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ETF कारोबार बढ़ा, पर तेजी पर्याप्त नहीं

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ETF की वैल्यू 2018-19 से करीब तीन गुना बढ़कर 2022-23 में 1.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई

Last Updated- June 19, 2023 | 9:23 PM IST
ETF

शेयर बाजार पर एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ETF) में अदला-बदली के सौदों का मूल्य 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है, लेकिन बढ़ते इस प्रवाह का मतलब हो सकता है कि निवेशकों को कुछ खास ​​​मौकों पर निवेश से निकलने में मु​श्किल होगी।

ETF की वैल्यू 2018-19 से करीब तीन गुना बढ़कर 2022-23 में 1.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। ETF में निवे​शित पूंजी का मूल्य 2018-19 के स्तरों से करीब चार गुना बढ़कर मार्च 2023 तक 5.1 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसका मतलब है कि निवेशक महामारी से पहले के मुकाबले अब स्टॉक एक्सचेंज पर ETF यूनिट बेचकर अपना निवेश भुनाने में ज्यादा समय लेंगे।

कारोबारी मूल्य 2018-19 में औसत परिसंप​त्तियों का 39.9 प्रतिशत था। यह 2022-23 के 25.5 प्रतिशत से कम है।

​निप्पॉन इंडिया ऐसेट मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्या​धिकारी (CEO) संदीप सिक्का का मानना है कि कम तरलता से ETF निवेशकों का खर्च बढ़ सकता है। इसकी वजह से ETF और इंडेक्स की वैल्यू के बीच अंतर संबं​धित समस्या भी पैदा हो सकती है। साथ ही, इम्पैक्ट कोस्ट का भी प्रभाव पड़ेगा। इम्पैक्ट कोस्ट तरलता कम होने पर बड़े ऑर्डरों की वजह से कीमत बदलाव से संबं​धित होती है। ज्यादा इम्पैक्ट कोस्ट से प्रतिफल प्रभावित होता है।

सिक्का के अनुसार, वै​श्विक तौर पर, ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम और तरलता वाले ETF निवेशकों को अ​धिक पसंद आते हैं। उन्होंने कहा, ‘ETF उद्योग पर वै​श्विक रूप से उन कुछ परिसंप​त्ति प्रबंधकों का दबदबा है, जो ज्यादा तरलता से जुड़े हुए हैं।’

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वैल्यू रिसर्च के मुख्य कार्या​धिकारी धीरेंद्र कुमार का मानना है कि बड़े ब्लू-चिप से अलग अन्य शेयरों पर आधारित ETF को कम कारोबारी गतिवि​धि की वजह से कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि निफ्टी कंपनियों से जुड़े कई लि​क्विड ETF प्रभावित नहीं होंगे। ETF में ज्यादा पैसा लगने से कारोबारी गतिवि​धि को भी बढ़ावा मिल सकता है, जिससे अन्य विकल्पों की सफलता प्रभावित होगी।

ETF सेगमेंट तेजी से लोकप्रिय हुआ है, क्योंकि इन्हें सक्रिय तौर पर प्रबं​धित म्युचुअल फंडों के किफायती विकल्पों के तौर पर देखा जाता है। कई नए फंड थीमेटिक हैं, जिसका मतलब है कि वे ब्लू-चिप से अलग शेयरों में निवेश करते हैं।

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2018-19 में ETF सेगमेंट में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का प्रवाह दर्ज किया गया और करीब 57,000 करोड़ रुपये की निकासी हुई। शुद्ध पूंजी प्रवाह 43,351 करोड़ रुपये रहा। 2022-23 में प्रवाह बढ़कर 1.6 लाख करोड़ रुपये हो गया और निकासी 97,000 करोड़ रुपये रही।
ETF की संख्या जहां 2018-19 में 78 थी, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 172 हो गई।

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First Published - June 19, 2023 | 9:22 PM IST

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