीएसी के तहत नई कर प्रणाली का चयन तभी फायदेमंद साबित होगा जब आपकी आय इस न फायदा न नुकसान के स्तर से अधिक हो।’

अगर आप आयकर अधिनियम की धारा 80सी, 80डी और 24 (होम लोन पर ब्याज) के तहत कटौती का लाभ उठाते हैं, तो आपको कभी भी नई कर प्रणाली का विकल्प नहीं चुनना चाहिए।

विकल्प का चयन

पेशेवर लोग अथवा व्यावसायिक आय वाले लोग अपने जीवनकाल में केवल एक बार ही दोनों कर प्रणालियों में से किसी का चयन कर सकते हैं। अन्य लोग हर साल अपनी पसंद की कर प्रणाली का चयन कर सकते हैं।

क्लियरटैक्स के मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता ने कहा, ‘पुरानी कर प्रणाली पर वापस जाने के लिए आपको रिटर्न दाखिल करते समय फॉर्म 10 आईईए जमा करना होगा।’ आप अपना रिटर्न दाखिल करते समय भी दोनों कर प्रणालियों के बीच चयन कर सकते हैं।

First Published - May 1, 2024 | 11:32 PM IST

संबंधित पोस्ट