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KYC नियमों में व्यापक संशोधन पर विचार, निवेशकों की ऑनबोर्डिंग होगी आसान

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नई व्यवस्था में एक बार जानकारी अपलोड हो जाने और केआरए से मान्य हो जाने के बाद इसे मध्यस्थों के बीच साझा किया जा सकता है

Last Updated- January 16, 2026 | 10:24 PM IST
KYC

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को एक परामर्श पत्र जारी किया। इसमें ग्राहक को जोड़ने की प्रक्रिया को सरल बनाने, मध्यस्थों के बीच दोहराव कम करने और केवाईसी पंजीकरण एजेंसियों (केआरए) में जोखिम प्रबंधन मजबूत करने के मकसद से अपने ग्राहक को जानें यानी केवाईसी ढांचे में सुधार का प्रस्ताव किया गया है।

अगर इन प्रस्तावों को लागू किया जाता है तो इनसे महत्त्वपूर्ण पूरक केवाईसी जानकारी का एक ही जगह स्टोरेज और पोर्टेबिलिटी संभव हो सकेगी, केवाईसी रिकॉर्डों का समय-समय पर दोबारा सत्यापन अनिवार्य हो जाएगा, निवेशकों की कुछ श्रेणियों के लिए दस्तावेजीकरण की जरूरतों में ढील दी जाएगी और खाता बंद करने और मोबाइल नंबर सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित बनाया जाएगा।

एक अहम प्रस्ताव यह है कि आमतौर पर ली जाने वाली पूरक जानकारी जैसे आय सीमा, व्यवसाय, जन्म स्थान और देश, फाक्टा विवरण और राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्ति की स्थिति को केआरए स्तर पर एक ही जगह किया जाए। अभी ऐसी जानकारी प्रत्येक मध्यस्थ अलग-अलग एकत्रित करता है। लिहाजा, ग्राहकों को बार-बार वही विवरण देने पड़ते हैं।

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नई व्यवस्था में एक बार जानकारी अपलोड हो जाने और केआरए से मान्य हो जाने के बाद इसे मध्यस्थों के बीच साझा किया जा सकता है, जिससे निवेशक अगर किसी नए ब्रोकर, म्युचुअल फंड या अन्य बाजार मध्यस्थ से संपर्क करेगा तो उसकी परेशानी काफी कम हो जाएगी।

सेबी ने आय स्लैब को मानकीकृत करने और केआरए को स्वतंत्र रूप से सत्यापित पूरक जानकारी को टैग करने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव किया है। इससे केवाईसी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और उपयोगिता में सुधार होगा। पुराने केवाईसी रिकॉर्ड की समस्या से निपटने के लिए सेबी का प्रस्ताव है कि सभी केवाईसी रिकॉर्ड की समीक्षा कम से कम हर पांच साल में एक बार की जाए।

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First Published - January 16, 2026 | 10:13 PM IST

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