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कांग्रेस ने SEBI चेयरपर्सन पर लगाया नया आरोप, कहा- जांच वाली दवा कंपनी से माधवी पुरी बुच ने लिया किराया

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बुच को दवा कंपनी वॉकहार्ट से जुड़ी उस सहायक इकाई से किराये की आय प्राप्त हुई, जिसकी सेबी द्वारा insider trading समेत कई मामलों में जांच की जा रही थी।

Last Updated- September 06, 2024 | 10:09 PM IST
Madhabi Puri Buch

कांग्रेस ने शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की अध्यक्ष माधवी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) पर नए आरोप लगाए और कहा कि उनकी किराये की आय हितों का टकराव थी। विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया कि बुच को दवा कंपनी वॉकहार्ट से जुड़ी उस सहायक इकाई से किराये की आय प्राप्त हुई, जिसकी सेबी द्वारा भेदिया कारोबार (insider trading) समेत कई मामलों में जांच की जा रही थी।

बुच को पिछले 6 वित्त वर्षों (वित्त वर्ष 2019 से वित्त वर्ष 2024 के बीच) में कैरोल इन्फो सर्विसेज से 2.16 करोड़ रुपये की कुल किराया आय प्राप्त हुई। बुच अप्रैल 2017 से अक्टूबर 2021 तक सेबी की पूर्णकालिक सदस्य थीं और मार्च 2022 में उन्होंने सेबी प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। कांग्रेस ने कहा है, ‘सेबी के पिछले अध्यक्षों ने हितों के टकराव के जरा से साये से बचने के लिए काफी दूरी रखी है, सेबी में अपनी भूमिकाओं में और अपने पिछले पदों पर भी। इसके विपरीत बुच ने अपने निवेश को सिर्फ अपने पति को स्थानांतरित किया जिससे विश्वसनीयता को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं।’

बुच पर इन आरोपों के बीच वॉकहार्ट का शेयर शुक्रवार को 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट के साथ 1,035 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, सेबी और बुच ने कांग्रेस के आरोपों पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की है और वॉकहार्ट ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

कांग्रेस ने चार आदेशों का हवाला दिया है जिनमें दो निपटान आदेश भी शामिल हैं। ये आदेश मार्च 2023 और जुलाई 2023 के बीच के हैं। बुच के सेबी अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने से पहले ही इनमें से एक निपटान आदेश को अंतिम रूप दिया गया था, जिसके तहत वॉकहार्ट ने फरवरी 2023 में सेबी को 27 लाख रुपये का भुगतान किया। यह भुगतान सेबी की उच्चाधिकार सलाहकार समिति की सिफारिश पर किया गया था।

दूसरा निपटान आदेश मई 2023 में जारी किया गया था जिसमें वॉकहार्ट ने सेटलमेंट राशि के तौर पर 36.7 लाख रुपये चुकाए। हालांकि, दो आदेश एक ही मामले के हैं- एक निर्णायक अधिकारी द्वारा और दूसरा एक महीने के अंतराल में अंतिम आदेश। आदेशों को पढ़ने से पता चलता है कि वॉकहार्ट को दोनों में से किसी भी आदेश में नोटिस नहीं किया गया था।

सेबी प्रमुख की आय और कथित संबंधों पर ‘खुलासों’ की श्रृंखला में विपक्ष की ओर से यह तीसरा हमला है। इस सप्ताह की शुरुआत में कांग्रेस ने आईसीआईसीआई बैंक से बुच को कथित भुगतान और ईसॉप की मात्रा और संख्या को लेकर सवाल उठाए थे। आईसीआईसीआई बैंक ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा था कि बुच को अक्टूबर 2013 में उनकी सेवानिवृति के बाद कोई वेतन या ईसॉप (ESOP) नहीं दिया गया।

First Published - September 6, 2024 | 9:48 PM IST

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