भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शुक्रवार को कहा कि नियामक बॉन्ड डेरिवेटिव को सुगम बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (रीबी) के साथ मिलकर काम कर रहा है।
पांडेय ने प्रतिभूति बाजार पर आयोजित संगोष्ठी ‘संवाद’ में कहा, सेबी और आरबीआई दोनों ही बॉन्ड डेरिवेटिव पर मिलकर काम कर रहे हैं और एक अतिरिक्त मौका लेकर आ रहे हैं। बॉन्ड में सेकेंडरी ट्रेडिंग हो रही है। लेकिन इसमें और भी सुधार की आवश्यकता है। मेरा मानना है कि बॉन्ड डेरिवेटिव इस बाजार में और अधिक नकदी और बाजार बढ़ाने का एक और तरीका साबित होंगे।
उन्होंने कहा, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में उद्योग और सेवाओं को दिए गए कुल बैंक ऋण में बॉन्ड बाजार का आकार 40 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया है। फिर भी यह चीन जैसे देशों की तुलना में कम है।
उन्होंने कहा, हमारी दिक्कत यह है कि हमारे पास बहुत अधिक जारीकर्ता नहीं हैं। जारीकर्ताओं की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। इसी प्रकार, विभिन्न रेटिंग वाले कई बॉन्ड भी होने चाहिए। उचित यील्ड के लिए रेटेड और उससे नीचे के बॉन्ड भी शामिल किए जाने चाहिए। और ये प्रयास जारी हैं। पांडेय ने कहा कि खुदरा स्तर पर कॉरपोरेट बॉन्डों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
सेबी ने हाल ही में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के मकसद से बॉन्ड में निवेश की सीमा 1 लाख रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करदी है। उन्होंने इस क्षेत्र की एक समस्या यह भी बताई कि इसमें अलग-अलग तरह से कर बर्ताव होता है।
सेबी चेयरमैन ने कहा, हमें लोगों को बॉन्ड में निवेश के बारे में शिक्षित करना होगा क्योंकि जरूरी नहीं कि इन्हें परिपक्वता तक रखा जाए। आप इसे बेच भी सकते हैं। सवाल यह है कि क्या सेकंडरी बाजार ऐसी खरीद-बिक्री सुविधा प्रदान करेगा। एक लिक्विडिटी विंडो की सुविधा है, जिसमें आप पुट ऑप्शन दे सकते हैं। लेकिन अभी इसमें खास प्रगति नहीं हुई है। ज्यादा जारीकर्ता आगे नहीं आए हैं, बाजार अभी भी ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) मार्केट है।
चेयरमैन ने नीलामी सत्र के समापन पर जल्द ही परिपत्र जारी करने का भी संकेत दिया। इस बारे में पिछले वर्ष परामर्श पत्र जारी किया गया था। संगोष्ठी में पांडेय ने कहा कि पूंजी बाजार अब केवल आर्थिक विस्तार के मददगार होने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घरेलू बचत को उत्पादक निवेशों में लाने में भारत की विकास यात्रा में तेजी से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।