facebookmetapixel
Advertisement
EAM Jaishankar की दो टूक, विदेश और ऊर्जा नीति में भारत स्वतंत्रबांग्लादेश की राजनीति में नया अध्याय, तारिक रहमान सोमवार को लेंगे पीएम पद की शपथ; PM Modi को भी निमंत्रणManappuram Finance में बैन कैपिटल की बड़ी एंट्री, RBI से मिली हरी झंडीसट्टेबाजी पर शिकंजा! RBI ने बदले कर्ज के नियम, बाजार में हलचलCredit Card Tips: क्या सच में फ्री होती है No Cost EMI? शर्तें पढ़े बिना न करें खरीदारीअब विदेशों में छाएगी यूपी की व्हिस्की, योगी सरकार की नई एक्सपोर्ट नीति से खुलेंगे दरवाजेदिसंबर संकट के बाद इंडिगो की बड़ी उड़ान, 1000 से ज्यादा पायलटों की भर्ती का ऐलानरेरा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ेगी जवाबदेहीनिफ्टी में आईटी सेक्टर की पकड़ कमजोर, 26 साल के निचले स्तर पर पहुंचा वेटेजQ3 में मजबूत प्रदर्शन के बाद इंफोसिस ने कर्मचारियों को औसतन 85% बोनस देने का ऐलान किया

अमीरों को सबसे अधिक पसंद है इक्विटी

Advertisement

दिलचस्प रूप से 60 साल से ज्यादा के अमीर और बेहद अमीर 40 साल से कम की युवा पीढ़ी की तुलना में कम चिंतित नजर आए।

Last Updated- November 12, 2024 | 10:40 PM IST
Equity MF flows at 12-month high in March

धनाढ्य निवेशकों (HNI) और अति धनाढ्य निवेशकों (UHNI) के लिए शेयर सबसे पसंदीदा परिसंपत्ति वर्ग है। इसका खुलासा 360 वन वेल्थ और क्रिसिल की के सर्वे से हुआ। करीब 39 फीसदी उत्तरदाताओं ने इक्विटी यानी शेयरों को अपनी पहली पसंद बताया। इसके बाद डेट और रियल एस्टेट को पसंद करने वाले 20-20 फीसदी उत्तरदाता हैं।

सर्वे में 388 एचएनआई और अल्ट्रा एचएनआई शामिल हुए। इसमें पाया गया कि 69 फीसदी अमीर निवेशक इक्विटी बाजार को बेहतर तरीके से समझते हैं। इसके बाद फिक्स्ड इनकम (66 फीसदी) और रियल एस्टेट (41 फीसदी) का स्थान रहा। इन निवेशों की प्राथमिक वजह पूंजी में बढ़ोतरी रही।

हालांकि सर्वे में शामिल सिर्फ 15 से 28 फीसदी अमीरों और बेहद अमीरों ने कहा कि उन्हें गिफ्ट सिटी, लार्ज वैल्यू फंडों, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट्स) और मार्केट लिंक्ड डिबेंचर के जरिये अंतरराष्ट्रीय निवेश के स्तर की समान रूप से समझ है।

साथ ही सर्वे से खुलासा हुआ कि 77 फीसदी उत्तरदाताओं को निवेश के फैसले के लिए पेशेवरों की सहायता की जरूरत होती है जिससे संपदा सलाहकारों की अहम भूमिका का पता चलता है। करीब 30 फीसदी निवेशकों ने प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों पर आधारित शुल्क का भुगतान कर सलाहकार सेवाएं लेने को प्राथमिकता दी।

इतना ही नहीं, सर्वे में शामिल कुल उत्तरदाताओं में से 90 फीसदी अपनी संपत्तियों पर वैश्विक घटनाक्रम के असर को लेकर चिंतित थे। हालांकि 60 साल से ज्यादा के एचएनआई और अल्ट्रा-एचएनआई उस युवा पीढ़ी के मुकाबले कम चिंतित दिखे जो अभी 40 साल की दहलीज तक नहीं पहुंची है। इसकी वजह शायद यह है कि बाजार के चक्रों के साथ जीने से हम ज्यादा मजबूत हो जाते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक 10 फीसदी निवेशकों ने परिसंपत्ति वर्ग के तौर पर सोने को तरजीह दी क्योंकि यह पोर्टफोलियो की बेहतर सुरक्षा के तौर पर काम करता है। इसके अलावा करीब 41 फीसदी उत्तरदाता विदेश में निवेश को इच्छुक दिखे। इनमें अल्ट्रा एचएनआई की ज्यादा (51 फीसदी) दिलचस्पी नजर आई जबकि 30 फीसदी एचएनआई इसके इच्छुक रहे।

Advertisement
First Published - November 12, 2024 | 10:30 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement