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अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट का खतरा: क्रिस वुड

विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट का जोखिम बढ़ रहा है। टैरिफ बढ़ोतरी से वैश्विक मंदी की आशंका गहराई है।

Last Updated- April 04, 2025 | 11:09 PM IST
Christopher Wood

जेफरीज में इक्विटी रणनीति के वैश्विक प्रमुख क्रिस्टोफर वुड ने निवेशकों को लिखे अपने नोट ‘ग्रीड ऐंड फियर’ में चेतावनी दी है कि अमेरिकी शेयर बाजार में ‘वाटरफॉल डिक्लाइन’ यानी बड़ी गिरावट का जोखिम बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जोखिम केवल ऊंचे भावों को लेकर नहीं है, बल्कि पैसिव निवेश की घबराहट में बिकवाली है। वुड ने लिखा है, ‘टैरिफ में वृद्धि साफ तौर पर बुरी खबर है और 1930 के स्मूट-हॉले टैरिफ ऐक्ट की ऐतिहासिक मिसाल से यह जाहिर भी होता है।’

डाउ जोंस इस सप्ताह के शुरू में महज एक सत्र में 1,700 अंक गिर गया था और अपने ऊंचे स्तर से 10 फीसदी नीचे गिरावट के जोन में आ गया। एसऐंडपी 500 सूचकांक में 5 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि नैस्डैक 6 प्रतिशत कमजोर हुआ और इसमें 1,000 से अधिक अंक की गिरावट आई। इसकी वजह राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के जवाबी शुल्क हैं जिनने देश के मंदी की चपेट में आने की आशंका बढ़ा दी है। अमेरिकी आर्थिक गतिविधियों में गिरावट का पता देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगातार दो तिमाहियों में हुई कमी से लगता है।

फिच रेटिंग्स के विश्लेषकों के अनुसार अमेरिकी टैरिफ ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं जो वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण बदल रहे हैं, अमेरिका में मंदी के जोखिम को काफी बढ़ा रहे हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को घटाने की क्षमता पर असर डाल रहे हैं। उनका मानना है कि अनुमान से ज्यादा टैरिफ की वजह से 2025 में अमेरिकी वृद्धि मार्च 2025 के 1.7 फीसदी के अनुमान के मुकाबले और धीमी रह सकती है।

फिच ने कहा, ‘शुल्क बढ़ने से उपभोक्ता कीमतों में तेजी आएगी और अमेरिका में कॉरपोरेट मुनाफे की रफ्तार धीमी पड़ेगी। ऊंचे कीमतों से वास्तविक पारिश्रमिक प्रभावित होगा, जिसका उपभोक्ता खर्च पर असर दिखेगा। कम मुनाफे और नीतिगत अनिश्चितता से कारोबारी निवेश पर प्रभाव पड़ेगा।’

क्या भारतीय बाजार बच पाएंगे?

विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार वैश्विक बाजार में उथल-पुथल से काफी हद तक बचे हुए हैं क्योंकि शुल्कों का असर एक हद तक दिख चुका है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ट्रंप के जवाबी शुल्क से प्रभावित क्षेत्रों पर इसका असर जारी रहेगा क्योंकि निवेशक जोखिम लेने से बचेंगे और प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहेंगे। उनका मानना है कि भारतीय वृहद आर्थिक स्थिति मजबूत है और देश चौंकाने वाले नकारात्मक कदमों का सामना करने में सफल रह सकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि शेयर बाजार वैश्विक घटनाक्रम से पूरी तरह से अलग नहीं रहेंगे।

लेकिन कंपनियों के परिणाम और कंपनियों के अनुमान, गर्मी के मौसम की स्थिति और आर्थिक गतिविधियों पर इसका प्रभाव, मॉनसून की चाल और मुद्रास्फीति पर इसका प्रभाव, केंद्रीय बैंक की नीतियां और टैरिफ के संबंध में अमेरिका के साथ बातचीत जैसे घरेलू कारकों पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और शोध प्रमुख जी चोकालिंगम ने कहा, ‘अगर अमेरिका में मंदी आती है तो डॉलर कमजोर होगा, तेल की कीमतें भी गिरेंगी। यह भारत के लिए अच्छा संकेत है।’

First Published - April 4, 2025 | 11:09 PM IST

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