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Systematic Withdrawal Plan: SIP की तर्ज पर म्युचुअल फंड से ऐसे करें निकासी

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SWP निवेशकों को नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि की निकासी की सुविधा उपलब्ध कराता है।

Last Updated- May 12, 2023 | 8:22 AM IST
Mutual Fund

ज्यादातर लोग सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के बारे में जानते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि म्युचुअल फंड (mutual fund) से रिडेम्प्शन यानी निकासी भी एकमुश्त (लंप सम) के बजाए सिस्टमैटिक तरीके से की जा सकती है। और यह संभव है सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (systematic withdrawal plan) यानी SWP के जरिए।

आज बात करते हैं इसी प्लान की :

सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) क्या है ?

SWP निवेशकों को नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि की निकासी की सुविधा उपलब्ध कराता है। इस स्कीम के तहत आप म्युचुअल फंड में जमा निवेश की राशि को एकमुश्त निकालने के बजाय नियमित तौर पर — मसलन प्रत्येक महीने, तिमाही, छमाही या सालाना तौर पर — निकाल सकते हैं। वैसे मासिक विकल्प ज्यादा लोकप्रिय है। निवेशक चाहें तो केवल एक निश्चित रकम निकालें या फिर निवेश पर मुनाफे की राशि /रिटर्न को निकाल सकते हैं। इसे एक उदाहरण से समझते हैं:

यदि आपके पास फिलहाल किसी म्युचुअल फंड स्कीम के 10 हजार यूनिट हैं जिसका प्रति यूनिट नेट एसेट वैल्यू (NAV) 50 रुपये है तो आपका टोटल इन्वेस्टमेंट वैल्यू 10,000 X 50 = 5 लाख रुपये हुआ। यदि आप प्रति महीने 5,000 रुपये का SWP प्लान चुनते हैं तो पहले महीने आपके 100 यूनिट का रिडेम्प्शन हो जाएगा। फिर आपके पास 9,900 यूनिट बचेंगे। अगले महीने यदि NAV गिरकर 50 रुपये से 45 रुपये हो जाता है तो आपके बचे हुए 9,900 यूनिट (वैल्यूएशन 4,45,500 रुपये) में से 111 यूनिट का रिडेम्प्शन हो जाएगा। कहने का मतलब यह कि प्रति महीने NAV के हिसाब से यूनिट में कमी होती जाएगी।

कब शुरू कर सकते हैं SWP?

SWP की शुरुआत कभी भी की जा सकती है। पहला निवेश करते ही इसे शुरू किया जा सकता है। अगर किसी स्कीम में निवेश कर रहे हैं तो आप उसमें SWP विकल्प को एक्टिवेट कर सकते हैं। कभी भी रेगुलर कैश फ्लो की जरूरत के लिए भी इसे शुरू किया जा सकता है।

टैक्सेशन (taxation)

इस स्कीम में विड्रॉल (withdrawal) की राशि में रिटर्न का जो कंपोनेंट होगा केवल उसी पर टैक्स लगेगा। हालांकि टैक्सेशन के नियम इक्विटी और डेट फंड की तरह ही हैं।

1 अप्रैल 2023 से लागू नए नियम के अनुसार डेट फंड (debt mutual fund) को रिडीम करने के बाद जो कैपिटल गेन होगा वह आपकी इनकम में जुड़ जाएगा और आपको टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा।

इक्विटी फंड (equity mutual fund) को लेकर टैक्स नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मतलब इक्विटी फंड को एक साल से पहले रिडीम करने पर कैपिटल गेन पर 15 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स जबकि एक साल के बाद रिडीम करने पर सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा की इनकम पर 10 फीसदी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स देना होगा। SWP पर टीडीएस (TDS) का प्रावधान नहीं है।

फायदे

SIP की तरह SWP में भी एवरेजिंग का फायदा मिलता है, क्योंकि आम निवेशक के लिए मार्केट को टाइम करना (तेजी या मंदी का सटीक आकलन करना) आसान नहीं है। इसलिए अगर नियमित अंतराल पर पैसों की जरूरत है तो इस विकल्प को आजमाया जा सकता है।

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First Published - May 9, 2023 | 9:29 AM IST

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