India Oncology Market: भारत का ऑन्कोलॉजी बाजार नए दौर में प्रवेश कर रहा है, क्योंकि हालिया नियामकीय मंजूरी लंबे समय से चले आ रहे कीमोथेरेपी पर आधारित इलाज वाले प्रारूप से हटकर प्रिसिजन मेडिसिन की दिशा में निर्णायक बदलाव का संकेत दे रही है।
मंजूरियों और अंतिम चरण वाली नियामकीय समीक्षाओं से हाई-इंसिडेंस कैंसर में इम्यूनोथेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (एडीसी) और नियोजित थेरेपी के इस्तेमाल का विस्तार हो रहा है, जिससे बाजार की तेज वृद्धि और कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए मंच तैयार हो रहा है। एजहाइका ग्रुप की फार्मा विश्लेषक निराली शाह के अनुसार ट्यूमर-एग्नोस्टिक एडीसी, अगली पीढ़ी की टायरोसिन काइनेज इनहिबिटर और इम्यूनोथेरेपी के साथ-साथ एमएसडी के पेम्ब्रोलिजुमाब (कीट्रूडा) के लिए व्यापक मंजूरियां चल रहे संरचनात्म बदलाव को रेखांकित करती हैं।
उन्होंने कहा, ‘भारत स्पष्ट रूप से हाई-बर्डन कैंसर में और ज्यादा नियोजित उपचार के तरीकों की ओर बढ़ रहा है।’ उन्होंने कहा कि कई इम्यूनो-ऑन्कोलॉजी कॉम्बिनेशन, एडीसी और नियोजित एजेंट साल की दूसरे छमाही में सीडीएससीओ समीक्षा के लिए तैयार हैं। इन मंजूरियों से फेफड़े, स्तन और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के इलाज के विकल्पों में काफी विस्तार होने की उम्मीद है।
हाल के महीनों में पहले ही अधिक प्रभाव वाली कई मंजूरियां देखी जा चुकी हैं। इनमें ब्रेन कैंसर के लिए सर्वियर इंडिया की वोरासिडेनिब, हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा और मेलेनोमा के लिए इपिलिमुमाब और निवोलुमाब से जुड़ी कॉम्बिनेशन इम्यूनोथेरेपी की मंजूरी और कीट्रूडा के लिए नया संकेत विस्तार शामिल हैं। इसके अलावा सेल्परकेटिनिब और एस्ट्राजेनेका के ट्रास्टुजुमाब डेरक्सटेकन जैसे उपचार को नियामकीय स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे स्तन और गैस्ट्रिक कैंसर में प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी दवाओं की मौजदूगी को दम मिल रहा है।